Highlights
- यूरोप में रिकॉर्ड गर्मी से एयर कंडीशनर की मांग तेजी से बढ़ रही है।
- भारतीय कंपनियां 2027 से यूरोप में बड़े पैमाने पर एसी एक्सपोर्ट की तैयारी कर रही हैं।
- यूरोप का रूम एसी बाजार करीब 10 अरब डॉलर का है।
- चीन और दक्षिण कोरिया की कंपनियां फिलहाल सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धी हैं।
- यूरोपीय सर्टिफिकेशन और हीट पंप टेक्नोलॉजी सबसे बड़ी चुनौती है।
यूरोप की गर्मी भारत के लिए क्यों बन सकती है बड़ा अवसर?
नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का असर अब दुनिया के हर हिस्से में दिखाई देने लगा है। इस साल यूरोप के कई देशों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है। तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है, जिसके चलते एयर कंडीशनर (AC) और अन्य कूलिंग उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
यही स्थिति भारतीय एयर कंडीशनर कंपनियों के लिए एक बड़ा कारोबारी अवसर लेकर आई है। लंबे समय से घरेलू बाजार पर फोकस करने वाली भारतीय कंपनियां अब यूरोप के करीब 10 अरब डॉलर (लगभग ₹85,000 करोड़) के एयर कंडीशनर बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाने की तैयारी कर रही हैं।
हालांकि यह रास्ता आसान नहीं होगा। यूरोप के बाजार पर फिलहाल चीन, दक्षिण कोरिया और जापान की बड़ी कंपनियों का दबदबा है। भारतीय कंपनियों को गुणवत्ता, लागत और तकनीक—तीनों मोर्चों पर खुद को साबित करना होगा।
यूरोप में क्यों बढ़ रही है AC की मांग?
पिछले कुछ वर्षों में यूरोप में गर्मी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले जिन देशों में एयर कंडीशनर की जरूरत सीमित मानी जाती थी, वहां अब लगातार हीटवेव देखने को मिल रही है।
इसके कारण:
- रिकॉर्ड तापमान
- लगातार बढ़ती हीटवेव
- ग्लोबल वार्मिंग
- घरों और ऑफिसों में कूलिंग सिस्टम की बढ़ती जरूरत
इसी वजह से एयर कंडीशनर कंपनियों को नए ऑर्डर और पूछताछ पहले की तुलना में दो से तीन गुना तक बढ़ती दिखाई दे रही है।
2027 से शुरू हो सकता है भारतीय कंपनियों का बड़ा एक्सपोर्ट
भारतीय कंपनियां तुरंत यूरोप में बिक्री शुरू नहीं कर पाएंगी।
इसकी सबसे बड़ी वजह है यूरोप के बेहद सख्त:
- एनर्जी एफिशिएंसी स्टैंडर्ड
- सुरक्षा मानक
- पर्यावरण संबंधी नियम
- सर्टिफिकेशन प्रक्रिया
इन सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने में समय लगता है। इसी कारण कंपनियां 2027 तक यूरोप में अपने उत्पाद लॉन्च करने की योजना बना रही हैं।
गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के अप्लायंसेज बिजनेस प्रमुख कमल नंदी के अनुसार, पिछले साल से यूरोप के बाजार पर नजर थी, लेकिन इस वर्ष की भीषण गर्मी ने इस अवसर को और स्पष्ट कर दिया है।
सरकार भी चाहती है बढ़े AC एक्सपोर्ट
केंद्र सरकार एयर कंडीशनर उद्योग को हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के रूप में विकसित करना चाहती है।
सरकार का मानना है कि जैसे स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग में भारत ने वैश्विक पहचान बनाई है, उसी तरह एयर कंडीशनर सेक्टर भी बड़ा एक्सपोर्ट इंजन बन सकता है।
इसी सोच के तहत:
- उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना
- घरेलू निर्माण को बढ़ावा
- निर्यात बढ़ाने पर जोर
जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अश्विनी वैष्णव भी कंपनियों से एयर कंडीशनर के निर्यात को बढ़ाने की अपील कर चुके हैं।
किन भारतीय कंपनियों ने शुरू की तैयारी?
कई भारतीय कंपनियां पहले ही यूरोप में अवसर तलाश रही हैं।
इनमें प्रमुख हैं:
- गोदरेज एंटरप्राइजेज
- हैवल्स
- एम्बर एंटरप्राइजेज
- ब्लू स्टार
एम्बर एंटरप्राइजेज पहले से एलजी, डाइकिन, सैमसंग और ब्लू स्टार जैसी कंपनियों के लिए कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग करती है।
इसके अलावा एलजी, डाइकिन, हायर सहित कई वैश्विक कंपनियां भारत में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा रही हैं ताकि यहां से यूरोप समेत अन्य देशों में निर्यात किया जा सके।
सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?
भारतीय कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कीमत और तकनीक दोनों हैं।
1. चीन की कम उत्पादन लागत
उद्योग के अनुमान के अनुसार:
- चीनी कंपनियों की उत्पादन लागत भारतीय कंपनियों की तुलना में 15-18% तक कम है।
इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ता है।
2. हीट पंप AC की मांग
यूरोप के रेजिडेंशियल एयर कंडीशनर बाजार में करीब 80% हिस्सेदारी हीट पंप एसी की है।
ये मशीनें:
- गर्मियों में कूलिंग देती हैं।
- सर्दियों में हीटिंग भी करती हैं।
भारत में इनकी मांग अभी सीमित है, इसलिए भारतीय कंपनियों को इस तकनीक पर अधिक निवेश करना होगा।
3. डिजाइन बदलना होगा
यूरोप की अधिकांश पुरानी इमारतें पारंपरिक स्प्लिट एसी के लिए डिजाइन नहीं की गई हैं।
कई जगहों पर:
- आउटडोर यूनिट लगाने की अनुमति नहीं होती।
- इंस्टॉलेशन काफी महंगा होता है।
- भवन संरक्षण से जुड़े नियम लागू होते हैं।
इसलिए भारतीय कंपनियों को यूरोप के हिसाब से अलग डिजाइन विकसित करने होंगे।
चीन, दक्षिण कोरिया और जापान से होगा मुकाबला
यूरोप के एयर कंडीशनर बाजार में पहले से कई बड़ी कंपनियां मजबूत स्थिति में हैं।
इनमें शामिल हैं:
- LG
- Daikin
- Haier
- Midea
- Gree
इन कंपनियों के पास वर्षों का अनुभव, मजबूत ब्रांड पहचान और व्यापक सर्विस नेटवर्क मौजूद है।
ब्लू स्टार के प्रबंध निदेशक बी. त्यागराजन का मानना है कि यूरोप में चीनी कंपनियों से मुकाबला आसान नहीं होगा। साथ ही यह भी देखना होगा कि वर्तमान गर्मी की मांग केवल मौसमी है या आने वाले वर्षों में स्थायी रूप से बनी रहती है।
यूरोप के AC बाजार की प्रमुख बातें
| पैरामीटर | विवरण |
|---|---|
| बाजार का आकार | करीब 10 अरब डॉलर प्रति वर्ष |
| सबसे लोकप्रिय उत्पाद | हीट पंप एयर कंडीशनर |
| हीट पंप की हिस्सेदारी | लगभग 80% |
| चीन की लागत बढ़त | 15-18% तक |
| भारतीय कंपनियों की योजना | 2027 से बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट |
भारत के लिए कितना बड़ा अवसर?
यदि भारतीय कंपनियां यूरोपीय मानकों के अनुरूप उत्पाद विकसित करने, उत्पादन लागत कम करने और मजबूत वितरण नेटवर्क बनाने में सफल रहती हैं, तो आने वाले वर्षों में यूरोप भारत के लिए एक बड़ा निर्यात बाजार बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पहले ही इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन निर्माण में वैश्विक स्तर पर अपनी क्षमता साबित कर चुका है। अब एयर कंडीशनर उद्योग के पास भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत पहचान बनाने का अवसर है। हालांकि, इसके लिए गुणवत्ता, नवाचार और प्रतिस्पर्धी कीमत—तीनों पर बराबर ध्यान देना होगा।


