Global Market Today: वैश्विक शेयर बाजारों में बुधवार को एक बार फिर दबाव देखने को मिला। सेमीकंडक्टर (चिप) कंपनियों के शेयरों में तेज बिकवाली का असर एशियाई बाजारों से लेकर अमेरिकी टेक इंडेक्स तक दिखाई दिया। Sandisk के शेयर करीब 14% टूट गए, जबकि Micron, SK Hynix ADR, Seagate और Intel जैसे दिग्गज शेयरों में भी 10% तक की गिरावट दर्ज की गई। इस कमजोरी का सबसे ज्यादा असर दक्षिण कोरिया के बाजार पर पड़ा, जहां कोस्पी इंडेक्स 5% से ज्यादा लुढ़क गया।
हालांकि, अमेरिकी बाजार में तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं रही। जहां नैस्डैक लगातार दबाव में रहा, वहीं पारंपरिक उद्योगों पर आधारित डॉव जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 500 अंकों से अधिक की मजबूती के साथ बंद हुआ।
एशियाई बाजारों का हाल
बुधवार सुबह एशियाई शेयर बाजारों में मिश्रित कारोबार देखने को मिला।
- निक्केई करीब 1.30% की गिरावट के साथ 61,555 के आसपास कारोबार करता दिखा।
- स्ट्रेट टाइम्स में 0.27% की बढ़त दर्ज की गई।
- ताइवान वेटेड इंडेक्स 1.81% गिरकर 40,865.50 पर पहुंच गया।
- हैंगसेंग 1.49% की तेजी के साथ 25,688 के स्तर पर रहा।
- कोस्पी में 5.11% की बड़ी गिरावट दर्ज हुई।
- शंघाई कंपोजिट भी 0.75% फिसलकर 3,784.70 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।
कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में चिप कंपनियों का अधिक वेटेज होने के कारण इन बाजारों पर बिकवाली का असर सबसे ज्यादा देखने को मिला।
अमेरिकी बाजार में टेक शेयरों पर दबाव
मंगलवार के कारोबारी सत्र में अमेरिकी शेयर बाजार में मिश्रित रुख देखने को मिला। डॉव जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज में 500 अंकों से अधिक की शानदार तेजी दर्ज हुई, जबकि नैस्डैक कंपोजिट लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ।
सेमीकंडक्टर कंपनियों में आई कमजोरी ने टेक सेक्टर को दबाव में रखा। दूसरी ओर, ऊर्जा कीमतों में हालिया नरमी और निवेशकों की खरीदारी ने डॉव जोंस को मजबूती दी।
अमेरिकी फ्यूचर्स में सुस्ती
बुधवार सुबह अमेरिकी स्टॉक इंडेक्स फ्यूचर्स में भी खास उत्साह नहीं दिखा।
- S&P 500 Futures लगभग सपाट रहे।
- Nasdaq 100 Futures में भी मामूली बदलाव देखने को मिला।
- Dow Jones Futures करीब 38 अंक या 0.1% की गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।
निवेशक अमेरिकी केंद्रीय बैंक (Fed) के ब्याज दर फैसले से पहले सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
कच्चे तेल में 3% से ज्यादा की रिकवरी
पिछले कारोबारी सत्र में भारी गिरावट के बाद बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार वापसी देखने को मिली।
- ब्रेंट क्रूड करीब 3.2% बढ़कर 86.80 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।
- WTI क्रूड करीब 3.4% की तेजी के साथ 81.95 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
इस तेजी की दो प्रमुख वजहें रहीं—
- अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार में अनुमान से अधिक गिरावट।
- मध्य पूर्व में तनाव फिर बढ़ने की आशंका।
हालांकि पिछले तीन कारोबारी सत्रों में ब्रेंट क्रूड में 14% से अधिक की गिरावट आ चुकी थी।
US-Iran तनाव फिर चर्चा में
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की ईरान की एक कथित कोशिश को विफल कर दिया।
दूसरी ओर, इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा लगातार दूसरे दिन सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से में तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमला करने की खबरें सामने आईं। हालांकि सऊदी रक्षा मंत्रालय ने हमले को नाकाम करने की बात कही है और ईरान ने किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है।
भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका ने तेल बाजार में खरीदारी को समर्थन दिया।
US Fed के फैसले पर टिकी बाजार की नजर
वैश्विक निवेशकों की निगाहें अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक पर टिकी हैं।
बाजार को उम्मीद है कि फेड अपनी प्रमुख ब्याज दरों में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा। CME FedWatch के संकेतों के अनुसार अधिकांश निवेशक मान रहे हैं कि ब्याज दरें मौजूदा दायरे में बरकरार रह सकती हैं। हालांकि फेड चेयरमैन की प्रेस कॉन्फ्रेंस से आगे की नीति का संकेत मिलने की उम्मीद है।
यदि फेड भविष्य में दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने के संकेत देता है तो इसका असर वैश्विक इक्विटी, सोना और बॉन्ड बाजारों पर देखने को मिल सकता है।
सोने की कीमतों में कमजोरी
फेड के फैसले से पहले निवेशकों की सतर्कता के कारण सोने की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली।
स्पॉट गोल्ड शुरुआती कारोबार में करीब 4,020 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखा। पिछले कारोबारी सत्र में इसमें लगभग 1.1% की गिरावट दर्ज हुई थी।
आमतौर पर ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं क्योंकि सोना ब्याज नहीं देता। इसी वजह से फेड के फैसले से पहले निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया है।
हालांकि हाल के महीनों में आई तेज गिरावट के बावजूद मजबूत खरीदारी के कारण सोना अभी भी 4,000 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर से ऊपर बना हुआ है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
वैश्विक बाजार फिलहाल तीन बड़े कारकों से प्रभावित हैं—
- सेमीकंडक्टर सेक्टर में जारी भारी बिकवाली।
- अमेरिका-ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव।
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति।
इन घटनाओं का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को वैश्विक संकेतों, फेड के फैसले और कच्चे तेल की कीमतों पर विशेष नजर बनाए रखनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शेयर बाजार और कमोडिटी में निवेश जोखिमों के अधीन है। NewsJagran.in किसी भी निवेश की सलाह नहीं देता। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।


