टाटा स्टील ने जमशेदपुर एफसी का संचालन करने वाली कंपनी JFSPL में अपनी 100% हिस्सेदारी चर्चिल ब्रदर्स को सिर्फ 100 रुपये में ट्रांसफर करने की मंजूरी दी है। सौदे में क्लब का ISL लाइसेंस, खिलाड़ी और कोचिंग स्टाफ के कॉन्ट्रैक्ट भी शामिल हैं।
नई दिल्ली: टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा स्टील ने भारतीय फुटबॉल को लेकर बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने जमशेदपुर फुटबॉल एंड स्पोर्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (JFSPL) में अपनी पूरी 100% हिस्सेदारी चर्चिल ब्रदर्स स्पोर्ट्स क्लब प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर करने की मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि इस सौदे की कीमत सिर्फ 100 रुपये तय की गई है।
JFSPL ही जमशेदपुर एफसी (Jamshedpur FC) का संचालन करती है। टाटा स्टील के पास कंपनी के करीब 4.08 करोड़ शेयर थे, जिन्हें अब चर्चिल ब्रदर्स को ट्रांसफर किया जाएगा। हालांकि, यह सौदा अभी अंतिम रूप से पूरा नहीं हुआ है। इसके लिए ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) की मंजूरी और अन्य जरूरी शर्तों को पूरा करना होगा।
जमशेदपुर एफसी का लाइसेंस भी होगा ट्रांसफर
इस सौदे के तहत चर्चिल ब्रदर्स को सिर्फ कंपनी की हिस्सेदारी ही नहीं मिलेगी, बल्कि जमशेदपुर एफसी का इंडियन सुपर लीग (ISL) स्पोर्टिंग लाइसेंस भी ट्रांसफर किया जाएगा।
इसके अलावा क्लब के मौजूदा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के अनुबंध भी नए मालिक को सौंपे जाएंगे। चर्चिल ब्रदर्स सितंबर 2026 से क्लब के संचालन की जिम्मेदारी संभालेगा।
फिलहाल जमशेदपुर एफसी के साथ 12 खिलाड़ियों और 2 कोचों के कॉन्ट्रैक्ट जुड़े हुए हैं।
चर्चिल ब्रदर्स की भारतीय फुटबॉल में पुरानी पहचान
गोवा की चर्चिल ब्रदर्स भारतीय फुटबॉल की जानी-मानी टीमों में शामिल है। क्लब का इतिहास करीब चार दशक पुराना है और वह आई-लीग का खिताब दो बार जीत चुका है।
अब चर्चिल ब्रदर्स के सामने जमशेदपुर एफसी को ISL में बनाए रखने और क्लब की वित्तीय स्थिति मजबूत करने की चुनौती होगी।
ISL से दूरी बना रहा है टाटा स्टील
टाटा स्टील का यह फैसला ऐसे समय आया है जब कंपनी ने कुछ दिन पहले ही घोषणा की थी कि जमशेदपुर एफसी 2026-27 सीजन में ISL में हिस्सा नहीं लेगा।
इसके बाद भारतीय फुटबॉल लीग के बिजनेस मॉडल को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में ISL के मीडिया राइट्स की वैल्यू में काफी गिरावट आई है।
जहां पहले जियोस्टार करीब 275 करोड़ रुपये सालाना का भुगतान करता था, वहीं 2025-26 सीजन के लिए फैनकोड की ओर से करीब 8.6 करोड़ रुपये की पेशकश की खबरें सामने आई थीं।
बड़े कॉर्पोरेट घरानों का फुटबॉल से मोहभंग
भारतीय फुटबॉल में पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े कॉर्पोरेट निवेशक पीछे हटे हैं।
सिटी फुटबॉल ग्रुप, जो दुनिया के बड़े फुटबॉल समूहों में शामिल है, ने भी मुंबई सिटी एफसी से बाहर निकलने का फैसला किया था।
इसके अलावा फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (FSDL) और AIFF के बीच 15 साल का कमर्शियल समझौता भी लंबे विवाद के बाद खत्म हो गया।
5000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 15 वर्षों में भारतीय फुटबॉल इकोसिस्टम में हजारों करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। लेकिन इस दौरान निवेशकों को भारी वित्तीय नुकसान का सामना भी करना पड़ा।
अनुमानों के अनुसार, भारतीय फुटबॉल में अब तक 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।
क्यों नहीं चल पा रहा ISL का बिजनेस मॉडल?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय फुटबॉल के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं:
- क्रिकेट के मुकाबले फुटबॉल की कम लोकप्रियता
- स्टेडियम में दर्शकों की सीमित संख्या
- टीवी और डिजिटल राइट्स से कम कमाई
- क्लबों की लगातार बढ़ती लागत
- खिलाड़ियों और विदेशी कोचों पर भारी खर्च
कॉर्पोरेट कंपनियां लंबे समय तक निवेश करने के लिए तैयार होती हैं, लेकिन जब उन्हें रिटर्न नजर नहीं आता तो वे अपनी रणनीति बदलने लगती हैं।
टाटा स्टील का जमशेदपुर एफसी से बाहर निकलना इसी बदलते कारोबारी माहौल का संकेत माना जा रहा है। अब देखना होगा कि चर्चिल ब्रदर्स इस ऐतिहासिक क्लब को किस दिशा में लेकर जाता है।


