भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को आईटी सेक्टर के शेयरों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के दौरान देश की दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयरों पर दबाव इतना बढ़ गया कि कई बड़े नाम अपने 52 हफ्तों के न्यूनतम स्तर तक पहुंच गए। सबसे ज्यादा चर्चा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और एलटीआईमाइंडट्री (LTIMindtree) के शेयरों को लेकर रही, जिन्होंने एक साल का निचला स्तर छू लिया।
आईटी शेयरों में आई इस गिरावट का असर पूरे सेक्टर पर देखने को मिला। निफ्टी आईटी इंडेक्स कारोबार के दौरान करीब 2 फीसदी तक टूट गया। इसके साथ ही इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, कोफोर्ज, एमफेसिस और ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज सॉफ्टवेयर जैसी कंपनियों के शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी कंपनियों पर बढ़ते दबाव, अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर अनिश्चितता, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के कमजोर पड़ने और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने आईटी शेयरों की धारणा को प्रभावित किया है।
किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई?
देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टीसीएस का शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 2,153.90 रुपये पर बंद हुआ था। गुरुवार को यह 2,129.95 रुपये पर खुला और कारोबार के दौरान गिरकर 2,110 रुपये तक पहुंच गया। यह शेयर का 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
विप्रो के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। शेयर 177.95 रुपये पर खुला और कारोबार के दौरान 175.80 रुपये तक फिसल गया। यह भी कंपनी का एक साल का न्यूनतम स्तर है।
एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयर ने भी निवेशकों को निराश किया। कंपनी का शेयर पिछले सत्र में 1,132.05 रुपये पर बंद हुआ था लेकिन कारोबार के दौरान गिरकर 1,090 रुपये तक पहुंच गया। यह भी 52 सप्ताह का निचला स्तर रहा।
एलटीआईमाइंडट्री के शेयरों में लगभग 3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। शेयर 3,948.90 रुपये पर खुलने के बाद 3,813 रुपये तक टूट गया। यह भी पिछले एक वर्ष का सबसे निचला स्तर है।
इसके अलावा इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, कोफोर्ज, एमफेसिस और ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज सॉफ्टवेयर के शेयरों में भी दबाव बना रहा।
आखिर आईटी शेयरों में गिरावट की वजह क्या है?
आईटी सेक्टर की कमजोरी के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण बताए जा रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों के खर्च को लेकर बढ़ती चिंता है।
विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका और यूरोप में बड़ी कंपनियां अपने आईटी बजट को लेकर सतर्क रुख अपना रही हैं। कई कंपनियां खर्च कम करने की रणनीति अपना रही हैं, जिसका सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों के ऑर्डर बुक और राजस्व वृद्धि पर पड़ सकता है।
भारतीय आईटी कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिका और यूरोप से आता है। ऐसे में वहां की आर्थिक स्थिति में मामूली बदलाव भी इन कंपनियों के शेयरों को प्रभावित करता है।
अमेरिकी महंगाई और फेडरल रिजर्व का असर
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि हाल में अमेरिका से आए महंगाई के आंकड़ों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। यदि महंगाई उम्मीद से अधिक रहती है तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती को टाल सकता है।
ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की स्थिति में कंपनियां निवेश और टेक्नोलॉजी खर्च को सीमित कर सकती हैं। इसका सीधा असर आईटी सेवाएं देने वाली भारतीय कंपनियों पर पड़ सकता है।
निवेशक इसी आशंका को देखते हुए आईटी शेयरों में मुनाफावसूली और बिकवाली कर रहे हैं।
वैश्विक टेक शेयरों में भी दिख रहा दबाव
सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई प्रमुख बाजारों में टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव देखने को मिल रहा है। अमेरिका के टेक सेक्टर में हाल के दिनों में अस्थिरता बढ़ी है। निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ऊंची ब्याज दरों, आर्थिक सुस्ती और भू-राजनीतिक तनाव का कॉर्पोरेट टेक्नोलॉजी खर्च पर कितना असर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब वैश्विक टेक कंपनियों के शेयर कमजोर होते हैं तो उसका असर भारतीय आईटी सेक्टर पर भी दिखाई देता है क्योंकि दोनों के बीच मजबूत कारोबारी संबंध हैं।
एआई भी बना चिंता का विषय
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बढ़ती चर्चा भी आईटी शेयरों की चाल को प्रभावित कर रही है। हालांकि अधिकांश आईटी कंपनियां एआई को अवसर के रूप में देख रही हैं, लेकिन निवेशकों के एक वर्ग को चिंता है कि पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग भविष्य में प्रभावित हो सकती है।
कई कंपनियां ऑटोमेशन और एआई आधारित समाधान अपनाने लगी हैं, जिससे पारंपरिक आउटसोर्सिंग सेवाओं की जरूरत कम होने की आशंका जताई जा रही है। इसी कारण निवेशकों की धारणा में कुछ हद तक नकारात्मकता देखी जा रही है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बढ़ाया दबाव
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) पिछले कुछ समय से चुनिंदा सेक्टर्स में बिकवाली कर रहे हैं। आईटी सेक्टर भी इससे अछूता नहीं रहा है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से शेयरों में दबाव बढ़ा और कीमतें नीचे आ गईं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है तो विदेशी निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हैं। इसका असर सबसे पहले टेक्नोलॉजी और ग्रोथ स्टॉक्स पर दिखाई देता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
बाजार जानकारों का मानना है कि आईटी सेक्टर की मौजूदा गिरावट अल्पकालिक दबाव का परिणाम हो सकती है। हालांकि निवेशकों को अमेरिकी अर्थव्यवस्था, फेडरल रिजर्व की नीति, वैश्विक टेक खर्च और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
यदि आने वाले महीनों में अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत रहती है और टेक्नोलॉजी खर्च में सुधार देखने को मिलता है तो भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में भी रिकवरी आ सकती है। लेकिन फिलहाल निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है।
आईटी सेक्टर भारतीय शेयर बाजार का महत्वपूर्ण हिस्सा है और टीसीएस, इन्फोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, विप्रो तथा टेक महिंद्रा जैसी कंपनियों की चाल पूरे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस सेक्टर पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश का कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


