भारत में इथेनॉल (Ethanol) अब केवल वाहनों के ईंधन तक सीमित नहीं रह सकता। केंद्र सरकार अब इसे घरेलू रसोई तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय एक ऐसी नई नीति (Policy Framework) पर काम कर रहा है, जिसके तहत भविष्य में घरों में खाना पकाने के लिए एलपीजी (LPG) के साथ इथेनॉल को भी वैकल्पिक ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि इससे न केवल एलपीजी आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की बढ़ती इथेनॉल उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग भी किया जा सकेगा।
सरकार क्यों ला रही है इथेनॉल कुकिंग पॉलिसी?
हाल के वर्षों में भारत ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को बढ़ावा दिया है। अब सरकार इसी मॉडल को घरेलू रसोई तक विस्तार देने की योजना बना रही है।
ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता देखने को मिली। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा एलपीजी आयात करता है, जिससे आयात बिल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार घरेलू स्तर पर उपलब्ध स्वच्छ ईंधन के विकल्प तलाश रही है।
सूत्रों के अनुसार, नई नीति में इथेनॉल के उत्पादन, वितरण, स्टोव तकनीक, सब्सिडी और सप्लाई चेन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश शामिल किए जा सकते हैं।
सितंबर तक आ सकती है नई नीति
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, खाना पकाने के लिए इथेनॉल को वैकल्पिक स्वच्छ ईंधन बनाने की नीति पर तेजी से काम चल रहा है और इसे सितंबर तक अंतिम रूप दिया जा सकता है।
इससे पहले भी सरकार के निर्देश पर इथेनॉल आधारित कुकिंग स्टोव का परीक्षण किया जा चुका है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित और प्रभावी विकल्प बन सकता है।
क्या है इथेनॉल और कैसे बनता है?
इथेनॉल एक जैव ईंधन (Biofuel) है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे (Molasses) और अनाज जैसे मक्का एवं टूटे हुए चावल के फर्मेंटेशन से तैयार किया जाता है।
इसे ग्रीन फ्यूल माना जाता है क्योंकि इसके उपयोग से पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों की तुलना में कार्बन उत्सर्जन कम होता है।
LPG की जगह इथेनॉल से क्या होंगे फायदे?
अगर इथेनॉल आधारित कुकिंग सिस्टम लागू होता है तो इसके कई बड़े लाभ सामने आ सकते हैं।
- एलपीजी आयात पर निर्भरता कम होगी।
- विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
- किसानों को इथेनॉल उत्पादन के लिए अतिरिक्त बाजार मिलेगा।
- देश की अतिरिक्त इथेनॉल उत्पादन क्षमता का उपयोग हो सकेगा।
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
भारत के पास कितनी इथेनॉल उत्पादन क्षमता है?
CareEdge Ratings की रिपोर्ट के अनुसार भारत की इथेनॉल उत्पादन क्षमता अब सालाना 20 अरब लीटर (20 Billion Litres) से अधिक हो चुकी है। इसके अलावा चालू वित्त वर्ष में लगभग 4 अरब लीटर अतिरिक्त क्षमता भी जुड़ने की संभावना है।
वर्तमान में स्थिति कुछ इस प्रकार है:
| उपयोग | अनुमानित वार्षिक खपत |
|---|---|
| E20 ब्लेंडिंग प्रोग्राम | लगभग 11 अरब लीटर |
| शराब उद्योग | 3-3.5 अरब लीटर |
| फार्मा एवं केमिकल उद्योग | 3-3.5 अरब लीटर |
| संभावित अतिरिक्त उपलब्धता | लगभग 7 अरब लीटर |
यही अतिरिक्त उत्पादन घरेलू कुकिंग फ्यूल और निर्यात दोनों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
क्या होंगे ‘इथेनॉल ATM’?
सरकार और तेल विपणन कंपनियां (OMCs) इथेनॉल वितरण के लिए एक नई व्यवस्था पर भी विचार कर रही हैं।
योजना के तहत पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल ऑटोमेटेड टेलर मशीन (ATM) लगाए जा सकते हैं।
इन मशीनों से उपभोक्ता अपने विशेष कुकिंग स्टोव के लिए कंटेनर में आवश्यक मात्रा में इथेनॉल भरवा सकेंगे। यह व्यवस्था ठीक उसी तरह होगी, जैसे आज वाहन में पेट्रोल या डीजल भरवाया जाता है।
क्या सरकार दे सकती है सब्सिडी?
इंडस्ट्री सूत्रों का कहना है कि सरकार इथेनॉल आधारित कुकिंग सिस्टम को लोकप्रिय बनाने के लिए सब्सिडी भी ला सकती है।
संभावित विकल्पों में शामिल हैं:
- इथेनॉल स्टोव खरीदने पर पूंजीगत सब्सिडी
- नियमित ईंधन खरीद पर वित्तीय सहायता
- वितरण नेटवर्क विकसित करने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहन
हालांकि इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
पड़ोसी देशों को भी हो सकता है फायदा
सरकार अतिरिक्त इथेनॉल उत्पादन का उपयोग नेपाल, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे देशों को निर्यात करने के लिए भी कर सकती है।
इन देशों ने भी पेट्रोल में 10% तक इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है, लेकिन उनके पास पर्याप्त उत्पादन क्षमता उपलब्ध नहीं है।
2050 तक 2 लाख करोड़ रुपये की बचत संभव
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (IISD) की रिपोर्ट के अनुसार यदि भारत बड़े पैमाने पर ई-कुकिंग, बायोगैस और वैकल्पिक स्वच्छ ईंधनों को अपनाता है, तो वर्ष 2050 तक एलपीजी सब्सिडी पर करीब 2 लाख करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।
ऐसे में इथेनॉल आधारित कुकिंग सिस्टम न केवल ऊर्जा सुरक्षा बढ़ा सकता है, बल्कि सरकार के सब्सिडी बोझ को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
क्या अभी LPG की जगह इथेनॉल इस्तेमाल किया जा सकता है?
फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए इथेनॉल आधारित कुकिंग सिस्टम उपलब्ध नहीं है। सरकार अभी नीति तैयार कर रही है और तकनीकी परीक्षण जारी हैं। इसलिए घरेलू उपयोग के लिए अभी एलपीजी ही मानक ईंधन बना रहेगा। नई नीति लागू होने के बाद ही इथेनॉल स्टोव, वितरण व्यवस्था और सब्सिडी से जुड़ी जानकारी आधिकारिक रूप से जारी की जाएगी.


