नई दिल्ली, 20 जुलाई: केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के तेजी से बढ़ते फिनटेक (FinTech) इकोसिस्टम को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि सरकार डिजिटल लोन प्लेटफॉर्म, पेमेंट एग्रीगेटर और अन्य फिनटेक सेवाओं की लगातार समीक्षा कर रही है। इसके तहत नियामकीय ढांचे को मजबूत किया गया है, साइबर सुरक्षा बढ़ाई गई है और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कई नए उपाय लागू किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर धोखाधड़ी और डेटा सुरक्षा जैसी चुनौतियां भी बढ़ी हैं। इन्हें देखते हुए सरकार और आरबीआई ने समय-समय पर नए नियम और निगरानी तंत्र लागू किए हैं, ताकि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन लोन सेवाओं पर लोगों का भरोसा और मजबूत हो सके।
सरकार लगातार कर रही है फिनटेक सेक्टर की समीक्षा
लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में पंकज चौधरी ने बताया कि वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य वित्तीय नियामक संस्थाएं डिजिटल लोन प्लेटफॉर्म, पेमेंट एग्रीगेटर तथा फिनटेक कंपनियों से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से चर्चा करती हैं।
उन्होंने कहा कि इन चर्चाओं के आधार पर समय-समय पर आवश्यक नियामकीय और पर्यवेक्षी हस्तक्षेप किए जाते हैं, जिससे वित्तीय प्रणाली सुरक्षित और पारदर्शी बनी रहे।
RBI ने जारी किया SRO-FT Framework
फिनटेक सेक्टर में बेहतर स्व-नियमन को बढ़ावा देने के लिए 30 मई 2024 को भारतीय रिजर्व बैंक ने Self-Regulatory Organisation for FinTech (SRO-FT) Framework जारी किया।
इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य है:
- फिनटेक कंपनियों के लिए नियामकीय मानकों को विकसित करना।
- नैतिक कारोबारी व्यवहार को बढ़ावा देना।
- बाजार में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
- सदस्य संस्थाओं के बीच विवादों का समाधान करना।
- उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाना।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से फिनटेक उद्योग अधिक जिम्मेदार और व्यवस्थित तरीके से काम करेगा।
साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण पर विशेष जोर
पंकज चौधरी ने बताया कि डिजिटल भुगतान प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए आरबीआई ने फरवरी 2021 में डिजिटल भुगतान सुरक्षा नियंत्रणों (Digital Payment Security Controls) पर मास्टर दिशा-निर्देश जारी किए थे।
इसके अलावा, नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम, 2023 (DPDP Act) लागू किया गया है। यह कानून डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ताओं के डेटा की सुरक्षा और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
सरकार ने यह भी बताया कि आधुनिक साइबर खतरों से निपटने के लिए AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे ऑनलाइन धोखाधड़ी की घटनाओं का तेजी से पता लगाया जा सके।
अवैध लोन ऐप्स के खिलाफ सख्ती
डिजिटल लोन ऐप्स के बढ़ते इस्तेमाल के साथ फर्जी और अवैध ऐप्स की समस्या भी सामने आई है। इसे रोकने के लिए गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 शुरू किया है।
इन माध्यमों से नागरिक ऑनलाइन धोखाधड़ी, अवैध लोन ऐप्स और अन्य साइबर अपराधों की शिकायत आसानी से दर्ज करा सकते हैं।
‘सचेत’ पोर्टल से भी दर्ज करा सकते हैं शिकायत
आरबीआई और बैंकिंग प्रणाली ने अवैध रूप से धन जमा करने या निवेश के नाम पर ठगी करने वाली संस्थाओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए ‘सचेत’ (Sachet) पोर्टल उपलब्ध कराया है।
इसके साथ ही State Level Coordination Committee (SLCC) के माध्यम से भी ऐसी गतिविधियों पर निगरानी रखी जाती है और शिकायतों का समाधान किया जाता है।
साइबर अपराध रोकने के लिए जागरूकता अभियान
सरकार ने बताया कि केवल नियम बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को जागरूक करना भी उतना ही जरूरी है। इसी उद्देश्य से आरबीआई और बैंक लगातार साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान चला रहे हैं।
इन अभियानों के तहत:
- एसएमएस अलर्ट भेजे जाते हैं।
- रेडियो और डिजिटल मीडिया पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
- ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के उपाय बताए जाते हैं।
- सुरक्षित डिजिटल भुगतान के बारे में जानकारी दी जाती है।
उपभोक्ताओं को मिलेगा अधिक सुरक्षित डिजिटल वित्तीय माहौल
सरकार का कहना है कि इन सभी उपायों का उद्देश्य डिजिटल वित्तीय सेवाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है। मजबूत नियामकीय ढांचा, डेटा सुरक्षा कानून, AI आधारित निगरानी प्रणाली और शिकायत निवारण तंत्र मिलकर भारत के फिनटेक इकोसिस्टम को नई मजबूती देंगे।


