New Labour Code Salary Rules: केंद्र सरकार के नए लेबर कोड के लागू होने के बाद कर्मचारियों के वेतन भुगतान, फुल एंड फाइनल सेटलमेंट और वेतन विवादों से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। नए प्रावधानों के तहत कंपनियों को हर महीने की 7 तारीख तक कर्मचारियों का वेतन देना अनिवार्य होगा। वहीं, यदि कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता है, इस्तीफा देता है या उसे कंपनी से हटाया जाता है, तो दो कार्यदिवस के भीतर उसका पूरा फुल एंड फाइनल सेटलमेंट करना होगा। इसके अलावा वेतन विवादों के निपटारे के लिए नई व्यवस्था और कर्मचारियों के अधिकारों को भी मजबूत किया गया है।
महीने की 7 तारीख तक देना होगा वेतन
नए लेबर कोड के तहत सभी कंपनियों और संस्थानों के लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारियों को महीने की समाप्ति के बाद अधिकतम सात दिनों के भीतर वेतन मिल जाए। यानी किसी भी स्थिति में वेतन भुगतान में अनावश्यक देरी नहीं की जा सकेगी।
वेतन भुगतान का नियम कर्मचारियों की श्रेणी के अनुसार भी तय किया गया है।
- मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अगले महीने की 7 तारीख तक सैलरी मिलेगी।
- दैनिक मजदूरी पर काम करने वालों को शिफ्ट खत्म होने के तुरंत बाद भुगतान करना होगा।
- साप्ताहिक भुगतान पाने वालों को उनकी साप्ताहिक छुट्टी से पहले वेतन देना होगा।
- पखवाड़े (15 दिन) के आधार पर काम करने वालों को संबंधित अवधि खत्म होने के दो दिनों के भीतर भुगतान करना होगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य समय पर वेतन सुनिश्चित करना और कर्मचारियों की वित्तीय परेशानियों को कम करना है।
नौकरी छोड़ने पर सिर्फ 2 दिन में होगा फुल एंड फाइनल सेटलमेंट
नए नियम का सबसे बड़ा बदलाव फुल एंड फाइनल सेटलमेंट को लेकर है।
यदि कोई कर्मचारी:
- इस्तीफा देता है,
- रिटायर होता है,
- नौकरी से निकाला जाता है,
- या कंपनी उसकी सेवाएं समाप्त करती है,
तो नियोक्ता को दो कार्यदिवस के भीतर पूरा भुगतान करना होगा। इसमें वेतन, अवकाश नकदीकरण (यदि लागू हो), बोनस, प्रोत्साहन राशि और अन्य सभी देय भुगतान शामिल होंगे।
अभी कई कंपनियों में यह प्रक्रिया 30 से 90 दिन तक चलती है, लेकिन नया नियम लागू होने पर इसमें काफी तेजी आएगी।
अब सभी कर्मचारियों पर लागू होगा नियम
पहले Payment of Wages Act, 1936 के तहत केवल निर्धारित वेतन सीमा तक आने वाले कर्मचारियों को ही कुछ अधिकार मिलते थे।
लेकिन नए Code on Wages के तहत यह नियम सभी कर्मचारियों पर लागू होगा।
इसका मतलब है कि अब:
- जूनियर कर्मचारी,
- मिडिल मैनेजमेंट,
- सीनियर मैनेजमेंट,
- और अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारी
भी समान वेतन सुरक्षा के दायरे में आएंगे।
बिना अनुमति वेतन कटा तो कहां करें शिकायत?
यदि कोई कंपनी:
- समय पर वेतन नहीं देती,
- बिना अनुमति वेतन काटती है,
- या भुगतान में गड़बड़ी करती है,
तो कर्मचारी इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर के पास शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
यह अधिकारी:
- शिकायत की जांच करेगा,
- दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझाने की कोशिश करेगा,
- बकाया वेतन दिलाने में सहायता करेगा।
यदि मामला फिर भी नहीं सुलझता, तो इसे औद्योगिक न्यायाधिकरण (Industrial Tribunal) तक ले जाया जा सकेगा।
बकाया वेतन का दावा अब 3 साल तक
नए लेबर कोड में कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए वेतन संबंधी दावा करने की समय सीमा तीन साल कर दी गई है।
पहले कई मामलों में यह अवधि केवल 6 महीने से 2 साल तक सीमित थी।
नई व्यवस्था से कर्मचारियों को:
- आवश्यक दस्तावेज जुटाने,
- कानूनी सलाह लेने,
- और उचित दावा दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।
पे-स्लिप देना होगा अनिवार्य
नई व्यवस्था के तहत हर नियोक्ता को कर्मचारियों को वेतन के साथ:
- फिजिकल पे-स्लिप,
- या इलेक्ट्रॉनिक पे-स्लिप
देना अनिवार्य होगा।
इससे कर्मचारियों को वेतन, कटौतियों और अन्य भुगतान की पूरी जानकारी पारदर्शी तरीके से मिल सकेगी।
वेतन कटौती पर भी रहेगी सीमा
नए नियमों में कंपनियों द्वारा वेतन से मनमानी कटौती पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।
यदि किसी कर्मचारी के वेतन से नियमों के खिलाफ कटौती की जाती है, तो वह संबंधित अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कर सकता है। इससे कर्मचारियों के आर्थिक अधिकारों की बेहतर सुरक्षा होगी।
तीन महीने में होगा विवाद का निपटारा
वेतन विवादों के लंबे समय तक लंबित रहने की समस्या को खत्म करने के लिए नए लेबर कोड में तीन महीने के भीतर दावों के निपटारे का लक्ष्य रखा गया है।
यदि आदेश के बाद भी नियोक्ता भुगतान नहीं करता, तो बकाया राशि की वसूली जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से भूमि राजस्व (Land Revenue) की तरह की जा सकेगी।
कर्मचारियों और कंपनियों दोनों के लिए क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि नए लेबर कोड से कर्मचारियों को समय पर वेतन, तेज फुल एंड फाइनल सेटलमेंट और विवादों के त्वरित समाधान का लाभ मिलेगा। वहीं कंपनियों को भी वेतन भुगतान और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और नियमबद्ध बनानी होगी। हालांकि, इन प्रावधानों का वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देगा जब सभी राज्यों में संबंधित नियम अधिसूचित होने के बाद लेबर कोड पूरी तरह लागू हो जाएगा।


