नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को दबाव देखने को मिला। वैश्विक बाजारों में कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों का रुझान जोखिम वाले सेक्टरों से हटकर अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्रों की ओर दिखाई दिया। इसी माहौल में फार्मा सेक्टर निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरा। जब सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, तब फार्मा कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अनिश्चित परिस्थितियों में फार्मास्युटिकल कंपनियां अपेक्षाकृत स्थिर कारोबार करती हैं। दवाओं की मांग आर्थिक उतार-चढ़ाव से बहुत अधिक प्रभावित नहीं होती, इसलिए निवेशक ऐसे समय में फार्मा शेयरों को सुरक्षित विकल्प मानते हैं। यही वजह है कि सोमवार के कारोबार में कई प्रमुख फार्मा कंपनियों के शेयरों में मजबूती दर्ज की गई।
क्यों बढ़ रही है फार्मा शेयरों में खरीदारी?
शेयर बाजार में जब भी अस्थिरता बढ़ती है, निवेशक ऐसे सेक्टरों की तलाश करते हैं जिनकी आय अपेक्षाकृत स्थिर रहती हो। फार्मा उद्योग इसी श्रेणी में आता है। स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं की मांग लगातार बनी रहती है, चाहे अर्थव्यवस्था की स्थिति कैसी भी हो।
हाल के दिनों में वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों, भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। इसके चलते निवेशक बैंकिंग, ऑटो और मेटल जैसे चक्रीय क्षेत्रों से निकलकर फार्मा, एफएमसीजी और हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश बढ़ा रहे हैं।
निफ्टी फार्मा इंडेक्स का सकारात्मक प्रदर्शन भी इसी ट्रेंड को दर्शाता है। सेक्टर में आई मजबूती से यह संकेत मिलता है कि संस्थागत निवेशक भी फार्मा कंपनियों पर भरोसा जता रहे हैं।
इन प्रमुख फार्मा शेयरों में दिखी तेजी
सोमवार के कारोबार में कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में मजबूती दर्ज की गई। इनमें सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, डिवीज लैब, जेबी केमिकल्स, एबॉट इंडिया, अजंता फार्मा और ग्लैंड फार्मा जैसे नाम शामिल रहे।
विशेषज्ञों के अनुसार इन कंपनियों की मजबूत बैलेंस शीट, निर्यात बाजारों में अच्छी मौजूदगी और लगातार बढ़ते मुनाफे के कारण निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में भारतीय फार्मा कंपनियों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है, जिसका लाभ शेयरों को मिल रहा है।
डॉ. रेड्डीज और सन फार्मा जैसी कंपनियां जेनेरिक दवाओं के साथ-साथ स्पेशियलिटी मेडिसिन के क्षेत्र में भी विस्तार कर रही हैं। इससे उनकी आय के स्रोत मजबूत हुए हैं और निवेशकों का विश्वास बढ़ा है।
एलेम्बिक फार्मा को मिला बड़ा ग्रोथ ट्रिगर
दिन के कारोबार में एलेम्बिक फार्मास्युटिकल्स के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर रही। कंपनी ने कनाडा के बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए नई कनाडाई इकाई में निवेश संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस संयुक्त उद्यम में एलेम्बिक फार्मास्युटिकल्स और डिफजेन होल्डिंग्स एलएलसी की 45-45 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत हिस्सेदारी अन्य निवेशकों के पास रहेगी।
विश्लेषकों का मानना है कि कनाडा का फार्मास्युटिकल बाजार भारतीय कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। इस निवेश के जरिए एलेम्बिक अपनी वैश्विक पहुंच बढ़ाने और नए राजस्व स्रोत विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यही कारण है कि इस खबर के बाद कंपनी के शेयरों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली।
Gland Pharma पर एक्सपर्ट क्यों हैं बुलिश?
फार्मा सेक्टर में सबसे अधिक चर्चा ग्लैंड फार्मा को लेकर हो रही है। आईडीबीआई कैपिटल मार्केट्स एंड सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव एनालिस्ट देवेन मेहता ने इस शेयर पर सकारात्मक राय दी है।
उनके अनुसार ग्लैंड फार्मा के शेयर में तकनीकी चार्ट पर मजबूती के संकेत दिखाई दे रहे हैं। शेयर अपने प्रमुख सपोर्ट स्तरों के ऊपर कारोबार कर रहा है और इसमें आगे तेजी की संभावना बनी हुई है।
विशेषज्ञ ने निवेशकों को ग्लैंड फार्मा खरीदने की सलाह देते हुए 2,400 रुपये का लक्ष्य मूल्य बताया है। कंपनी का शेयर हाल के कारोबारी सत्रों में करीब 2,300 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।
ग्लैंड फार्मा इंजेक्टेबल दवाओं के क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति रखती है और अमेरिका सहित कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी अच्छी पकड़ है। कंपनी की निर्यात आधारित आय और विशेष उत्पाद पोर्टफोलियो इसे अन्य कई कंपनियों से अलग बनाते हैं।
आगे कैसा रह सकता है फार्मा सेक्टर का प्रदर्शन?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है तो फार्मा शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी जारी रह सकती है। इसके अलावा अमेरिका और यूरोप में भारतीय दवा कंपनियों की बढ़ती हिस्सेदारी भी सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है।
भारत सरकार भी फार्मास्युटिकल विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत कई कंपनियां नई क्षमता विकसित कर रही हैं। इससे आने वाले वर्षों में सेक्टर की विकास दर और बेहतर हो सकती है।
हालांकि निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अमेरिकी नियामक एजेंसी FDA से जुड़ी खबरें, मुद्रा विनिमय दरों में बदलाव और वैश्विक प्रतिस्पर्धा फार्मा कंपनियों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
जब बाजार में अस्थिरता बढ़ती है तो मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों की अहमियत और बढ़ जाती है। फार्मा सेक्टर वर्तमान में इसी कारण निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज, डिवीज लैब और ग्लैंड फार्मा जैसी कंपनियां लंबे समय से मजबूत प्रदर्शन करती रही हैं।
हालांकि किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के वित्तीय नतीजों, वैल्यूएशन, भविष्य की संभावनाओं और जोखिमों का अध्ययन करना जरूरी है। केवल किसी ब्रोकरेज रिपोर्ट या तकनीकी राय के आधार पर निवेश निर्णय लेना उचित नहीं माना जाता।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


