नई दिल्ली: सोने की कीमतों में जून 2026 के दौरान ऐसी गिरावट देखने को मिली है, जिसने पिछले 17 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड अक्टूबर 2008 के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट की ओर बढ़ गया है। वहीं भारतीय बाजार में भी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर एक महीने के भीतर सोना करीब 19,743 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी, मजबूत अमेरिकी डॉलर और लगातार बनी महंगाई है। इन तीनों कारकों ने निवेशकों की रणनीति बदल दी है और सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने पर दबाव बढ़ा दिया है।
Highlights
- जून में गोल्ड की कीमतों में 17 साल की सबसे बड़ी मासिक गिरावट।
- MCX पर एक महीने में करीब ₹19,743 प्रति 10 ग्राम की कमजोरी।
- फेड की ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद से निवेशकों का रुख बदला।
- मजबूत डॉलर और ऊंची महंगाई ने सोने पर बढ़ाया दबाव।
- एक्सपर्ट्स के मुताबिक फिलहाल गोल्ड में तेजी के संकेत सीमित।
एक महीने में करीब ₹20,000 सस्ता हुआ सोना
जून की शुरुआत में MCX पर सोना 1,60,193 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर खुला था। महीने के आखिरी कारोबारी दिन यह गिरकर 1,40,450 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। यानी केवल एक महीने में गोल्ड की कीमत में 19,743 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी स्पॉट गोल्ड करीब 12% तक टूट चुका है। मंगलवार को स्पॉट गोल्ड 0.8% गिरकर 3,985.57 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि अगस्त डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 1% फिसलकर 3,999.20 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करते दिखे।
आखिर क्यों आई गोल्ड में इतनी बड़ी गिरावट?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार सोने की कमजोरी किसी एक कारण से नहीं बल्कि कई वैश्विक आर्थिक कारकों के संयुक्त प्रभाव से आई है। खासतौर पर अमेरिका की मौद्रिक नीति ने निवेशकों की धारणा को पूरी तरह बदल दिया है।
1. फेडरल रिजर्व की ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद
सबसे बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व का संभावित सख्त रुख माना जा रहा है। बाजार में उम्मीद है कि इस वर्ष फेड कई बार ब्याज दरें बढ़ा सकता है। ब्याज दरें बढ़ने पर बॉन्ड और अन्य फिक्स्ड इनकम निवेश अधिक आकर्षक हो जाते हैं, जिससे सोने की मांग घट जाती है।
CME FedWatch Tool के अनुसार सितंबर बैठक में दरें बढ़ने की संभावना लगभग 64% मानी जा रही है।
2. अमेरिकी रोजगार आंकड़ों पर बाजार की नजर
इस सप्ताह जारी होने वाले ADP Employment Data और Non-Farm Payroll (NFP) आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करेंगे। यदि रोजगार के आंकड़े मजबूत आते हैं तो फेड के और अधिक सख्त रुख की संभावना बढ़ सकती है, जिसका दबाव सोने पर बना रह सकता है।
3. डॉलर की लगातार मजबूती
अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत बना हुआ है और हाल के महीनों के उच्च स्तरों के आसपास कारोबार कर रहा है। मजबूत डॉलर की वजह से अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक मांग कमजोर पड़ती है।
एक्सपर्ट ने क्या कहा?
मार्केट एक्सपर्ट एडवर्ड मीर का कहना है कि इस समय तीन बड़े कारक—ऊंची महंगाई, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद और मजबूत डॉलर—सोने की तेजी पर भारी पड़ रहे हैं।
उनके अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में भू-राजनीतिक तनाव के दौरान निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोना खरीदते हैं, लेकिन इस बार बाजार का पूरा फोकस अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों पर है।
कब लौट सकती है गोल्ड में तेजी?
OCBC के प्रीशियस मेटल्स स्ट्रैटेजिस्ट क्रिस्टोफर वोंग का मानना है कि सोने में मजबूत तेजी लौटने के लिए निम्न में से कम से कम एक स्थिति बननी जरूरी है—
- वास्तविक बॉन्ड यील्ड में गिरावट
- अमेरिकी डॉलर कमजोर होना
- फेडरल रिजर्व का सख्त रुख नरम पड़ना
जब तक इनमें से कोई बड़ा बदलाव नहीं होता, तब तक सोने की कीमतें सीमित दायरे में कारोबार कर सकती हैं।
दूसरी कीमती धातुओं का भी खराब प्रदर्शन
केवल सोना ही नहीं बल्कि अन्य कीमती धातुओं में भी कमजोरी देखने को मिली।
- चांदी करीब 1.3% गिरकर 57.53 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
- प्लैटिनम 0.7% टूटकर 1,563.25 डॉलर पर आ गया।
- पैलेडियम में मामूली 0.4% की बढ़त दर्ज हुई और यह 1,218.07 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।
हालांकि मासिक और तिमाही आधार पर तीनों धातुएं भी नुकसान की ओर बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जिन निवेशकों का नजरिया लंबी अवधि का है, वे घबराकर निवेश से बाहर निकलने के बजाय धीरे-धीरे चरणबद्ध निवेश (SIP या स्टैगर खरीद) की रणनीति अपना सकते हैं। वहीं अल्पकालिक निवेशकों को अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों, डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर नजर बनाए रखनी चाहिए क्योंकि आने वाले हफ्तों में यही गोल्ड की दिशा तय करेंगे।


