नई दिल्ली। आम आदमी की रसोई पर एक और महंगाई की मार पड़ सकती है। दूध की कीमतों में आने वाले महीनों में फिर बढ़ोतरी होने के संकेत मिल रहे हैं। डेयरी उद्योग से जुड़े अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अल-नीनो (El Nino) और कमजोर मानसून के कारण चारे की कमी बढ़ती है तो जुलाई या अगस्त तक दूध के दाम 3 से 4 फीसदी तक और बढ़ सकते हैं।
मई 2026 में ही देश की प्रमुख डेयरी कंपनियों ने दूध के दाम 2 से 3 फीसदी तक बढ़ाए थे। अब उद्योग जगत को आशंका है कि मौसम की स्थिति बिगड़ने पर उपभोक्ताओं को एक और मूल्य वृद्धि का सामना करना पड़ सकता है।
कम बारिश से क्यों बढ़ता है दूध का संकट?
डेयरी उद्योग के जानकारों के मुताबिक कम बारिश का सबसे बड़ा असर पशुओं के चारे और पानी की उपलब्धता पर पड़ता है। जब किसानों को पर्याप्त चारा नहीं मिलता तो पशुओं की उत्पादकता घट जाती है। कई बार किसानों को मवेशियों की संख्या भी कम करनी पड़ती है।
इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है और बाजार में सप्लाई घटने लगती है। जब मांग के मुकाबले सप्लाई कम होती है तो दूध की कीमतें बढ़ना लगभग तय माना जाता है।
पराग मिल्क फूड्स के चेयरमैन देवेंद्र शाह ने कहा कि दूध की कीमतें पहले ही 2-3 फीसदी बढ़ चुकी हैं। अगर प्रमुख दूध उत्पादक क्षेत्रों में मानसून सामान्य से कमजोर रहता है तो जुलाई तक कीमतों में 3-4 फीसदी की अतिरिक्त बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
अल-नीनो बढ़ा रहा है चिंता
अल-नीनो को लेकर सबसे ज्यादा चिंता चारे की उपलब्धता को लेकर है। महाराष्ट्र सरकार ने भी संभावित चारा संकट को देखते हुए किसानों से चारे का उत्पादन बढ़ाने की अपील की है।
महाराष्ट्र के पशुपालन आयुक्त किरण पाटिल ने कहा कि अल-नीनो के प्रभाव के कारण आने वाले समय में चारे की कमी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने पशुपालकों को अभी से चारे की फसल की योजना बनाने और पशुधन के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने की सलाह दी है।
कई निजी और सहकारी डेयरी कंपनियां भी अपने खरीद नेटवर्क के माध्यम से पशुपालकों के साथ मिलकर चारा प्रबंधन की रणनीति तैयार कर रही हैं ताकि दूध उत्पादन पर असर को कम किया जा सके।
अमूल और मदर डेयरी रख रही हैं नजर
देश की सबसे बड़ी डेयरी ब्रांडों में शामिल अमूल और मदर डेयरी फिलहाल स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) के प्रबंध निदेशक जयेन मेहता का कहना है कि अभी तक अल-नीनो का दूध की उपलब्धता पर कोई तत्काल असर दिखाई नहीं दे रहा है। उनके मुताबिक कम बारिश का प्रभाव अक्सर कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रहता है और पूरे देश में एक समान असर नहीं पड़ता।
वहीं मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक जयतीर्थ चारी ने कहा कि कंपनी अपने खरीद नेटवर्क में हालात की लगातार समीक्षा कर रही है और जरूरत पड़ने पर राहत उपाय लागू करने की तैयारी कर रही है।
मई में ही बढ़ चुके हैं दूध के दाम
दूध की कीमतों में संभावित नई बढ़ोतरी की चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब मई 2026 में अमूल और मदर डेयरी दोनों ने दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाए थे।
कंपनियों ने उस समय बढ़ती खरीद लागत, पशु चारे के महंगे होने, पैकेजिंग खर्च और ईंधन की बढ़ी कीमतों को इसके पीछे मुख्य कारण बताया था।
अमूल के अनुसार मई में की गई बढ़ोतरी प्रति लीटर लगभग 2.5 से 3.5 फीसदी के बराबर थी। वहीं मदर डेयरी ने कहा था कि पिछले एक वर्ष में किसानों को दिए जाने वाले दूध खरीद मूल्य में करीब 6 फीसदी की वृद्धि हुई है।
हीटवेव का भी पड़ा असर
देश के कई हिस्सों में इस साल रिकॉर्ड गर्मी देखने को मिली। इसका असर पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन पर भी पड़ा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार तमिलनाडु के सरकारी डेयरी ब्रांड ‘आविन’ ने हीटवेव के कारण उत्पादन प्रभावित होने के चलते दूध की सप्लाई में कटौती की है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि मौसम संबंधी चुनौतियां डेयरी उद्योग के लिए बड़ी चिंता बन चुकी हैं।
उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?
यदि मानसून सामान्य रहता है और चारे की उपलब्धता बनी रहती है तो दूध की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी टल सकती है। लेकिन यदि अल-नीनो का प्रभाव बढ़ता है और बारिश कम होती है तो आने वाले महीनों में दूध के दाम फिर बढ़ सकते हैं।
ऐसी स्थिति में दूध के साथ-साथ दही, पनीर, घी, मक्खन और अन्य डेयरी उत्पादों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। इससे आम परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की आशंका है।
स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI), इकोनॉमिक टाइम्स (ET), डेयरी उद्योग अधिकारियों के बयान।


