नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन इसके बावजूद देश के कुछ बड़े बैंकों ने ग्राहकों को झटका दे दिया है। सरकारी क्षेत्र के दो बड़े बैंक—बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और केनरा बैंक—ने अपनी चुनिंदा अवधि वाले लोन की ब्याज दरों यानी MCLR (Marginal Cost of Funds Based Lending Rate) में बढ़ोतरी कर दी है। इसके साथ ही निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंकों में शामिल HDFC Bank ने भी अपनी कई अवधि की MCLR दरों में संशोधन किया है।
ब्याज दरों में यह बढ़ोतरी भले ही 0.05 फीसदी या 0.10 फीसदी जैसी मामूली दिखाई दे, लेकिन इसका असर लाखों ग्राहकों की मासिक EMI पर पड़ सकता है। खासकर उन ग्राहकों के लिए जिनके होम लोन, ऑटो लोन या बिजनेस लोन MCLR आधारित ब्याज दरों से जुड़े हुए हैं।
RBI ने रेपो रेट स्थिर रखा, फिर भी क्यों बढ़ीं ब्याज दरें?
आम तौर पर लोग मानते हैं कि जब RBI रेपो रेट नहीं बढ़ाता तो बैंकों की लोन दरें भी स्थिर रहती हैं। हालांकि वास्तविकता इससे थोड़ी अलग है। बैंक अपनी फंडिंग लागत, जमा पर दिए जाने वाले ब्याज, बाजार से जुटाई जाने वाली पूंजी और नकदी की स्थिति को देखते हुए MCLR तय करते हैं।
बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के महीनों में जमा (Deposit) जुटाने की लागत बढ़ी है। कई बैंक ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर ऊंचा ब्याज दे रहे हैं। इसका असर उनकी फंडिंग कॉस्ट पर पड़ता है और इसी कारण कुछ बैंक MCLR में बढ़ोतरी कर रहे हैं।
यही वजह है कि RBI द्वारा रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किए जाने के बावजूद कुछ बैंकों ने अपने लोन की आधार दरों में संशोधन किया है।
क्या होता है MCLR और क्यों है यह महत्वपूर्ण?
MCLR यानी Marginal Cost of Funds Based Lending Rate वह न्यूनतम दर है जिस पर बैंक कुछ श्रेणी के लोन प्रदान करते हैं। MCLR का उपयोग विशेष रूप से पुराने होम लोन, वाहन लोन और बिजनेस लोन की ब्याज दर तय करने में किया जाता है।
यदि किसी ग्राहक का लोन MCLR से जुड़ा हुआ है और बैंक MCLR बढ़ा देता है, तो अगली रीसेट डेट पर उसकी ब्याज दर बढ़ सकती है। इसके परिणामस्वरूप या तो EMI बढ़ती है या फिर लोन की अवधि लंबी हो जाती है।
हालांकि जिन ग्राहकों के लोन EBLR (External Benchmark Lending Rate) या Repo Linked Lending Rate से जुड़े हैं, उन पर इसका सीधा प्रभाव नहीं पड़ता।
केनरा बैंक ने किन दरों में किया बदलाव?
केनरा बैंक ने मुख्य रूप से शॉर्ट टर्म MCLR दरों में संशोधन किया है।
नई दरों के अनुसार:
- एक दिन का MCLR 7.90% से बढ़ाकर 7.95% किया गया।
- एक महीने का MCLR 7.95% से बढ़कर 8.00% हुआ।
- तीन महीने का MCLR 8.20% से बढ़कर 8.25% हो गया।
- छह महीने का MCLR 8.55% से बढ़कर 8.60% कर दिया गया।
इन नई दरों के लागू होने के बाद संबंधित अवधि वाले लोन की लागत पहले की तुलना में थोड़ी बढ़ जाएगी।
बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी ग्राहकों को दिया झटका
सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी अपनी कई MCLR दरों में 0.05 फीसदी की बढ़ोतरी की है।
संशोधित दरों के अनुसार:
- एक दिन का MCLR 7.80% से बढ़कर 7.85% हो गया।
- एक महीने का MCLR 7.90% से बढ़कर 7.95% हुआ।
- तीन महीने का MCLR 8.15% से बढ़कर 8.20% हो गया।
- छह महीने का MCLR 8.45% से बढ़कर 8.50% हो गया।
- एक साल का MCLR 8.70% से बढ़कर 8.75% कर दिया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार एक साल का MCLR सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि अधिकांश रिटेल लोन, जैसे होम लोन, पर्सनल लोन और ऑटो लोन इसी अवधि की दरों से प्रभावित होते हैं।
HDFC Bank ने भी बढ़ाईं कई अवधि की दरें
सरकारी बैंकों के साथ-साथ निजी क्षेत्र के दिग्गज HDFC Bank ने भी अपनी MCLR दरों में बदलाव किया है। बैंक ने 8 जून से नई दरें लागू कर दी हैं।
नई दरों के अनुसार:
- एक दिन का MCLR 8.10%
- तीन महीने का MCLR 8.20%
- छह महीने का MCLR 8.35%
- एक साल का MCLR 8.40%
सबसे अधिक बढ़ोतरी दो साल की अवधि वाले MCLR में की गई है, जिसे 0.10 फीसदी बढ़ाकर 8.55% कर दिया गया है। हालांकि एक महीने वाली अवधि की दर को 8.05% पर यथावत रखा गया है।
आपकी EMI पर कितना असर पड़ सकता है?
ब्याज दर में 0.05 फीसदी की वृद्धि पहली नजर में बहुत छोटी लग सकती है, लेकिन लंबे समय के होम लोन में इसका प्रभाव दिखाई देता है।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी ग्राहक ने 20 लाख रुपये का होम लोन 20 वर्षों के लिए लिया है, तो ब्याज दर में मामूली वृद्धि भी कुल ब्याज भुगतान को हजारों रुपये तक बढ़ा सकती है। हालांकि वास्तविक असर लोन राशि, शेष अवधि और ब्याज दर के प्रकार पर निर्भर करेगा।
जिन ग्राहकों की रीसेट डेट निकट है, उन्हें आगामी महीनों में EMI में बदलाव देखने को मिल सकता है।
क्या आगे और महंगे हो सकते हैं लोन?
बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि बैंकों की फंडिंग लागत ऊंची बनी रहती है तो आने वाले समय में अन्य बैंक भी अपनी MCLR दरों की समीक्षा कर सकते हैं। दूसरी ओर यदि महंगाई नियंत्रण में रहती है और RBI भविष्य में नीतिगत दरों में नरमी का संकेत देता है तो लोन दरों पर दबाव कम हो सकता है।
फिलहाल स्थिति यह है कि बैंक अपनी लागत के हिसाब से छोटे-छोटे बदलाव कर रहे हैं और ग्राहकों को अपने लोन की ब्याज दरों की नियमित समीक्षा करते रहना चाहिए।
लोन लेने वालों को क्या करना चाहिए?
यदि आपका लोन MCLR आधारित है तो यह जानना जरूरी है कि आपकी अगली रीसेट डेट कब है। साथ ही बैंक द्वारा जारी नई ब्याज दरों पर नजर रखें। जिन ग्राहकों को बेहतर विकल्प मिल रहे हैं, वे बैलेंस ट्रांसफर या रीफाइनेंसिंग जैसे विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं।
लोन लेने से पहले केवल EMI नहीं बल्कि कुल ब्याज भुगतान और ब्याज दर के प्रकार को समझना भी जरूरी है। आने वाले महीनों में बैंकिंग सेक्टर में ब्याज दरों को लेकर और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
स्रोत: बैंक ऑफ बड़ौदा MCLR अपडेट, केनरा बैंक ब्याज दर संशोधन, HDFC Bank MCLR घोषणा, RBI मौद्रिक नीति दस्तावेज, ET रिपोर्ट।


