भारत की रक्षा तैयारियों को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय सेना ने 850 ‘वन-वे अटैक ड्रोन’ (Loitering Munitions) की खरीद प्रक्रिया को तेज कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) सबसे कम बोली लगाने वाली (L1) कंपनी बनकर उभरी है। करीब ₹1,500 करोड़ की इस डील के तहत सेना को ऐसे आधुनिक ड्रोन मिलेंगे, जो दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने के बाद स्वयं भी नष्ट हो जाएंगे।
Highlights
- भारतीय सेना खरीदेगी 850 आधुनिक ‘वन-वे अटैक ड्रोन’
- टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड बनी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी
- करीब ₹1,500 करोड़ की डील ‘फास्ट-ट्रैक प्रोसेस’ के तहत होगी
- TASL करेगी 64% और निबे डिफेंस 26% ड्रोन की सप्लाई
- ड्रोन को जैमिंग और स्पूफिंग से बचाने के लिए विशेष तकनीक से लैस किया जाएगा
टाटा को मिला सबसे बड़ा हिस्सा
नई दिल्ली। भारतीय सेना ने अपनी ड्रोन क्षमता बढ़ाने के लिए 850 ‘वन-वे अटैक ड्रोन’ खरीदने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। तकनीकी मूल्यांकन और कमर्शियल बिड खुलने के बाद टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी साबित हुई। इसके बाद निबे डिफेंस दूसरे स्थान पर रही।
डील की शर्तों के मुताबिक कुल ऑर्डर का 64% हिस्सा टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को मिलेगा, जबकि 26% ड्रोन की सप्लाई निबे डिफेंस करेगी। यह खरीद रक्षा मंत्रालय की फास्ट-ट्रैक प्रोसेस के तहत की जा रही है, जिससे अनुबंध पर हस्ताक्षर होने के छह महीने के भीतर डिलीवरी शुरू की जा सकेगी।
आधुनिक युद्ध में गेम चेंजर हैं ये ड्रोन
वन-वे अटैक ड्रोन, जिन्हें लोइटरिंग म्यूनिशन भी कहा जाता है, आधुनिक युद्ध का बेहद अहम हथियार बन चुके हैं। ये ड्रोन लक्ष्य के ऊपर मंडराते हैं और सही समय मिलने पर सीधे हमला कर खुद भी नष्ट हो जाते हैं।
ईरान के ‘शाहेद’ ड्रोन और रूस-यूक्रेन युद्ध में इनके व्यापक उपयोग ने दुनिया को इस तकनीक की ताकत दिखाई है। पश्चिम एशिया के संघर्षों में भी ऐसे ड्रोन ने कम लागत में बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने की क्षमता साबित की है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अनुभव से तैयार हुए सिस्टम
सेना द्वारा खरीदे जा रहे इन नए ड्रोन को हालिया सैन्य अभियानों और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से मिले अनुभवों के आधार पर विकसित किया गया है। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इन्हें जैमिंग और स्पूफिंग जैसी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीकों से सुरक्षित बनाया गया है।
इन ड्रोन का कठिन परिस्थितियों में व्यापक परीक्षण किया गया, जिसमें ऐसे वातावरण भी शामिल थे जहां टेक-ऑफ के समय से ही इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग मौजूद थी। परीक्षणों में इन सिस्टम्स ने बेहतर प्रदर्शन किया, जिसके बाद इन्हें सेना के लिए उपयुक्त माना गया।
सीमा पार दुश्मन के ठिकानों पर करेंगे सटीक हमला
इन ड्रोन का प्रमुख उद्देश्य सीमा पार मौजूद दुश्मन की आर्टिलरी पोजिशन, कमांड सेंटर और अन्य सामरिक ठिकानों को निशाना बनाना होगा। कम लागत और उच्च सटीकता के कारण ये भविष्य के युद्धों में भारतीय सेना की मारक क्षमता को काफी बढ़ाएंगे।
आने वाले समय में मिल सकते हैं हजारों और ऑर्डर
हालांकि फिलहाल 850 ड्रोन की खरीद की जा रही है, लेकिन सेना की जरूरत इससे कहीं अधिक है। रक्षा सूत्रों के अनुसार आने वाले महीनों में ऐसे हजारों अतिरिक्त ड्रोन खरीदने की योजना पर काम चल रहा है।
इसके अलावा लंबी दूरी तक मार करने वाले ऐसे ड्रोन भी विकसित किए जा रहे हैं, जो 1,500 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित लक्ष्यों को भी निशाना बनाने में सक्षम होंगे।
समय पर डिलीवरी पर रहेगा पूरा फोकस
फास्ट-ट्रैक खरीद प्रक्रिया के तहत समयसीमा का पालन बेहद महत्वपूर्ण होगा। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि तय समय पर ड्रोन की सप्लाई नहीं होने पर संबंधित कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। ऐसे में अब सबसे बड़ी चुनौती इन अत्याधुनिक ड्रोन की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करना होगी।


