Share Market Opening Today: पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 350 अंक से अधिक चढ़ गया, जबकि निफ्टी 23,200 के स्तर को पार करने में सफल रहा। बाजार में लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में भी मजबूती दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ।
नई दिल्ली: वैश्विक संकेतों से मिले सकारात्मक समर्थन के बीच घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार सुबह मजबूत शुरुआत देखने को मिली। पश्चिम एशिया में संभावित शांति और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने निवेशकों की धारणा को बेहतर बनाया है। इसी का असर भारतीय इक्विटी बाजार पर भी दिखाई दिया, जहां शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।
सुबह 9:23 बजे बीएसई सेंसेक्स 357.82 अंक यानी 0.49 फीसदी की तेजी के साथ 73,882.08 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स 113.95 अंक यानी 0.49 फीसदी की बढ़त के साथ 23,236.95 अंक पर पहुंच गया। बाजार में व्यापक खरीदारी देखने को मिली और अधिकांश शेयर हरे निशान में कारोबार करते नजर आए।
पश्चिम एशिया से आई राहत की खबरों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा
पिछले कुछ सप्ताहों से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को प्रभावित किया था। निवेशकों को डर था कि यदि क्षेत्रीय संघर्ष और बढ़ता है तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। हालांकि अब हालात में कुछ नरमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
ईरान की ओर से इजरायल के खिलाफ तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने के संकेत दिए गए हैं। हालांकि ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इजरायल लेबनान में अपने सैन्य अभियान जारी रखता है तो स्थिति फिर से तनावपूर्ण हो सकती है। इसके बावजूद बाजारों ने फिलहाल इस घटनाक्रम को सकारात्मक रूप में लिया है।
वैश्विक निवेशक जोखिम वाली परिसंपत्तियों की ओर लौटते दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि एशियाई बाजारों में भी तेजी का माहौल बना हुआ है और भारतीय बाजार को इसका सीधा लाभ मिला है।
सेंसेक्स के 30 में से 29 शेयर बढ़त के साथ खुले
मंगलवार को बाजार खुलते ही निवेशकों ने बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, ऑटो और कंज्यूमर सेक्टर के शेयरों में खरीदारी दिखाई। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 शेयर हरे निशान में खुले, जो बाजार की मजबूती को दर्शाता है।
सबसे ज्यादा तेजी दिखाने वाले प्रमुख शेयरों में इंडिगो संचालित करने वाली इंटरग्लोब एविएशन और ट्रेंट शामिल रहे। इन शेयरों में एक फीसदी से अधिक की बढ़त दर्ज की गई।
इसके अलावा निम्नलिखित दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखी गई:
- बजाज फाइनेंस
- आईसीआईसीआई बैंक
- टीसीएस
- भारती एयरटेल
- महिंद्रा एंड महिंद्रा
- एशियन पेंट्स
- एक्सिस बैंक
- लार्सन एंड टुब्रो
- आईटीसी
वहीं सेंसेक्स में शामिल अल्ट्राटेक सीमेंट एकमात्र ऐसा शेयर रहा जो शुरुआती कारोबार में मामूली कमजोरी के साथ कारोबार करता दिखा।
निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप में भी दिखी मजबूती
बाजार की तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार यानी ब्रॉडर मार्केट में भी खरीदारी का माहौल बना रहा।
निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.83 फीसदी की तेजी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.63 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। यह संकेत देता है कि निवेशकों का भरोसा केवल ब्लूचिप शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सकारात्मक रुझान बना हुआ है।
विश्लेषकों के अनुसार जब व्यापक बाजार में भी तेजी दिखाई देती है तो इसे बाजार की मजबूती का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा खरीदारी हुई?
सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो रियल एस्टेट, बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली।
प्रमुख बढ़त वाले सेक्टर:
- निफ्टी रियल्टी
- निफ्टी बैंक
- निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज
- ऑटो सेक्टर
- कंज्यूमर शेयर
हालांकि आईटी सेक्टर में कुछ दबाव देखने को मिला। निफ्टी आईटी इंडेक्स शुरुआती कारोबार में हल्की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और डॉलर की चाल पर आईटी शेयरों की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।
रुपये में मजबूती क्यों आई?
शेयर बाजार की तेजी के साथ भारतीय मुद्रा को भी समर्थन मिला। डॉलर के मुकाबले रुपया 0.25 फीसदी मजबूत होकर 95.4650 पर खुला। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.7075 के स्तर पर बंद हुआ था।
रुपये में मजबूती के पीछे प्रमुख कारण हैं:
- कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
- विदेशी निवेशकों की जोखिम लेने की बढ़ती क्षमता
- एशियाई मुद्राओं में मजबूती
- वैश्विक तनाव कम होने की उम्मीद
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में जब कच्चे तेल की कीमतें गिरती हैं तो डॉलर की मांग कम होती है और रुपये को मजबूती मिलती है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को राहत
मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड लगभग 0.98 फीसदी गिरकर 93.33 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए कई मायनों में सकारात्मक मानी जाती है। इससे:
- आयात बिल कम हो सकता है
- चालू खाते के घाटे पर दबाव घट सकता है
- महंगाई नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है
- तेल विपणन कंपनियों को राहत मिल सकती है
- रुपये को समर्थन मिल सकता है
यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी को शेयर बाजार सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है।
निवेशकों के लिए आगे क्या संकेत?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी रहेगी। यदि क्षेत्रीय तनाव और कम होता है तथा कच्चा तेल मौजूदा स्तरों पर बना रहता है तो भारतीय बाजार को आगे भी समर्थन मिल सकता है।
हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम को लेकर अभी भी कुछ अनिश्चितता बनी हुई है। इसलिए निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद, बैंकिंग सेक्टर की मजबूती और घरेलू निवेशकों की लगातार भागीदारी बाजार को दीर्घकालिक समर्थन प्रदान कर रही है। फिलहाल शुरुआती संकेत बताते हैं कि निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है और बाजार सकारात्मक रुख के साथ आगे बढ़ रहा है।
Disclaimer: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार और आईपीओ में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


