नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल में 20 प्रतिशत (E20) से अधिक एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार ने कहा है कि यदि भविष्य में इस संबंध में कोई कदम उठाया जाता है तो वह वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी परीक्षण और सभी संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।
राज्यसभा में लिखित जवाब देते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि वर्तमान में सरकार का लक्ष्य E20 (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) तक सीमित है और इसे आगे बढ़ाने पर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।
E20 से आगे बढ़ाने का फिलहाल कोई निर्णय नहीं
सुरेश गोपी ने कहा कि सरकार ने अभी तक E20 से अधिक एथेनॉल मिश्रण लागू करने का कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में ऐसा कोई प्रस्ताव आता है तो उससे पहले व्यापक वैज्ञानिक एवं तकनीकी अध्ययन किए जाएंगे।
इसके अलावा ऑटोमोबाइल कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों (OMCs), अनुसंधान संस्थानों और अन्य हितधारकों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा ताकि किसी भी संभावित प्रभाव का सही आकलन किया जा सके।
तय समय से 5 साल पहले हासिल किया E20 लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 में पेट्रोल में औसत एथेनॉल मिश्रण केवल 1.53 प्रतिशत था, जो लगातार चरणबद्ध प्रयासों के बाद 2025-26 एथेनॉल आपूर्ति वर्ष में बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और हरित ईंधन नीति के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से देश को हुए बड़े फायदे
सरकार के अनुसार, 2014-15 से लागू एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ने देश की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और किसानों को बड़ा लाभ पहुंचाया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक:
- 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई।
- लगभग 316 लाख टन कच्चे तेल के आयात में कमी आई।
- करीब 952 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन कम हुआ।
- किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई।
सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
क्या E20 से इंजन खराब होता है?
पेट्रोल में अधिक एथेनॉल मिश्रण को लेकर समय-समय पर वाहन मालिकों की ओर से इंजन, फ्यूल पंप, जंग लगने और पानी के मिश्रण जैसी चिंताएं सामने आती रही हैं।
इस पर जवाब देते हुए सुरेश गोपी ने कहा कि सरकार को अब तक वाहन निर्माताओं, ऑटोमोबाइल एसोसिएशनों या उपभोक्ता संगठनों की ओर से ऐसी किसी व्यापक या प्रमाणित समस्या की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि मीडिया और सोशल मीडिया पर इस तरह की आशंकाएं सामने आई हैं, लेकिन इनका वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया है।
करोड़ों वाहन कर रहे हैं E20 ईंधन का उपयोग
मंत्री ने बताया कि वर्तमान में देश में:
- 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन
- 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें
पिछले लगभग ढाई से साढ़े तीन वर्षों से E15+ और E19-E20 ईंधन का उपयोग कर रही हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे वाहनों की भी है जिन्हें मूल रूप से E20 के लिए प्रमाणित नहीं किया गया था।
इसके बावजूद बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने, वाहन बंद पड़ने या गंभीर तकनीकी दिक्कतों का कोई सत्यापित प्रमाण सामने नहीं आया है।
वाहन कंपनियों के अध्ययन में भी नहीं मिला नुकसान
सुरेश गोपी ने उद्योग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि एक प्रमुख यात्री वाहन निर्माता ने 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों के सर्विस रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इनमें लगभग 1.5 करोड़ ऐसे वाहन भी शामिल थे जो E20 प्रमाणित नहीं थे।
जांच में ईंधन की वजह से किसी भी प्रकार के इंजन या वाहन को नुकसान पहुंचने का प्रमाण नहीं मिला। इसी तरह एक प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता के अध्ययन में भी समान निष्कर्ष सामने आए।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है एथेनॉल मिशन
विशेषज्ञों के अनुसार एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना और गन्ना व अन्य फसलों से जुड़े किसानों की आय में वृद्धि करना है। सरकार फिलहाल E20 लक्ष्य को सफलतापूर्वक लागू करने पर ध्यान दे रही है, जबकि भविष्य में इससे आगे बढ़ने का कोई भी निर्णय वैज्ञानिक प्रमाणों और सभी हितधारकों की सहमति के आधार पर ही लिया जाएगा।


