Gold-Silver Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। शनिवार 6 जून 2026 को कमोडिटी बाजार बंद है, इसलिए निवेशक और ज्वेलरी खरीदार शुक्रवार के बंद भाव के आधार पर ही बाजार की दिशा का आकलन कर रहे हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले संकेतों और घरेलू सर्राफा बाजार की स्थिति को देखते हुए सोना और चांदी दोनों में नरमी का माहौल बना हुआ है।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और ब्याज दरों को लेकर बनी आशंकाओं ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए आज के ताजा भाव जानना बेहद जरूरी है।
सोने की कीमतों में क्यों आई गिरावट?
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के वायदा भाव में हाल के कारोबारी सत्रों के दौरान उल्लेखनीय कमजोरी देखने को मिली है। 3 जुलाई 2026 डिलीवरी वाला गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट करीब 6.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,64,796 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। चूंकि शनिवार और रविवार को एमसीएक्स में कारोबार नहीं होता है, इसलिए फिलहाल यही बंद भाव बाजार के लिए प्रमुख संदर्भ बना हुआ है।
बुलियन बाजार से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ने और सुरक्षित निवेश विकल्पों में मुनाफावसूली के कारण सोने पर दबाव बना है। इसके अलावा अमेरिका में ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की संभावना भी सोने की कीमतों को प्रभावित कर रही है।
Indian Bullion and Jewellers Association (IBJA) के अनुसार शुक्रवार को बाजार बंद होने तक सोने का भाव करीब 1,54,238 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। यह दर्शाता है कि पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में कीमती धातुओं में कमजोरी बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से क्या मिल रहे हैं संकेत?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की चाल कमजोर बनी हुई है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क कर रखा है। हालांकि ऐसे हालात आमतौर पर सोने को समर्थन देते हैं, लेकिन मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरों की आशंका ने इस समर्थन को सीमित कर दिया है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं देते, तब तक सोने और चांदी में तेज रिकवरी की संभावना सीमित रह सकती है।
चांदी में भी जारी है दबाव
सोने की तरह चांदी की कीमतों में भी नरमी देखने को मिल रही है। चांदी पर निवेश मांग के साथ-साथ औद्योगिक मांग का भी बड़ा प्रभाव पड़ता है। वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती की आशंका और औद्योगिक खपत को लेकर बनी चिंताओं ने चांदी की कीमतों को प्रभावित किया है।
6 जून की सुबह चांदी का भाव करीब 2,74,900 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। इससे पहले दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत में करीब 5,000 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके बाद इसका भाव 2,60,700 रुपये प्रति किलोग्राम तक आ गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी लगभग 72.89 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक आंकड़े और डॉलर इंडेक्स की चाल चांदी की दिशा तय करेंगे।
आपके शहर में आज का सोने और चांदी का भाव
| शहर | 24 कैरेट सोना (10 ग्राम) | 22 कैरेट सोना (10 ग्राम) | 18 कैरेट सोना (10 ग्राम) | चांदी (प्रति किलो) |
|---|---|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹1,55,180 | ₹1,42,248 | ₹1,16,385 | ₹2,48,190 |
| मुंबई | ₹1,55,450 | ₹1,42,496 | ₹1,16,588 | ₹2,48,620 |
| पटना | ₹1,55,370 | ₹1,42,423 | ₹1,16,528 | ₹2,48,490 |
| जयपुर | ₹1,55,430 | ₹1,42,478 | ₹1,16,573 | ₹2,48,590 |
| कानपुर | ₹1,55,490 | ₹1,42,533 | ₹1,16,618 | ₹2,48,690 |
| लखनऊ | ₹1,55,490 | ₹1,42,533 | ₹1,16,618 | ₹2,48,690 |
क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय के निवेशकों के लिए सोने में गिरावट खरीदारी का अवसर हो सकती है। भारत में सोना केवल निवेश का माध्यम नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक जरूरतों से भी जुड़ा हुआ है। शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन में इसकी मांग बढ़ जाती है, जिससे कीमतों को समर्थन मिलता है।
हालांकि अल्पकालिक निवेशकों को वैश्विक आर्थिक संकेतों, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर नजर बनाए रखनी चाहिए। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है तो सोना दोबारा मजबूती दिखा सकता है।
सोने-चांदी की कीमतें किन कारकों से प्रभावित होती हैं?
सोने और चांदी की कीमतें कई घरेलू और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती हैं। इनमें डॉलर इंडेक्स, कच्चे तेल की कीमतें, केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति, भू-राजनीतिक तनाव, आयात शुल्क, घरेलू मांग और निवेशकों की गतिविधियां प्रमुख हैं।
इसके अलावा भारत में शादी और त्योहारों के मौसम में बढ़ती मांग भी कीमतों को प्रभावित करती है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बावजूद कई बार घरेलू बाजार में कीमतों में बड़ी कमी देखने को नहीं मिलती।
आगे क्या रह सकती है बाजार की दिशा?
बाजार विश्लेषकों के अनुसार आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, फेडरल रिजर्व के संकेतों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर बनी रहेगी। यदि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है तो सोने को फिर से सुरक्षित निवेश का समर्थन मिल सकता है। वहीं मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरें कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती हैं।
फिलहाल सोना और चांदी दोनों ही कमजोर रुख में कारोबार कर रहे हैं, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह स्तर आकर्षक माना जा रहा है।
डिस्क्लेमर: कमोडिटी निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। किसी भी योजना में निवेश करने से पहले योजना से जुड़े सभी दस्तावेज ध्यानपूर्वक पढ़ें और अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।


