नई दिल्ली: दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका का दबदबा अब सिर्फ जीडीपी या टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक शेयर बाजार में भी उसकी पकड़ लगातार मजबूत होती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि दुनिया के 18 बड़े शेयर बाजारों का संयुक्त मार्केट कैपिटलाइजेशन भी अमेरिका के स्टॉक मार्केट के सामने छोटा पड़ जाता है। अमेरिकी बाजार की तेजी ने बाकी देशों के लिए चुनौती और भी कठिन बना दी है।
वैश्विक बाजार का लगभग आधा हिस्सा अमेरिका के पास
ताजा आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी शेयर बाजार का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 81 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। यह पूरी दुनिया के लगभग 167 ट्रिलियन डॉलर के कुल मार्केट कैप का करीब 48 फीसदी है। यानी वैश्विक शेयर बाजार की लगभग आधी वैल्यू अकेले अमेरिका के पास है।
इसके मुकाबले चीन का स्टॉक मार्केट करीब 17 ट्रिलियन डॉलर का है। इस तरह अमेरिकी बाजार का आकार चीन से करीब 375 फीसदी बड़ा है। इससे साफ है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद चीन अभी बाजार मूल्य के मामले में अमेरिका से काफी पीछे है।
चीन, जापान और ताइवान को मिलाकर भी पीछे
अमेरिका की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसका मार्केट कैप चीन, जापान, हॉन्ग कॉन्ग और ताइवान के संयुक्त बाजार मूल्य का भी लगभग दोगुना है। इतना ही नहीं, अमेरिका के बाद आने वाले दुनिया के 18 सबसे बड़े शेयर बाजारों की कुल वैल्यू भी अमेरिकी बाजार से कम है।
सिर्फ सात कंपनियां ही चीन पर भारी
अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनियों ने उसके बाजार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। अमेरिकी शेयर बाजार की सात सबसे बड़ी कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप ही चीन के पूरे शेयर बाजार से अधिक है। यही वजह है कि दुनिया की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में 8 अमेरिकी कंपनियां शामिल हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिजिटल सर्विसेज और टेक्नोलॉजी इनोवेशन में अमेरिकी कंपनियों की बढ़त ने निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत किया है।
दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजार कौन-कौन से हैं?
मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर दुनिया के प्रमुख शेयर बाजारों की सूची इस प्रकार है—
- अमेरिका
- चीन
- जापान
- हॉन्ग कॉन्ग
- ताइवान
- भारत
- दक्षिण कोरिया
- कनाडा
- यूनाइटेड किंगडम
- फ्रांस
- जर्मनी
- स्विट्जरलैंड
- सऊदी अरब
- ऑस्ट्रेलिया
- नीदरलैंड
- स्पेन
- स्वीडन
- इटली
- संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)
- ब्राजील
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अपनी पूंजी बाजार व्यवस्था में सुधार और विदेशी निवेश बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अमेरिका की बढ़त को चुनौती देना आसान नहीं होगा। अमेरिकी बाजार की मजबूती के पीछे मजबूत कॉर्पोरेट मुनाफा, वैश्विक निवेशकों का भरोसा, टेक्नोलॉजी कंपनियों का वर्चस्व और नवाचार प्रमुख वजहें हैं। फिलहाल दुनिया के शेयर बाजारों में अमेरिका की बादशाहत कायम है और निकट भविष्य में इसे चुनौती देना किसी भी देश के लिए आसान नहीं दिखता।


