भारत ने सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) को लेकर अपना रुख और स्पष्ट कर दिया है। करीब 15 महीने पहले इस संधि को स्थगित करने के बाद अब केंद्र सरकार का कहना है कि 1960 का सिंधु जल समझौता अपने मौजूदा स्वरूप में दोबारा लागू नहीं हो सकता। यदि भविष्य में कोई नई व्यवस्था बनती है तो वह संशोधित शर्तों के साथ होगी। इस बीच भारत ने चिनाब नदी बेसिन में 4,870 मेगावाट क्षमता वाली पांच बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है, जिन्हें ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत अब अपने हिस्से के जल संसाधनों का अधिकतम और प्रभावी उपयोग करने की नीति पर आगे बढ़ रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद न केवल बिजली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि जम्मू-कश्मीर सहित पूरे उत्तरी क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति और विकास को भी मजबूती मिलेगी।
भारत ने साफ किया रुख, पुराने स्वरूप में नहीं लौटेगा सिंधु जल समझौता
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत पाकिस्तान के साथ जल समझौते पर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन 1960 के मौजूदा प्रारूप को स्वीकार नहीं करेगा। भविष्य में किसी भी नए समझौते के लिए नई शर्तें और नई व्यवस्था जरूरी होगी।
सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा लगातार सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने के कारण दोनों देशों के बीच विश्वास पूरी तरह समाप्त हो चुका है। ऐसे में पहले जैसी व्यवस्था जारी रखना संभव नहीं माना जा रहा।
चिनाब बेसिन में 5 बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर तेज हुआ काम
भारत फिलहाल चिनाब नदी बेसिन में पांच प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रहा है। इनकी कुल स्थापित क्षमता 4,870 मेगावाट होगी।
| परियोजना | क्षमता | मौजूदा स्थिति |
|---|---|---|
| सावलकोट | 1,856 MW | मंजूरी चरण में |
| पाकल दुल | 1,000 MW | 80% निर्माण पूरा |
| रतले | 850 MW | 29% निर्माण पूरा |
| किरू | 624 MW | 82% निर्माण पूरा |
| क्वार | 540 MW | 33% निर्माण पूरा |
इन परियोजनाओं पर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी NHPC काम कर रही है।
पाकल दुल परियोजना सबसे पहले होगी शुरू
1,000 मेगावाट क्षमता वाली पाकल दुल परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। NHPC का लक्ष्य इसे वित्त वर्ष 2026-27 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2027) में चालू करने का है।
यह परियोजना शुरू होने के बाद चिनाब बेसिन में बिजली उत्पादन क्षमता में बड़ी बढ़ोतरी होगी।
किरू परियोजना भी अंतिम चरण में
624 मेगावाट क्षमता वाली किरू हाइड्रोपावर परियोजना का लगभग 82 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है।
इसे भी मार्च 2027 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के पूरा होने के बाद जम्मू-कश्मीर में बिजली उत्पादन क्षमता और ग्रिड स्थिरता दोनों मजबूत होंगी।
क्वार और रतले परियोजनाओं पर भी तेजी
540 मेगावाट की क्वार परियोजना का लगभग 33 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसे मार्च 2028 तक चालू करने की योजना है।
वहीं 850 मेगावाट की रतले परियोजना का करीब 29 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है। इसके नवंबर 2028 तक व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने की संभावना है।
सबसे बड़ा प्रोजेक्ट सावलकोट, लेकिन मंजूरी का इंतजार
पूरी पाइपलाइन की सबसे बड़ी परियोजना 1,856 मेगावाट क्षमता वाली सावलकोट हाइड्रोपावर परियोजना है।
फिलहाल यह परियोजना केंद्र सरकार की वित्तीय और पर्यावरणीय मंजूरियों का इंतजार कर रही है।
NHPC के अनुसार, औपचारिक निवेश स्वीकृति मिलने के बाद इसके निर्माण में लगभग 96 महीने (करीब 8 वर्ष) का समय लगेगा।
अकेले सावलकोट परियोजना की क्षमता पूरी 4,870 मेगावाट पाइपलाइन का लगभग 38 प्रतिशत है।
अब तक कितना खर्च हुआ?
NHPC के अनुसार मार्च 2026 तक चार निर्माणाधीन परियोजनाओं—पाकल दुल, किरू, क्वार और रतले—पर लगभग 16,024 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
इन चारों परियोजनाओं की संयुक्त अनुमानित लागत करीब 27,945 करोड़ रुपये है।
सालाना 18.61 अरब यूनिट बिजली उत्पादन का लक्ष्य
जब पांचों परियोजनाएं पूरी तरह चालू हो जाएंगी, तब इनसे हर साल लगभग 18.61 अरब यूनिट (18.61 Billion Units) स्वच्छ बिजली का उत्पादन होगा।
इससे भारत के लिए कई बड़े फायदे होंगे—
- स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में बढ़ोतरी
- ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम होगी
- जम्मू-कश्मीर में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा
- राष्ट्रीय ग्रिड को अतिरिक्त बिजली मिलेगी
- सिंधु बेसिन में भारत अपने जल अधिकारों का अधिक प्रभावी उपयोग कर सकेगा
भारत ने आतंकवाद को बनाया नई संधि की शर्त
सरकारी सूत्रों के मुताबिक भविष्य में यदि सिंधु जल समझौते पर नई बातचीत होती है तो उसकी सबसे अहम शर्त होगी कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और विश्वसनीय तरीके से समाप्त करे।
भारत का कहना है कि बिना विश्वास बहाली के पानी के बंटवारे की पुरानी व्यवस्था दोबारा लागू नहीं की जा सकती।
सिंधु जल समझौते से जुड़े प्रमुख घटनाक्रम
25 जनवरी 2023
भारत ने किशनगंगा और रतले परियोजनाओं को लेकर पाकिस्तान को पहला औपचारिक नोटिस भेजा।
30 अगस्त 2024
भारत ने संधि की व्यापक समीक्षा और संशोधन की मांग करते हुए दूसरा नोटिस जारी किया।
22-23 अप्रैल 2025
पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने अगले दिन सिंधु जल समझौते को स्थगित करने का फैसला लिया।
15 मई 2026
स्थायी मध्यस्थता अदालत (PCA) के फैसले को भारत ने अवैध बताते हुए खारिज कर दिया।
2 जुलाई 2026
पाकिस्तान ने भारत के फैसले को स्वीकार करने से इनकार किया और संधि को बाध्यकारी बताया।
भारत की नई रणनीति क्या है?
भारत का कहना है कि उसने 1960 के बाद कई युद्धों और गंभीर द्विपक्षीय तनाव के बावजूद सिंधु जल समझौते का पालन किया। लेकिन लगातार सीमा पार आतंकवाद ने दोनों देशों के बीच विश्वास खत्म कर दिया है।
अब भारत अपनी सीमा के भीतर उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ बिजली उत्पादन और क्षेत्रीय विकास को प्राथमिकता दे रहा है। चिनाब बेसिन की 4,870 मेगावाट क्षमता वाली ये पांच परियोजनाएं इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही हैं।


