Rupee vs Dollar: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर ऑल टाइम लो के करीब पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है। हालांकि डॉलर इंडेक्स में मामूली कमजोरी देखने को मिली, लेकिन घरेलू कारणों की वजह से रुपया दबाव में बना रहा।
शुरुआती कारोबार में 12 पैसे टूटा रुपया
सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 12 पैसे की गिरावट के साथ 96.4575 प्रति डॉलर पर कारोबार करता दिखाई दिया। यह स्तर 21 मई के बाद का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले मई महीने में रुपया 96.96 प्रति डॉलर के ऑल टाइम लो पर पहुंच गया था।
शुक्रवार को अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और घरेलू बाजार में सकारात्मक माहौल के कारण रुपया 12 पैसे मजबूत होकर बंद हुआ था, लेकिन नए सप्ताह की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई।
कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाया दबाव
रुपये में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी मानी जा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है।
सोमवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब 3.04% की तेजी के साथ 90.78 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में जब तेल महंगा होता है तो आयातकों को अधिक डॉलर की जरूरत पड़ती है। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव बन जाता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बनी वजह
फॉरेक्स बाजार के जानकारों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली ने भी रुपये को कमजोर किया है।
एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 376.41 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। विदेशी निवेशक जब भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं तो उन्हें रुपये को डॉलर में बदलना पड़ता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया कमजोर होता है।
डॉलर इंडेक्स में हल्की कमजोरी
दिलचस्प बात यह रही कि रुपये पर दबाव के बावजूद डॉलर इंडेक्स में मामूली गिरावट दर्ज की गई। यह इंडेक्स छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाता है।
सोमवार को डॉलर इंडेक्स 0.05% की गिरावट के साथ 100.54 पर कारोबार कर रहा था। आमतौर पर डॉलर इंडेक्स कमजोर होने से उभरते बाजारों की मुद्राओं को कुछ राहत मिलती है, लेकिन इस बार घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों ने रुपये को संभलने का मौका नहीं दिया।
शेयर बाजार में भी दिखी कमजोरी
रुपये की गिरावट के साथ-साथ घरेलू शेयर बाजार में भी दबाव देखने को मिला।
- बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 600 अंक तक फिसला।
- निफ्टी भी 150 अंक से अधिक टूटकर कारोबार करता नजर आया।
बाजार में कमजोरी का असर विदेशी निवेश और रुपये दोनों पर देखने को मिला।
विदेशी मुद्रा भंडार से मिली राहत
हालांकि एक सकारात्मक खबर यह रही कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 10 जुलाई को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 964 मिलियन डॉलर बढ़कर 675.157 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार लंबे समय में रुपये को सहारा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और जरूरत पड़ने पर RBI को बाजार में हस्तक्षेप करने की क्षमता भी देता है।
रुपये पर आगे क्या रहेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये की दिशा मुख्य रूप से इन कारकों पर निर्भर करेगी—
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें
- पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का निवेश रुख
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े संकेत
- भारतीय रिजर्व बैंक की संभावित रणनीति
यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है, तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, वैश्विक तनाव कम होने या विदेशी निवेश लौटने की स्थिति में रुपये को कुछ राहत मिल सकती है।


