Delhi TOD Policy: दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति को जमीन पर उतारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब डेवलपर्स के लिए ऑनलाइन सिंगल-विंडो आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस नई व्यवस्था के तहत मेट्रो और रैपिड रेल कॉरिडोर के आसपास लगभग 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में आधुनिक आवास, व्यावसायिक भवन, ऑफिस स्पेस और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा।
Highlights
- DDA ने TOD प्रोजेक्ट्स के लिए ऑनलाइन सिंगल-विंडो सिस्टम शुरू किया।
- दिल्ली के 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकास का रास्ता खुला।
- मेट्रो और रैपिड रेल स्टेशनों के आसपास बनेंगे टावर्स और किफायती आवास।
- डेवलपर्स को अब कई विभागों के चक्कर नहीं लगाने होंगे।
- मौजूदा और भविष्य के मेट्रो कॉरिडोर दोनों पर लागू होगी नीति।
मेट्रो के आसपास बदलेगी दिल्ली की तस्वीर
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अपनी संशोधित ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति के तहत डेवलपर्स से आवेदन आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इस नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट सिस्टम (OBPS) के माध्यम से आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।
इस पहल का उद्देश्य दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन के आसपास योजनाबद्ध शहरी विकास को बढ़ावा देना, किफायती आवास उपलब्ध कराना और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है।
207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में होगा विकास
DDA के अनुसार, TOD नीति लागू होने के बाद दिल्ली का करीब 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र विकास के लिए उपलब्ध होगा। इस क्षेत्र में निम्न प्रकार के प्रोजेक्ट विकसित किए जा सकेंगे—
- किफायती आवास (Affordable Housing)
- हाई-राइज रेजिडेंशियल टावर्स
- मिक्स्ड लैंड यूज प्रोजेक्ट
- ऑफिस स्पेस
- गेस्ट हाउस
- स्टूडियो अपार्टमेंट
- अन्य शहरी सुविधाएं
मेट्रो और रैपिड रेल स्टेशनों के आसपास होगी योजना
TOD नीति के तहत सार्वजनिक परिवहन के आसपास योजनाबद्ध विकास पर विशेष जोर दिया गया है।
- मेट्रो कॉरिडोर के दोनों ओर 500 मीटर तक का क्षेत्र TOD जोन में शामिल होगा।
- रैपिड रेल (RRTS) स्टेशनों के चारों ओर 500 मीटर के दायरे में विकास की अनुमति मिलेगी।
इसका उद्देश्य लोगों को कार्यस्थल और सार्वजनिक परिवहन के नजदीक बेहतर आवास उपलब्ध कराना है, जिससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो और मेट्रो की राइडरशिप भी बढ़े।
अब मिलेगा सिंगल-विंडो क्लीयरेंस
नई व्यवस्था के तहत DDA ने डेवलपर्स के लिए मंजूरी प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया है।
अब किसी भी डेवलपर या भूमि मालिक को केवल एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आवेदन करना होगा। इसके बाद अलग-अलग विभागों से मंजूरी लेने के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इस व्यवस्था के तहत कई एजेंसियों की मंजूरी एकीकृत रूप से मिलेगी, जिनमें शामिल हैं—
- दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA)
- दिल्ली नगर निगम (MCD)
- दिल्ली जल बोर्ड (DJB)
- दिल्ली फायर सर्विस
- अन्य संबंधित विभाग
इससे परियोजनाओं की मंजूरी तेज होगी और Ease of Doing Business को बढ़ावा मिलेगा।
TOD कमेटी करेगी परियोजनाओं का मूल्यांकन
डेवलपर्स को सबसे पहले ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट सिस्टम (OBPS) के जरिए आवेदन करना होगा।
इसके बाद DDA के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में गठित TOD समिति परियोजनाओं की जांच और मंजूरी देगी। समिति से स्वीकृति मिलने के बाद बिल्डिंग प्लान को अंतिम अनुमोदन के लिए दोबारा OBPS के माध्यम से DDA के पास जमा करना होगा।
भविष्य के मेट्रो कॉरिडोर को भी मिलेगा फायदा
DDA ने स्पष्ट किया है कि यह नीति केवल मौजूदा मेट्रो और रेलवे स्टेशनों तक सीमित नहीं रहेगी।
नई TOD नीति के तहत भविष्य में बनने वाले मेट्रो कॉरिडोर और रैपिड रेल मार्गों के आसपास भी इसी प्रकार का विकास किया जा सकेगा। इससे नए ट्रांजिट नेटवर्क के साथ-साथ रियल एस्टेट और शहरी सुविधाओं का विकास भी समानांतर रूप से आगे बढ़ेगा।
दिल्ली के शहरी विकास को मिलेगी नई रफ्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि TOD नीति से दिल्ली में योजनाबद्ध शहरीकरण को बढ़ावा मिलेगा। इससे किफायती आवास की उपलब्धता बढ़ेगी, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग अधिक होगा, ट्रैफिक दबाव कम हो सकता है और राजधानी में आधुनिक, टिकाऊ एवं सुव्यवस्थित शहरी विकास का नया मॉडल तैयार होगा।


