नई दिल्ली: शेयर बाजार में शुक्रवार को जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली, जिससे निवेशकों की संपत्ति में एक ही दिन में करीब ₹10 लाख करोड़ का इजाफा हो गया। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने शानदार वापसी की। बीएसई सेंसेक्स 1,695.40 अंक यानी 2.30% की छलांग लगाकर 75,527.95 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 461.30 अंक की तेजी के साथ 23,622.90 अंक पर पहुंच गया।
इस तेजी का सबसे बड़ा फायदा निवेशकों को मिला। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर करीब ₹462 लाख करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में लगभग ₹10 लाख करोड़ अधिक है। दूसरी ओर भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ और डॉलर के मुकाबले 65 पैसे चढ़कर 95.11 के स्तर पर बंद हुआ।
बाजार में क्यों आई इतनी बड़ी तेजी?
बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया से आई सकारात्मक खबरें रहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ समझौते पर सहमति बन गई है और सैन्य कार्रवाई रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं। निवेशकों को उम्मीद है कि अगर तनाव कम होता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव घटेगा और कच्चे तेल की कीमतों में राहत मिलेगी।
इसी उम्मीद के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 1.67% गिरकर 88.87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल में गिरावट सकारात्मक मानी जाती है क्योंकि इससे आयात बिल, महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव कम हो सकता है।
किन शेयरों ने बाजार को दी सबसे ज्यादा मजबूती?
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 28 बढ़त के साथ बंद हुए। सबसे ज्यादा तेजी बजाज फाइनेंस में दर्ज की गई। इसके अलावा लार्सन एंड टुब्रो, इंडिगो, टाइटन, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, अल्ट्राटेक सीमेंट, भारती एयरटेल और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली।
वहीं दूसरी ओर टेक महिंद्रा और पावर ग्रिड ऐसे चुनिंदा शेयर रहे जो गिरावट के साथ बंद हुए। निवेशकों का रुझान खासकर बैंकिंग, फाइनेंशियल और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों की ओर ज्यादा देखने को मिला।
ब्रॉडर मार्केट में भी दिखी जबरदस्त मजबूती
बाजार की तेजी सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 2.43% और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 2.80% की तेजी दर्ज की गई। यह संकेत है कि निवेशकों का भरोसा व्यापक बाजार में भी बढ़ा है।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी रियल्टी और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 3% से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली। हालांकि आईटी सेक्टर अपेक्षाकृत कमजोर रहा और निफ्टी आईटी इंडेक्स बाजार की तेजी के मुकाबले पीछे रह गया।
रुपये की मजबूती से क्या संकेत मिलते हैं?
डॉलर के मुकाबले रुपये का मजबूत होना विदेशी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है। मजबूत रुपया विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ावा दे सकता है और आयात लागत को कम करने में मदद कर सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रहती है और वैश्विक जोखिम कम होते हैं तो रुपये को आगे भी समर्थन मिल सकता है।
निवेशकों के लिए आगे क्या अहम रहेगा?
अब बाजार की नजर अमेरिका-ईरान समझौते से जुड़ी आधिकारिक घोषणाओं, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। यदि वैश्विक स्तर पर सकारात्मक माहौल बना रहता है तो भारतीय शेयर बाजार में तेजी का यह सिलसिला अगले सप्ताह भी जारी रह सकता है। हालांकि निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर बनाए रखनी चाहिए क्योंकि पश्चिम एशिया से जुड़ी कोई भी नई खबर बाजार की दिशा बदल सकती है।
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