नई दिल्ली: भारत में कई ऐसे कारोबारी हैं जिन्होंने छोटे स्तर से शुरुआत कर अपनी मेहनत और दूरदर्शिता के दम पर अरबों रुपये का बिजनेस खड़ा किया। उन्हीं में एक नाम है मेट्रो ब्रांड्स (Metro Brands) के चेयरमैन रफीक मलिक का। 75 साल की उम्र में उनकी अनुमानित नेटवर्थ करीब 2.3 अरब डॉलर (लगभग ₹22,000 करोड़) है। जिस कंपनी की शुरुआत 1955 में मुंबई की एक छोटी-सी जूते की दुकान से हुई थी, वह आज देश के सबसे बड़े फुटवियर रिटेल नेटवर्क में शामिल है और 800 से अधिक शोरूम के जरिए लाखों ग्राहकों तक पहुंच बना चुकी है।
1955 में एक दुकान से हुई थी शुरुआत
मेट्रो ब्रांड्स की नींव वर्ष 1955 में रफीक मलिक के पिता मलिक तेजानी ने मुंबई में रखी थी। उन्होंने एक छोटी-सी फुटवियर दुकान खोली, जिसका नाम ‘मेट्रो’ रखा गया। उस दौर में ग्राहकों को अच्छी गुणवत्ता और बेहतर सेवा देने पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसकी बदौलत यह दुकान धीरे-धीरे लोकप्रिय होती चली गई।
समय के साथ मेट्रो ने अपनी अलग पहचान बनाई और मुंबई के बाद अन्य शहरों में भी विस्तार शुरू किया।
रफीक मलिक ने बदली कंपनी की तस्वीर
पिता के बाद जब रफीक मलिक ने कारोबार की कमान संभाली तो उन्होंने इसे सिर्फ एक स्थानीय दुकान तक सीमित नहीं रहने दिया। उन्होंने भारतीय फुटवियर बाजार की बढ़ती मांग को समझा और पूरे देश में स्टोर खोलने की रणनीति अपनाई।
आज मेट्रो ब्रांड्स देशभर में 800 से अधिक एक्सक्लूसिव स्टोर संचालित करती है। कंपनी प्रीमियम से लेकर मिड-रेंज और किफायती फुटवियर सेगमेंट तक अपनी मजबूत मौजूदगी रखती है।
इन ब्रांड्स ने दिलाई अलग पहचान
मेट्रो ब्रांड्स ने अलग-अलग ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई लोकप्रिय ब्रांड विकसित किए हैं।
- Metro – प्रीमियम और पारंपरिक फुटवियर के लिए प्रसिद्ध।
- Mochi – युवाओं और फैशन पसंद ग्राहकों के बीच लोकप्रिय।
- Walkway – किफायती और आरामदायक फुटवियर का विकल्प।
- इसके अलावा कंपनी कई अंतरराष्ट्रीय फुटवियर ब्रांड्स की भी रिटेल पार्टनर है।
इसी विविध पोर्टफोलियो ने कंपनी को भारत के सबसे बड़े संगठित फुटवियर रिटेलर्स में शामिल कर दिया।
बेटी फराह मलिक भंजी संभाल रही हैं बड़ी जिम्मेदारी
रफीक मलिक ने कारोबार को नई पीढ़ी के साथ आगे बढ़ाने का फैसला किया। उनकी पांच बेटियों में से फराह मलिक भंजी वर्तमान में कंपनी की मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) हैं।
उनके नेतृत्व में कंपनी ने डिजिटल रिटेल, ई-कॉमर्स और आधुनिक स्टोर फॉर्मेट पर जोर दिया। बदलते समय के साथ ऑनलाइन बिक्री और ओम्नी-चैनल रणनीति ने मेट्रो ब्रांड्स की बाजार में स्थिति और मजबूत की।
2021 का IPO रहा सुपरहिट
कंपनी ने दिसंबर 2021 में शेयर बाजार में अपना IPO लॉन्च किया था। इस इश्यू को निवेशकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली और लिस्टिंग के बाद भी कंपनी बाजार की प्रमुख फुटवियर कंपनियों में शामिल हो गई।
IPO के जरिए कंपनी ने विस्तार, ब्रांड विकास और कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।
राकेश झुनझुनवाला ने भी लगाया था बड़ा दांव
भारत के दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला ने भी मेट्रो ब्रांड्स की क्षमता को पहचानते हुए इसमें निवेश किया था। उनके निधन के बाद अब उनकी पत्नी रेखा झुनझुनवाला कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बनाए हुए हैं।
किसी भी कंपनी में अनुभवी निवेशकों की मौजूदगी बाजार में उसके प्रति भरोसे का संकेत मानी जाती है।
₹22,000 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 75 वर्षीय रफीक मलिक की रियल-टाइम नेटवर्थ करीब 2.3 अरब डॉलर (लगभग ₹22,162 करोड़) आंकी जाती है। एक छोटे पारिवारिक कारोबार को राष्ट्रीय स्तर के फुटवियर साम्राज्य में बदलने का उनका सफर भारतीय उद्यमिता की प्रेरणादायक मिसाल माना जाता है।
आज मेट्रो ब्रांड्स देशभर के प्रमुख शहरों में अपने सैकड़ों स्टोर्स के जरिए लाखों ग्राहकों को सेवा दे रही है और भारतीय फुटवियर उद्योग में अग्रणी कंपनियों में गिनी जाती है।
निष्कर्ष
रफीक मलिक की कहानी बताती है कि मजबूत विजन, ग्राहकों का भरोसा और समय के साथ खुद को बदलने की क्षमता किसी भी छोटे कारोबार को बड़ी सफलता दिला सकती है। 1955 में शुरू हुई एक छोटी जूते की दुकान आज हजारों करोड़ रुपये की सूचीबद्ध कंपनी बन चुकी है और भारतीय रिटेल सेक्टर में सफलता का बेहतरीन उदाहरण है।


