अमेरिका में उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले में बड़ा मोड़ आ सकता है। अमेरिकी कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) किसी मामले को वापस लेने की मांग करता है और उसके पीछे पर्याप्त कानूनी आधार प्रस्तुत करता है, तो फेडरल कोर्ट आमतौर पर उस फैसले में हस्तक्षेप नहीं करती। ऐसे में गौतम अडानी से जुड़ा यह मामला बंद होने की संभावना पहले से अधिक मजबूत मानी जा रही है।
DOJ की याचिका पर कोर्ट क्या करेगा?
अमेरिकी कानून के तहत किसी भी आपराधिक मुकदमे को वापस लेने के लिए DOJ को अदालत की मंजूरी लेना आवश्यक होता है। हालांकि अदालत अतिरिक्त जानकारी मांग सकती है या सुनवाई कर सकती है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में ऐसा कोई प्रमुख उदाहरण सामने नहीं आया है, जहां कोर्ट ने DOJ की इच्छा के विरुद्ध किसी केस को जारी रखने का आदेश दिया हो।
अमेरिकी कानूनी विशेषज्ञों ने क्या कहा?
अमेरिकी लॉ फर्म Pillsbury के कॉर्पोरेट इन्वेस्टिगेशन पार्टनर एडम गोल्डबर्ग ने कहा कि यदि अदालत DOJ की दलीलों को स्वीकार करते हुए मामला खारिज करती है, तो यह पूरी तरह सामान्य कानूनी प्रक्रिया होगी।
उनके अनुसार DOJ ने केस वापस लेने के लिए विस्तृत और मजबूत कानूनी कारण प्रस्तुत किए हैं। अदालत किसी सरकारी एजेंसी को ऐसा मुकदमा चलाने के लिए मजबूर नहीं कर सकती, जिसे वह स्वयं आगे नहीं बढ़ाना चाहती।
एक अन्य अमेरिकी कानूनी विशेषज्ञ सेठ लेविन का भी कहना है कि अदालत कुछ स्पष्टीकरण मांग सकती है, लेकिन किसी मुकदमे को जारी रखना या वापस लेना अंततः सरकारी अभियोजकों के विवेक पर निर्भर करता है।
DOJ ने केस वापस लेने के लिए दिए ये 6 बड़े तर्क
अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गराउफिस के सवालों के जवाब में DOJ ने 10 पन्नों का हलफनामा दाखिल किया, जिसमें केस वापस लेने के लिए छह प्रमुख आधार बताए गए हैं।
- कथित घटनाएं और मामला मुख्य रूप से भारत से जुड़ा है।
- भारत की जांच एजेंसियों और अदालतों को जांच में किसी अवैध गतिविधि की पुष्टि नहीं मिली।
- अमेरिकी निवेशकों को किसी प्रकार का प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान नहीं हुआ।
- अधिकांश गवाह और सबूत भारत में मौजूद हैं, जिससे अमेरिका में आरोप साबित करना कठिन होगा।
- आरोपियों के अमेरिकी अदालत में पेश होने की संभावना बेहद कम है।
- मौजूदा ट्रंप प्रशासन की कानूनी प्राथमिकताओं के अनुसार इस मामले को आगे बढ़ाना उचित नहीं माना गया।
क्या है पूरा मामला?
साल 2024 में तत्कालीन जो बाइडन प्रशासन के दौरान अमेरिकी न्याय विभाग ने गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और सात अन्य लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
आरोप था कि भारत में सोलर परियोजनाओं के ठेके हासिल करने के लिए लगभग 25 करोड़ डॉलर की कथित रिश्वत योजना बनाई गई। DOJ का यह भी आरोप था कि इस कथित योजना की जानकारी छिपाकर अमेरिकी निवेशकों से अरबों डॉलर का निवेश जुटाया गया, जिसमें Adani Green Energy के लिए लगभग 17.5 करोड़ डॉलर की फंडिंग भी शामिल थी।
आगे क्या हो सकता है?
अब अंतिम फैसला अमेरिकी फेडरल कोर्ट को लेना है। यदि अदालत DOJ की दलीलों से संतुष्ट होती है, तो मामला औपचारिक रूप से खारिज किया जा सकता है। हालांकि अदालत चाहे तो पहले अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांग सकती है या संक्षिप्त सुनवाई भी कर सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों की राय के आधार पर फिलहाल यह माना जा रहा है कि गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिका में चल रहा यह आपराधिक मामला बंद होने की संभावना पहले की तुलना में काफी मजबूत हो गई है।
नोट: फिलहाल अदालत ने मामले को बंद करने का अंतिम आदेश जारी नहीं किया है। यह केवल अमेरिकी न्याय विभाग की याचिका और कानूनी विशेषज्ञों के आकलन पर आधारित स्थिति है।


