नई दिल्ली। सुरक्षित निवेश की बात आते ही ज्यादातर लोगों के सामने दो विकल्प सबसे पहले आते हैं—बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और सरकार समर्थित छोटी बचत योजनाएं। भारत में करोड़ों निवेशक अपने पैसे को सुरक्षित रखते हुए बेहतर रिटर्न कमाने के लिए इन दोनों विकल्पों का इस्तेमाल करते हैं। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में भी एफडी और सरकारी बचत योजनाओं पर लोगों का भरोसा बना हुआ है।
Highlights
- सरकारी छोटी बचत योजनाओं में कई मामलों में एफडी से ज्यादा ब्याज मिलता है।
- PPF, NSC और SSY जैसी योजनाओं में टैक्स छूट का भी लाभ मिलता है।
- बैंक एफडी में अधिक लिक्विडिटी और निवेश अवधि चुनने की सुविधा होती है।
- विशेषज्ञ लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए सरकारी योजनाओं और आपातकालीन जरूरतों के लिए एफडी का मिश्रण रखने की सलाह देते हैं।
हालांकि जब निवेश का फैसला लेने की बात आती है तो अक्सर यह सवाल उठता है कि आखिर एफडी बेहतर है या फिर पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY), नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) और अन्य सरकारी योजनाएं। दोनों ही विकल्प सुरक्षित हैं, लेकिन ब्याज दर, टैक्स लाभ, लॉक-इन पीरियड और निकासी की सुविधा जैसे मामलों में काफी अंतर देखने को मिलता है। ऐसे में आइए विस्तार से समझते हैं कि किस विकल्प में निवेश करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
कहां मिल रहा है ज्यादा ब्याज?
निवेशकों की पहली नजर हमेशा रिटर्न पर जाती है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी मौजूदा तिमाही की ब्याज दरों के अनुसार सरकार ने छोटी बचत योजनाओं की दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। इसके बावजूद कई सरकारी योजनाएं आज भी बड़े बैंकों की एफडी दरों से बेहतर रिटर्न दे रही हैं।
सुकन्या समृद्धि योजना में वर्तमान में 8.2 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिल रहा है, जो छोटी बचत योजनाओं में सबसे अधिक है। नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) पर 7.7 प्रतिशत, किसान विकास पत्र (KVP) पर 7.5 प्रतिशत, पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (MIS) पर 7.4 प्रतिशत और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) पर 7.1 प्रतिशत ब्याज दिया जा रहा है।
दूसरी ओर, देश के प्रमुख बैंक सामान्य ग्राहकों को 6 प्रतिशत से 7 प्रतिशत के बीच ब्याज दे रहे हैं। एसबीआई, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक में कई अवधियों की एफडी पर करीब 6.25 प्रतिशत तक ब्याज मिलता है। कोटक महिंद्रा बैंक लगभग 6.50 प्रतिशत और यस बैंक करीब 6.66 प्रतिशत तक ब्याज दे रहा है। कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक 8 प्रतिशत से अधिक ब्याज भी ऑफर करते हैं, लेकिन निवेशकों को जोखिम और बैंक की विश्वसनीयता को भी ध्यान में रखना चाहिए।
स्पष्ट है कि केवल ब्याज दर के आधार पर देखा जाए तो कई सरकारी योजनाएं एफडी से बेहतर रिटर्न देने की स्थिति में हैं।
लॉक-इन पीरियड में किसकी पकड़ ज्यादा मजबूत?
ब्याज दर जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी लॉक-इन पीरियड भी होता है। कई बार निवेशक ज्यादा रिटर्न के चक्कर में पैसा ऐसी योजना में लगा देते हैं, जहां जरूरत पड़ने पर निकासी आसान नहीं होती।
PPF का लॉक-इन पीरियड 15 साल का होता है। हालांकि कुछ शर्तों के तहत आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है। NSC की मैच्योरिटी अवधि पांच साल होती है, जबकि सुकन्या समृद्धि योजना लंबी अवधि का निवेश विकल्प है, जो बेटी की उम्र और खाते की अवधि से जुड़ा होता है।
इसके मुकाबले एफडी में निवेशक को काफी लचीलापन मिलता है। बैंक 7 दिन से लेकर 10 साल तक की अवधि वाली एफडी की सुविधा देते हैं। जरूरत पड़ने पर अधिकांश एफडी को समय से पहले तोड़ा भी जा सकता है, हालांकि इसके लिए कुछ पेनाल्टी देनी पड़ सकती है।
यही वजह है कि जिन लोगों को निकट भविष्य में पैसों की जरूरत पड़ सकती है, वे अक्सर एफडी को प्राथमिकता देते हैं।
निवेश की सीमा में क्या अंतर है?
सरकारी योजनाओं में निवेश की कुछ सीमाएं तय होती हैं। उदाहरण के लिए पीपीएफ खाते में एक वित्त वर्ष के दौरान न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक ही निवेश किया जा सकता है। सुकन्या समृद्धि योजना और अन्य छोटी बचत योजनाओं में भी सरकार द्वारा निर्धारित सीमाएं लागू होती हैं।
वहीं एफडी के मामले में ऐसी कोई सख्त अधिकतम सीमा नहीं होती। बैंक के नियमों के अनुसार निवेशक हजारों रुपये से लेकर करोड़ों रुपये तक की एफडी करा सकते हैं। यही कारण है कि बड़ी रकम को सुरक्षित रखने के लिए कई निवेशक एफडी को प्राथमिकता देते हैं।
टैक्स बचाने में कौन आगे?
टैक्स लाभ वह क्षेत्र है जहां सरकारी योजनाएं एफडी पर स्पष्ट बढ़त बनाती हैं। पीपीएफ भारत की सबसे लोकप्रिय टैक्स बचत योजनाओं में से एक है। इसमें निवेश की गई राशि, अर्जित ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम तीनों टैक्स मुक्त होती हैं।
NSC और टैक्स सेविंग एफडी में निवेश करने पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट का लाभ मिलता है। सुकन्या समृद्धि योजना में भी निवेशकों को इसी धारा के तहत टैक्स छूट प्राप्त होती है और मैच्योरिटी राशि भी टैक्स मुक्त होती है।
इसके विपरीत सामान्य बैंक एफडी से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स योग्य होता है। निवेशक जिस टैक्स स्लैब में आता है, उसी के अनुसार ब्याज आय पर टैक्स देना पड़ता है। इसलिए कई बार टैक्स के बाद वास्तविक रिटर्न काफी कम हो जाता है।
एक उदाहरण से समझिए अंतर
मान लीजिए किसी निवेशक ने तीन साल के लिए 1 लाख रुपये की एफडी कराई है और उसे 6.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिल रहा है। तीन साल बाद उसकी राशि लगभग 1.23 लाख रुपये हो सकती है। हालांकि इस दौरान अर्जित ब्याज पर टैक्स देना होगा।
अब यदि कोई निवेशक 15 वर्षों तक हर साल 10,000 रुपये पीपीएफ खाते में जमा करता है और औसत ब्याज दर 7.1 प्रतिशत बनी रहती है, तो मैच्योरिटी पर उसे लगभग 2.71 लाख रुपये प्राप्त हो सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस राशि पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता।
लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का लाभ और टैक्स छूट मिलकर सरकारी योजनाओं को और आकर्षक बना देते हैं।
बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट और इमरजेंसी फंड के लिए क्या चुनें?
यदि आपका लक्ष्य बच्चों की उच्च शिक्षा, शादी या रिटायरमेंट जैसा दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्य है, तो PPF और SSY जैसी योजनाएं बेहतर विकल्प हो सकती हैं। इन योजनाओं में लंबी अवधि तक निवेश बना रहता है और टैक्स लाभ भी मिलता है।
अगर आपका उद्देश्य अगले कुछ वर्षों में घर खरीदना, व्यवसाय शुरू करना या किसी अन्य जरूरत के लिए धन जमा करना है, तो एफडी अधिक उपयोगी साबित हो सकती है। इसके अलावा इमरजेंसी फंड रखने के लिए भी एफडी एक अच्छा विकल्प माना जाता है क्योंकि इसमें जरूरत पड़ने पर पैसा निकाला जा सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि किसी एक विकल्प पर पूरी तरह निर्भर रहना समझदारी नहीं है। बेहतर रणनीति यह है कि निवेश पोर्टफोलियो में विविधता रखी जाए।
विशेषज्ञों के अनुसार टैक्स बचत और लंबी अवधि की संपत्ति बनाने के लिए पीपीएफ, एसएसवाई और एनएससी जैसी योजनाओं में निवेश करना चाहिए। वहीं नकदी की उपलब्धता बनाए रखने और आपातकालीन जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंक एफडी का उपयोग किया जा सकता है।
निष्कर्ष
एफडी और सरकारी बचत योजनाएं दोनों ही सुरक्षित निवेश विकल्प हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य अलग-अलग है। यदि आपको अधिक लिक्विडिटी और लचीलापन चाहिए तो एफडी बेहतर हो सकती है। वहीं लंबी अवधि में टैक्स बचत और बेहतर रिटर्न की तलाश करने वाले निवेशकों के लिए PPF, SSY और NSC जैसी योजनाएं ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती हैं।
निवेश विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश लोगों के लिए दोनों विकल्पों का संतुलित मिश्रण सबसे अच्छा रहता है। इससे निवेशक सुरक्षा, रिटर्न, टैक्स बचत और लिक्विडिटी के बीच बेहतर संतुलन बना सकते हैं।


