नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स (Sensex) इंट्रा-डे कारोबार में 800 अंकों तक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 (Nifty 50) 24,000 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। आईटी (IT), फार्मा (Pharma) और बैंकिंग शेयरों में तेज बिकवाली ने पूरे बाजार का माहौल खराब कर दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।
पिछले कारोबारी सत्र यानी 21 जुलाई को भी बाजार कमजोरी के साथ बंद हुआ था। उस दिन सेंसेक्स 238.41 अंक टूटकर 77,470.11 और निफ्टी 50.80 अंक गिरकर 24,187.70 पर बंद हुआ था। बुधवार को बाजार की शुरुआत भी लाल निशान में हुई और दिन चढ़ने के साथ बिकवाली और तेज होती गई।
दोपहर तक बाजार का हाल
दोपहर करीब 12:27 बजे सेंसेक्स 726.70 अंक यानी 0.94% टूटकर 76,743.41 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 197.45 अंक यानी 0.82% की गिरावट के साथ 23,990.25 पर पहुंच गया।
इंट्रा-डे कारोबार के दौरान सेंसेक्स 801.35 अंक तक टूटकर 76,668.76 और निफ्टी 219.15 अंक गिरकर 23,968.55 तक पहुंच गया।
हालांकि अधिकांश एशियाई बाजारों में मजबूती देखने को मिली, लेकिन घरेलू बाजार वैश्विक और सेक्टर-विशिष्ट दबाव के चलते कमजोर बने रहे।
बाजार में गिरावट की 4 बड़ी वजहें
1. IT और Pharma सेक्टर में तेज बिकवाली
बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव आईटी और फार्मा शेयरों का रहा।
अमेरिका में जेनेरिक दवाइयों पर संभावित टैरिफ संबंधी चिंताओं के कारण फार्मा कंपनियों में बिकवाली बढ़ गई। इसका असर निफ्टी फार्मा इंडेक्स पर भी दिखा, जो 1% से ज्यादा टूट गया।
दूसरी ओर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी वैश्विक कंपनियों में तेजी के कारण भारतीय आईटी कंपनियों पर दबाव बना। निवेशकों ने आईटी शेयरों में मुनाफावसूली की, जिससे निफ्टी आईटी इंडेक्स भी 1% से अधिक गिर गया।
इसके अलावा बैंकिंग सेक्टर में भी भारी बिकवाली रही। सरकारी बैंकों का इंडेक्स 2% से ज्यादा और निजी बैंक इंडेक्स करीब 1.5% से अधिक फिसल गया।
2. अमेरिका-ईरान तनाव से बिगड़ा निवेशकों का भरोसा
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने लगातार 11वीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिनमें ऑपरेशन सेंटर, एयरक्राफ्ट हैंगर और ड्रोन स्टोरेज साइट्स को निशाना बनाया गया।
इस घटनाक्रम के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका है, जिसका सीधा असर वैश्विक शेयर बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।
3. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
भू-राजनीतिक तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा।
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 93 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई, चालू खाते के घाटे और कंपनियों की लागत बढ़ने की चिंता पैदा होती है।
इसी वजह से निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी।
4. बाजार में बढ़ी घबराहट
बाजार में उतार-चढ़ाव को मापने वाला India VIX भी निवेशकों की नजर में रहा।
हालांकि रिपोर्ट के समय इंडिया VIX करीब 13.19 पर था, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के कारण बाजार में वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका बनी हुई है। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे इक्विटी बाजार पर दबाव बढ़ जाता है।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में
केवल बड़े शेयर ही नहीं बल्कि व्यापक बाजार (Broad Market) में भी बिकवाली देखने को मिली।
- निफ्टी मिडकैप 100 में करीब 0.5% की गिरावट।
- निफ्टी स्मॉलकैप 100 भी लगभग आधा फीसदी टूटा।
- कई सेक्टरों में निवेशकों ने मुनाफावसूली की।
इससे साफ संकेत मिला कि गिरावट केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही बल्कि पूरे बाजार में बिकवाली का दबाव बना।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार पर वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका-ईरान तनाव का असर बना रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को घबराकर फैसले लेने के बजाय अपने निवेश पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर मानी जाती है, जबकि शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को अधिक सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। NewsJagran किसी भी शेयर में निवेश की सलाह नहीं देता।


