नई दिल्ली: गोल्ड ज्वैलरी बनाने वाली प्रमुख कंपनी Rajesh Exports एक बार फिर चर्चा में है। कंपनी पर कथित ₹15 लाख करोड़ के रेवेन्यू को गलत तरीके से पेश करने के आरोपों के बाद अब इसके शेयरहोल्डिंग पैटर्न में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जून 2026 तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी घटा दी है। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और रिटेल निवेशकों ने मामूली खरीदारी करते हुए अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है।
Highlights
- ₹15 लाख करोड़ के कथित रेवेन्यू विवाद के बाद कंपनी फिर चर्चा में।
- जून 2026 में FIIs ने Rajesh Exports में हिस्सेदारी घटाई।
- DIIs और रिटेल निवेशकों ने हल्की बढ़ोतरी दर्ज की।
- प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 54.55% पर स्थिर रही।
- शेयरहोल्डिंग पैटर्न से निवेशकों की बदलती रणनीति सामने आई।
जून 2026 शेयरहोल्डिंग पैटर्न में क्या बदला?
राजेश एक्सपोर्ट्स द्वारा जारी जून 2026 शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार, कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 54.55% पर पहले की तरह कायम है। हालांकि विदेशी निवेशकों ने कंपनी में अपना निवेश कम किया है।
- FIIs की हिस्सेदारी: मार्च 2026 में 14.26% थी, जो जून 2026 में घटकर 12.61% रह गई।
- DIIs की हिस्सेदारी: मार्च 2026 में 10.80% से बढ़कर जून 2026 में 10.83% हो गई।
- पब्लिक शेयरहोल्डिंग: मार्च 2026 के 20.39% से बढ़कर जून 2026 में 22.02% पहुंच गई।
यह आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया है, जबकि घरेलू निवेशकों और खुदरा निवेशकों ने सीमित स्तर पर भरोसा दिखाया है।
क्या है ₹15 लाख करोड़ रेवेन्यू विवाद?
हाल के महीनों में Rajesh Exports उस समय सुर्खियों में आई थी जब कंपनी के प्रमोटर राजेश मेहता पर कथित तौर पर ₹15 लाख करोड़ के रेवेन्यू को गलत तरीके से पेश करने के आरोप लगे। इस मामले ने शेयर बाजार और राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा पैदा की।
विवाद सामने आने के बाद कंपनी के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली और कई बड़े निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी कम कर दी। मामले से जुड़े तथ्यों और नियामकीय जांच पर निवेशकों की लगातार नजर बनी हुई है।
विदेशी निवेशकों ने क्यों दिखाई सतर्कता?
शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशक आमतौर पर कॉर्पोरेट गवर्नेंस, पारदर्शिता और नियामकीय जोखिमों को लेकर बेहद संवेदनशील रहते हैं। ऐसे में किसी कंपनी से जुड़े बड़े विवाद के बाद FIIs का निवेश घटाना बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।
हालांकि DIIs और रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी में हुई मामूली बढ़ोतरी यह भी दर्शाती है कि कुछ घरेलू निवेशकों ने गिरावट के दौरान अवसर तलाशने की कोशिश की है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी कंपनी के शेयरहोल्डिंग पैटर्न में बदलाव निवेशकों की धारणा का संकेत देता है, लेकिन केवल इसी आधार पर निवेश का निर्णय लेना उचित नहीं होता। निवेशकों को कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, नियामकीय घटनाक्रम, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और भविष्य की कारोबारी संभावनाओं का भी आकलन करना चाहिए।
यदि आने वाले समय में कंपनी विवाद से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टता देती है और कारोबार में सुधार दिखता है, तो निवेशकों की धारणा में बदलाव संभव है। वहीं, यदि जांच या अन्य घटनाक्रम नकारात्मक रहते हैं, तो शेयर पर दबाव बना रह सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


