भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर पिछले कुछ दिनों से अटकलों का बाजार गर्म है। अगले सप्ताह फ्रांस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित मुलाकात को इस दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि दोनों नेताओं की बैठक के दौरान भारत-अमेरिका ट्रेड डील का ऐलान किया जा सकता है।
हालांकि, अब अमेरिकी प्रशासन की ओर से आए ताजा बयान ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है। वॉशिंगटन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि G7 सम्मेलन में व्यापार पर चर्चा जरूर होगी, लेकिन किसी अंतिम व्यापार समझौते की घोषणा होने की संभावना नहीं है। इससे साफ संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन अभी कई मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।
G7 सम्मेलन में होगी अहम चर्चा
फ्रांस में आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता हिस्सा लेने जा रहे हैं। इस सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात पर वैश्विक निवेशकों और कारोबारी जगत की नजरें टिकी हुई हैं।
भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को भी इसी व्यापक साझेदारी का हिस्सा माना जा रहा है।
अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, सप्लाई चेन, तकनीक और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। हालांकि, बातचीत के बावजूद समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना फिलहाल नहीं है।
G7 के बाद भारत आएंगे जेमिसन ग्रीर
व्यापार समझौते को लेकर सबसे बड़ा संकेत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर के भारत दौरे से मिला है। अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, G7 शिखर सम्मेलन समाप्त होने के बाद वाले सप्ताह में ग्रीर भारत की यात्रा करेंगे।
यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका आमतौर पर किसी बड़े व्यापारिक समझौते से पहले तकनीकी और नीतिगत स्तर पर विस्तृत बातचीत करता है। ग्रीर की यात्रा से संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच बातचीत अभी जारी है और कई बिंदुओं पर चर्चा बाकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि G7 बैठक में समझौता अंतिम चरण में होता तो उसके बाद USTR प्रमुख के भारत आने की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए यह यात्रा इस बात का संकेत है कि बातचीत अभी भी सक्रिय चरण में है।
आखिर क्यों अहम है भारत-अमेरिका ट्रेड डील?
भारत और अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार भी बन चुका है। वहीं भारत अमेरिकी कंपनियों के लिए तेजी से उभरता हुआ उपभोक्ता और विनिर्माण केंद्र है।
यदि दोनों देशों के बीच व्यापक व्यापार समझौता होता है तो इसका असर कई क्षेत्रों पर दिखाई दे सकता है।
सबसे अधिक लाभ मिलने वाले क्षेत्रों में शामिल हो सकते हैं:
- आईटी और डिजिटल सेवाएं
- फार्मास्युटिकल उद्योग
- इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग
- कृषि उत्पाद
- रक्षा और एयरोस्पेस
- ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स
- ऊर्जा और एलएनजी व्यापार
विशेष रूप से चीन+1 रणनीति के दौर में अमेरिका भारत को एक वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र के रूप में देख रहा है। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
ट्रंप ने जताई “बहुत अच्छी डील” की उम्मीद
अमेरिकी अधिकारी के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समझौते को लेकर सकारात्मक हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप एक “बहुत अच्छी डील” चाहते हैं जो दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखे।
अधिकारी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिका को विश्वास है कि भारत और अमेरिका के बीच एक मजबूत व्यापार समझौता संभव है। हालांकि, इस दिशा में अभी और बातचीत की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भारत के आर्थिक विकास को लेकर महत्वाकांक्षी हैं और अमेरिका-भारत संबंधों के महत्व को अच्छी तरह समझते हैं। ऐसे में व्यापार समझौता दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई दे सकता है।
किन मुद्दों पर अटकी है बातचीत?
जानकारों के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर अभी अंतिम सहमति बननी बाकी है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- कृषि उत्पादों पर बाजार पहुंच
- आयात शुल्क और टैरिफ
- मेडिकल उपकरणों की कीमतें
- ई-कॉमर्स नियम
- डिजिटल व्यापार
- डेटा लोकलाइजेशन
- बौद्धिक संपदा अधिकार
- निवेश संरक्षण
भारत जहां घरेलू उद्योगों और किसानों के हितों को प्राथमिकता देना चाहता है, वहीं अमेरिका अपने निर्यातकों के लिए बेहतर बाजार पहुंच चाहता है। इसी वजह से बातचीत अपेक्षा से अधिक समय ले रही है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह समझौता?
भारत इस समय वैश्विक निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। चीन से बाहर उत्पादन इकाइयां स्थानांतरित करने वाली कंपनियों को भारत में लाने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है।
यदि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता होता है तो भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिल सकता है। इससे टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ने की संभावना है।
इसके अलावा विदेशी निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हो सकता है। वैश्विक कंपनियां भारत को लंबे समय के निवेश गंतव्य के रूप में और अधिक गंभीरता से देख सकती हैं।
जेमिसन ग्रीर कौन हैं?
जेमिसन ग्रीर वर्तमान में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) हैं। उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आर्थिक एजेंडे को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
ग्रीर अंतरराष्ट्रीय व्यापार मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। वह इससे पहले प्रतिष्ठित कानूनी फर्म King & Spalding में अंतरराष्ट्रीय व्यापार टीम के पार्टनर रह चुके हैं।
उनकी भारत यात्रा को व्यापार वार्ता के अगले महत्वपूर्ण चरण के रूप में देखा जा रहा है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि G7 सम्मेलन के दौरान मोदी और ट्रंप की बातचीत से व्यापार समझौते को राजनीतिक समर्थन मिलेगा। इसके बाद जेमिसन ग्रीर की भारत यात्रा तकनीकी और नीतिगत मुद्दों पर आगे की बातचीत को गति दे सकती है।
संभावना है कि दोनों देश पहले सीमित दायरे वाले व्यापार समझौते पर सहमत हों और बाद में व्यापक आर्थिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ें।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि भारत और अमेरिका दोनों इस समझौते को लेकर गंभीर हैं, लेकिन अंतिम घोषणा के लिए अभी कुछ और दौर की बातचीत बाकी है।
निष्कर्ष
फ्रांस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात निश्चित रूप से महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस बैठक के दौरान भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा होने की संभावना नहीं है।
इसके बावजूद G7 के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर का भारत दौरा इस बात का संकेत है कि बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है। आने वाले हफ्तों में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर और महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।


