नई दिल्ली: एयर इंडिया में 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली सिंगापुर एयरलाइंस (SIA) ने कहा है कि टाटा समूह के नेतृत्व में एयर इंडिया के परिवर्तन (Transformation) की दिशा में मजबूत प्रगति देखने को मिल रही है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि एयर इंडिया में उसका निवेश उसकी लंबी अवधि की मल्टी-हब रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और फिलहाल निवेश के मूल्य में किसी तरह की कटौती (Impairment) की आवश्यकता नहीं है।
यह बयान 24 जुलाई को होने वाली कंपनी की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) से पहले शेयरधारकों और निवेशकों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में सामने आया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सिंगापुर एयरलाइंस भारत के तेजी से बढ़ते एविएशन बाजार और एयर इंडिया की भविष्य की संभावनाओं को लेकर आश्वस्त है।
एयर इंडिया में निवेश पर नहीं पड़ेगा असर
सिंगापुर एयरलाइंस ने बताया कि समीक्षा के दौरान ऐसे संकेत मिले थे जिनके आधार पर एयर इंडिया में निवेश का औपचारिक इम्पेयरमेंट असेसमेंट किया गया। हालांकि विस्तृत मूल्यांकन के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि निवेश के मूल्य में किसी प्रकार की कमी दर्ज करने की आवश्यकता नहीं है।
कंपनी के अनुसार, एयर इंडिया में उसकी 25.1 फीसदी हिस्सेदारी भारत के विमानन क्षेत्र में दीर्घकालिक विकास की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रहेगी।
भारत के एविएशन सेक्टर पर जताया भरोसा
सिंगापुर एक्सचेंज में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, कंपनी ने कहा कि भारत का विमानन बाजार दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल है। बढ़ती घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा की मांग आने वाले वर्षों में एयर इंडिया के लिए बड़े अवसर पैदा करेगी।
इसी वजह से सिंगापुर एयरलाइंस एयर इंडिया के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को दीर्घकालिक निवेश के रूप में देख रही है।
कई चुनौतियों के बावजूद सुधार जारी
सिंगापुर एयरलाइंस ने माना कि एयर इंडिया अभी भी कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- भारतीय रुपये का अवमूल्यन
- वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान
- पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का बंद होना
- जून 2025 का विमान हादसा, जिसमें 260 लोगों की मौत हुई थी
इसके बावजूद कंपनी का कहना है कि एयर इंडिया ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय सुधार किया है।
इन क्षेत्रों में दिखा बड़ा बदलाव
सिंगापुर एयरलाइंस के मुताबिक एयर इंडिया ने पिछले कुछ समय में निम्नलिखित क्षेत्रों में मजबूत प्रगति दर्ज की है—
- ग्राहक अनुभव (Customer Experience) में सुधार
- विमान बेड़े (Fleet) का विस्तार
- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का विस्तार
- परिचालन प्रदर्शन (Operational Performance) बेहतर हुआ
- ग्राउंड सर्विस और इन-फ्लाइट सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार
इन सुधारों के चलते एयर इंडिया धीरे-धीरे अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति मजबूत कर रही है।
अतिरिक्त फंडिंग पर क्या बोली SIA?
कंपनी ने कहा कि यदि भविष्य में एयर इंडिया अतिरिक्त पूंजी की मांग करती है तो उसका निदेशक मंडल इस प्रस्ताव का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करेगा। निर्णय लेते समय समूह की अपनी पूंजी जरूरतों और एयर इंडिया की कारोबारी रणनीति दोनों को ध्यान में रखा जाएगा।
हालांकि, कंपनी ने उन मीडिया रिपोर्ट्स पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया जिनमें दावा किया गया था कि एयर इंडिया ने अक्टूबर 2025 में 1.1 अरब डॉलर के अतिरिक्त निवेश की मांग की थी।
एयर इंडिया के बोर्ड में शामिल हैं SIA के CEO
सिंगापुर एयरलाइंस ने यह भी बताया कि उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एयर इंडिया के निदेशक मंडल में गैर-कार्यकारी और गैर-स्वतंत्र निदेशक के रूप में शामिल हैं। इससे कंपनी एयर इंडिया को रणनीतिक मार्गदर्शन और वैश्विक विमानन उद्योग का अनुभव उपलब्ध करा रही है।
भारत के एविएशन बाजार पर दीर्घकालिक दांव
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में शामिल है। बढ़ते मध्यम वर्ग, घरेलू यात्रा की मांग और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के विस्तार को देखते हुए एयर इंडिया के पास भविष्य में मजबूत विकास की संभावनाएं हैं। सिंगापुर एयरलाइंस का यह बयान भी इसी भरोसे को दर्शाता है कि चुनौतियों के बावजूद एयर इंडिया का परिवर्तन सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।


