दिल्ली के एक Uber ड्राइवर की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल, हार्ट अटैक के बाद रिश्तेदार ने फैक्ट्री से निकाला, अब किराए और ड्राइविंग दोनों से कर रहे हैं कमाई
दिल्ली में एक उबर (Uber) ड्राइवर की प्रेरणादायक कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले इस शख्स की जिंदगी में पिछले साल बड़ा झटका तब लगा, जब उन्हें हार्ट अटैक आया। इलाज के बाद जब वे काम पर लौटना चाहते थे तो उनके रिश्तेदार ने उन्हें यह कहकर फैक्ट्री से निकाल दिया कि अब वे पहले की तरह मेहनत वाला काम नहीं कर सकते। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज उनके पास हर महीने लगभग ₹80,000 की पैसिव इनकम है, फिर भी वे रोजाना करीब 12 घंटे Uber चलाकर अतिरिक्त ₹50,000 तक की कमाई कर रहे हैं। उनकी कहानी हजारों लोगों के लिए मेहनत, आत्मसम्मान और हौसले की मिसाल बन गई है।
इंस्टाग्राम पोस्ट से सामने आई कहानी
इस प्रेरणादायक कहानी को कंटेंट क्रिएटर आस्था सेठ ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किया। उन्होंने बताया कि एक सामान्य Uber राइड के दौरान हुई बातचीत उनके लिए जीवन की सबसे यादगार मुलाकातों में बदल गई।
आस्था के अनुसार, ड्राइवर ने अपनी जिंदगी के संघर्षों और फैसलों के बारे में खुलकर बताया। उनकी कहानी सुनकर वे खुद भी भावुक हो गईं और इसे सोशल मीडिया पर साझा करने का फैसला किया।
हार्ट अटैक के बाद बदल गई जिंदगी
ड्राइवर मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले हैं। वे दिल्ली में अपने एक रिश्तेदार की फैक्ट्री में काम करते थे और अच्छी आय अर्जित कर रहे थे। लेकिन पिछले साल अचानक हार्ट अटैक आने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई।
स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद जब उन्होंने दोबारा काम करने की इच्छा जताई तो रिश्तेदार ने यह कहते हुए उन्हें नौकरी से निकाल दिया कि अब वे पहले की तरह शारीरिक मेहनत नहीं कर पाएंगे।
यह फैसला उनके लिए बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने इसे अपनी जिंदगी का अंत नहीं बनने दिया।
‘काम नहीं छोड़ेंगे… हम बिहारी ऐसे ही होते हैं’
आस्था सेठ के अनुसार, बातचीत के दौरान ड्राइवर ने बेहद आत्मविश्वास के साथ कहा—
“काम नहीं छोड़ेंगे… हम बिहारी ऐसे ही होते हैं।”
यही एक वाक्य उनकी सोच और संघर्ष की पूरी कहानी बयान कर देता है। उन्होंने किसी के ताने को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और खुद को फिर से साबित करने का फैसला किया।
₹80,000 महीने का किराया, फिर भी रोज 12 घंटे ड्राइविंग
ड्राइवर के पास नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी के पास स्थित एक रेजिडेंशियल सोसाइटी में दो फ्लैट हैं। इन दोनों फ्लैटों की अनुमानित कीमत करीब ₹80 लाख बताई गई है।
इन संपत्तियों से उन्हें हर महीने लगभग ₹80,000 का किराया मिलता है, यानी उनके पास पहले से ही मजबूत पैसिव इनकम का स्रोत मौजूद है।
इसके बावजूद वे सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक Uber चलाते हैं और इससे हर महीने करीब ₹50,000 की अतिरिक्त कमाई भी कर लेते हैं।
पैसों के लिए नहीं, खुद को साबित करने के लिए कर रहे हैं काम
आस्था सेठ के मुताबिक, ड्राइवर ने साफ कहा कि वे सिर्फ पैसों के लिए काम नहीं कर रहे हैं।
उनका उद्देश्य उन लोगों को जवाब देना है जिन्होंने यह मान लिया था कि हार्ट अटैक आने के बाद अब वे किसी काम के नहीं रहे।
वे यह साबित करना चाहते हैं कि बीमारी इंसान की क्षमता को खत्म नहीं करती, बल्कि उसका हौसला ही उसकी असली ताकत होता है।
बेटियों के भविष्य के लिए बनाई मजबूत नींव
ड्राइवर ने बताया कि उनके परिवार में दो बेटियां हैं। उन्होंने दोनों फ्लैट अपनी बेटियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से खरीदे हैं।
इसके अलावा बिहार में उनकी पुश्तैनी संपत्ति भी मौजूद है। आर्थिक रूप से वे आराम से जीवन बिता सकते हैं, लेकिन उन्होंने सक्रिय रहकर काम करने का रास्ता चुना है।
उनका मानना है कि काम केवल कमाई का जरिया नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मविश्वास बनाए रखने का माध्यम भी है।
सोशल मीडिया पर लोग कर रहे हैं सलाम
यह कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर हजारों लोग इस Uber ड्राइवर के जज्बे की तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि असली अमीरी सिर्फ पैसे में नहीं, बल्कि मेहनत करने की सोच और आत्मसम्मान में होती है।
कुछ लोगों ने इसे इस बात का उदाहरण बताया कि कठिन परिस्थितियां इंसान को तोड़ने के बजाय और मजबूत भी बना सकती हैं।
सीख क्या मिलती है?
इस Uber ड्राइवर की कहानी बताती है कि जिंदगी में मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर इंसान हार मानने के बजाय आगे बढ़ने का फैसला करे तो वह नई शुरुआत कर सकता है।
हार्ट अटैक, नौकरी छूटना और लोगों की नकारात्मक सोच—इन सबके बावजूद उन्होंने खुद को संभाला, नई राह चुनी और आज दूसरों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।


