MSME Development Amendment Bill 2026: केंद्र सरकार देश के करोड़ों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को राहत देने के लिए मानसून सत्र में MSME विकास (संशोधन) विधेयक 2026 पेश कर सकती है। इस प्रस्तावित बिल का उद्देश्य MSME सेक्टर की मौजूदा जरूरतों के अनुरूप कानून में बदलाव करना, भुगतान व्यवस्था को मजबूत बनाना और कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो बड़े खरीदारों को MSME से खरीदे गए सामान या सेवाओं का भुगतान तय समय सीमा के भीतर करना होगा, जिससे छोटे कारोबारियों की सबसे बड़ी समस्या दूर हो सकती है।
20 साल बाद MSME कानून में बड़ा बदलाव
MSME विकास अधिनियम पहली बार वर्ष 2006 में लागू किया गया था। पिछले दो दशकों में देश का कारोबारी माहौल तेजी से बदला है। डिजिटल कारोबार, ई-कॉमर्स, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और नई तकनीकों के कारण MSME सेक्टर की आवश्यकताएं भी बदल चुकी हैं।
सरकार का मानना है कि मौजूदा कानून अब इन नई चुनौतियों और जरूरतों को पूरी तरह पूरा नहीं कर पा रहा है। इसी वजह से संशोधित विधेयक लाकर कानून को अधिक आधुनिक और व्यावहारिक बनाया जाएगा।
45 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा अनिवार्य
प्रस्तावित संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान MSME को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है।
वर्तमान नियमों के अनुसार भी किसी MSME से सामान या सेवाएं खरीदने वाले खरीदार को अधिकतम 45 दिनों के भीतर भुगतान करना होता है। लेकिन व्यवहार में बड़ी संख्या में कंपनियां और संस्थान इस नियम का पालन नहीं करते हैं।
इसका परिणाम यह होता है कि छोटे उद्योगों की कार्यशील पूंजी (Working Capital) प्रभावित होती है और उन्हें नए ऑर्डर लेने या उत्पादन बढ़ाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
सरकार अब ऐसे प्रावधानों को और प्रभावी बनाने की तैयारी कर रही है ताकि भुगतान में अनावश्यक देरी पर सख्ती की जा सके।
लंबित शिकायतें बनी हुई हैं बड़ी चुनौती
MSME मंत्रालय ने भुगतान में देरी की शिकायतों के समाधान के लिए विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी बनाया हुआ है।
इस पोर्टल पर प्रतिदिन सैकड़ों नई शिकायतें दर्ज होती हैं और कई मामलों का समाधान आपसी बातचीत से किया जाता है। इसके बावजूद एक लाख से अधिक भुगतान संबंधी शिकायतें अभी भी लंबित बताई जा रही हैं।
यही वजह है कि सरकार नए कानून के जरिए भुगतान प्रणाली को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाना चाहती है।
कारोबार शुरू करना होगा आसान
संशोधित बिल में केवल भुगतान व्यवस्था ही नहीं बल्कि Ease of Doing Business पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।
सरकार कई ऐसे पुराने नियमों और प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रही है जिनकी वजह से नए उद्यमियों को कारोबार शुरू करने में अनावश्यक देरी और दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
संभावना है कि संशोधित कानून के तहत:
- कई पुराने और जटिल नियम समाप्त किए जाएंगे।
- लाइसेंस एवं अनुमोदन प्रक्रिया सरल बनाई जाएगी।
- अनुपालन (Compliance) का बोझ कम किया जाएगा।
- डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
इससे नए उद्यमियों के लिए व्यवसाय शुरू करना पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकता है।
राज्यों को मिल सकते हैं अतिरिक्त अधिकार
सरकार MSME विकास में राज्यों की भूमिका को भी मजबूत करना चाहती है।
सूत्रों के अनुसार, संशोधित विधेयक में राज्यों को स्थानीय उद्योगों के विकास, प्रोत्साहन योजनाओं और निवेश आकर्षित करने के लिए अधिक अधिकार दिए जा सकते हैं। इससे राज्य अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार MSME नीतियां अधिक प्रभावी तरीके से लागू कर सकेंगे।
भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है MSME सेक्टर
देश की अर्थव्यवस्था में MSME सेक्टर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
- भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में MSME की हिस्सेदारी 30% से अधिक है।
- देश के कुल निर्यात में लगभग 35% योगदान MSME सेक्टर का है।
- करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार इसी क्षेत्र से मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भुगतान समय पर होने लगे और कारोबारी प्रक्रियाएं सरल बनें, तो MSME की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, निर्यात लागत घटेगी और भारतीय उद्योग वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
क्या होगा कारोबारियों पर असर?
यदि संसद से MSME विकास (संशोधन) विधेयक 2026 पारित हो जाता है, तो इसका सबसे बड़ा लाभ छोटे और मध्यम उद्योगों को मिलेगा। समय पर भुगतान मिलने से उनकी नकदी स्थिति मजबूत होगी, नए निवेश और विस्तार में आसानी होगी तथा रोजगार सृजन को भी गति मिल सकती है। साथ ही कारोबार शुरू करने और संचालन से जुड़े नियम सरल होने पर नए उद्यमियों को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।


