Gold-Silver Price Today: भारतीय सर्राफा बाजार में 12 जून 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में हल्की रिकवरी देखने को मिली है। हालांकि पिछले कुछ दिनों में आई बड़ी गिरावट का असर अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीदों और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों की नजरें बुलियन बाजार पर टिकी हुई हैं।
सोना हमेशा से भारतीय निवेशकों और परिवारों के लिए सुरक्षित निवेश का माध्यम माना जाता रहा है। वहीं चांदी ने पिछले कुछ वर्षों में निवेश के साथ-साथ औद्योगिक मांग के कारण भी अपनी अलग पहचान बनाई है। ऐसे में जब भी इन दोनों धातुओं की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव आता है तो इसका असर आम खरीदारों से लेकर बड़े निवेशकों तक पर दिखाई देता है।
हालिया गिरावट के बाद लौटी मामूली तेजी
पिछले सप्ताह सोना और चांदी दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई थी। बाजार के आंकड़ों के अनुसार सोने की कीमतों में करीब ₹1,600 प्रति 10 ग्राम तक की गिरावट देखने को मिली थी, जबकि चांदी लगभग ₹5,000 प्रति किलोग्राम तक कमजोर हुई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, डॉलर इंडेक्स में मजबूती और वैश्विक निवेशकों की मुनाफावसूली के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना था। हालांकि अब निवेशकों की नई खरीदारी और सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से कीमतों में हल्की रिकवरी देखने को मिल रही है।
आज क्या है आपके शहर में सोने-चांदी का ताजा भाव?
भारतीय बाजार में आज 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के साथ चांदी के दाम इस प्रकार हैं:
| शहर | 24 कैरेट सोना (10 ग्राम) | 22 कैरेट सोना (10 ग्राम) | 18 कैरेट सोना (10 ग्राम) | चांदी (1 किलो) |
|---|---|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹149,740 | ₹137,262 | ₹112,305 | ₹242,970 |
| मुंबई | ₹150,000 | ₹137,500 | ₹112,500 | ₹243,390 |
| पटना | ₹149,920 | ₹137,427 | ₹112,440 | ₹243,260 |
| जयपुर | ₹149,980 | ₹137,482 | ₹112,485 | ₹243,360 |
| कानपुर | ₹150,080 | ₹137,573 | ₹112,560 | ₹243,340 |
| लखनऊ | ₹150,080 | ₹137,573 | ₹112,560 | ₹243,340 |
| भोपाल | ₹150,280 | ₹137,757 | ₹112,710 | ₹243,630 |
ध्यान देने वाली बात यह है कि अलग-अलग शहरों में टैक्स, स्थानीय शुल्क और ज्वेलर्स के मेकिंग चार्ज के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है।
सोने-चांदी की कीमतें कैसे तय होती हैं?
बहुत से लोगों को लगता है कि सोने और चांदी के भाव केवल भारतीय बाजार तय करता है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। भारत में सोने और चांदी की कीमतें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल और आयात लागत से प्रभावित होती हैं।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं या डॉलर मजबूत होता है तो इसका सीधा असर घरेलू बाजार पर दिखाई देता है।
इसके अलावा जीएसटी, आयात शुल्क और स्थानीय मांग भी कीमतों को प्रभावित करते हैं।
इन चार बड़े कारणों से बदल रहे हैं भाव
1. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति
पूरी दुनिया के निवेशक अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के फैसलों पर नजर रखते हैं। ब्याज दरों में बदलाव का सीधा असर सोने और चांदी पर पड़ता है।
जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर बॉन्ड और अन्य निवेश विकल्पों की ओर जाते हैं। वहीं ब्याज दरों में कटौती की संभावना सोने को मजबूती देती है।
2. डॉलर की मजबूती
सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में कारोबार करता है। इसलिए जब डॉलर मजबूत होता है तो सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है। हाल के दिनों में डॉलर इंडेक्स में मजबूती ने भी बुलियन बाजार पर असर डाला है।
3. मिडिल ईस्ट तनाव
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों का रुख सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ता है। ऐसी परिस्थितियों में सोने की मांग बढ़ सकती है और कीमतों को समर्थन मिलता है।
4. कच्चे तेल की कीमतें
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी महंगाई की आशंकाओं को बढ़ाती है। महंगाई बढ़ने की स्थिति में निवेशक सोने को सुरक्षित विकल्प के रूप में देखते हैं, जिससे कीमतों में तेजी आ सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट के बाद बाजार में स्थिरता लौट रही है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय बाजार पर नजर बनाए रखने का हो सकता है।
हालांकि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव अभी भी जारी रह सकते हैं क्योंकि वैश्विक आर्थिक संकेतक और केंद्रीय बैंकों की नीतियां कीमतों को प्रभावित करती रहेंगी।
यदि कोई निवेशक सोने में लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहता है तो वह चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपना सकता है। इससे बाजार की अस्थिरता का प्रभाव कम हो सकता है।
शादी और त्योहारों के सीजन का भी पड़ेगा असर
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। आने वाले महीनों में शादी और त्योहारों का सीजन शुरू होने के साथ ज्वेलरी की मांग बढ़ सकती है।
ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो त्योहारी सीजन में सोने की मांग बढ़ने से कीमतों को समर्थन मिलता है। यही वजह है कि ज्वेलर्स और निवेशक दोनों आने वाले महीनों पर नजर बनाए हुए हैं।
आगे क्या रह सकती है बाजार की दिशा?
विश्लेषकों के अनुसार यदि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगामी बैठकों में ब्याज दरों को लेकर नरम रुख अपनाता है तो सोने की कीमतें फिर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकती हैं।
वहीं यदि डॉलर लगातार मजबूत बना रहता है और वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ती है तो बुलियन बाजार में कुछ समय तक दबाव भी देखने को मिल सकता है।
चांदी के मामले में औद्योगिक मांग एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बढ़ती मांग आने वाले समय में चांदी को अतिरिक्त समर्थन दे सकती है।
निष्कर्ष
12 जून को भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी के दामों में हल्की रिकवरी दर्ज की गई है। हालांकि हाल की बड़ी गिरावट का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। वैश्विक आर्थिक संकेतक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति, डॉलर की चाल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम आने वाले दिनों में बुलियन बाजार की दिशा तय करेंगे।
यदि आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो केवल दैनिक उतार-चढ़ाव पर ध्यान देने के बजाय लंबी अवधि के रुझानों और बाजार की मौलिक स्थिति को भी समझना जरूरी है।


