नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा आज दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुकी है। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल एवं गैस की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण अधिकांश देश ऊर्जा संसाधनों को लेकर नई रणनीतियां बना रहे हैं। ऐसे समय में भारत के लिए अंडमान सागर से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है।
HighLights
- अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस के नए भंडार की खोज।
- ऑयल इंडिया लिमिटेड ने श्री विजयपुरम-3 कुएं में की बड़ी खोज।
- भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा मजबूत आधार।
- अंडमान बेसिन में लगातार दूसरी बड़ी सफलता से बढ़ीं उम्मीदें।
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने घोषणा की है कि अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस का एक नया भंडार मिला है। यह खोज ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) द्वारा की गई है और इसे भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगे के परीक्षण सफल रहते हैं तो यह खोज भविष्य में भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
श्री विजयपुरम-3 कुएं में मिली प्राकृतिक गैस
Congratulations @OilIndiaLimited !
An ocean of energy opportunities reinforced in the Andaman Sea!
Very happy to report the presence of natural gas in Sri Vijayapuram-3 an exploratory well drilled by Oil India Ltd. 15 km off the east coast of the Andaman Islands at a water… pic.twitter.com/j6QvWqZkFx
— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) June 5, 2026 ऑयल इंडिया लिमिटेड ने अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित श्री विजयपुरम-3 नामक खोजी कुएं में प्राकृतिक गैस की मौजूदगी का पता लगाया है। यह कुआं लगभग 355 मीटर गहरे समुद्री क्षेत्र में खोदा गया था।
प्रारंभिक परीक्षणों के दौरान यहां गैस की मौजूदगी के स्पष्ट संकेत मिले हैं। कंपनी के अनुसार आगे विस्तृत वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद इस गैस भंडार की वास्तविक क्षमता और व्यावसायिक उपयोग की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा।
यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि भारत लंबे समय से अपने घरेलू तेल और गैस उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर रहा है। अंडमान क्षेत्र में मिली यह सफलता उन प्रयासों को नई गति दे सकती है।
हरदीप सिंह पुरी ने दी जानकारी
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह भारत के समुद्री तेल एवं गैस अन्वेषण कार्यक्रम के लिए एक बड़ी सफलता है।
उन्होंने बताया कि लगभग 1,900 मीटर से अधिक गहराई पर किए गए परीक्षणों के दौरान लगातार गैस फ्लेयरिंग देखी गई, जिससे प्राकृतिक गैस की उपस्थिति की पुष्टि हुई। मंत्री ने इसे भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए उत्साहजनक विकास बताते हुए कहा कि इससे देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
पुरी ने यह भी कहा कि अंडमान बेसिन में हो रही खोजें भारत के अपतटीय ऊर्जा संसाधनों की विशाल संभावनाओं को दर्शाती हैं और आने वाले वर्षों में इनका आर्थिक महत्व और बढ़ सकता है।
अंडमान बेसिन से लगातार मिल रही सफलता
यह खोज केवल एक अलग घटना नहीं है बल्कि अंडमान बेसिन में चल रहे व्यापक अन्वेषण अभियान का हिस्सा है। मौजूदा अभियान के दौरान खोदे गए तीन खोजी कुओं में से दो में अब तक हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी मिल चुकी है।
इससे यह संकेत मिलता है कि अंडमान बेसिन में तेल और गैस के बड़े भंडार मौजूद हो सकते हैं। यदि आगे की खोजों में भी इसी तरह की सफलता मिलती है तो यह क्षेत्र भारत के लिए एक नए ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार मिल रही सफलताओं ने सरकार और ऊर्जा कंपनियों का भरोसा बढ़ाया है, जिसके चलते आने वाले समय में इस क्षेत्र में निवेश और अन्वेषण गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।
पहले भी मिल चुकी है गैस
वर्ष 2025 में श्री विजयपुरम-2 कुएं में भी प्राकृतिक गैस की खोज की गई थी। उस समय किए गए परीक्षणों में गैस में लगभग 87 प्रतिशत मीथेन की मौजूदगी पाई गई थी।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार इतनी अधिक मीथेन सामग्री किसी भी गैस खोज को व्यावसायिक दृष्टि से आकर्षक बनाती है। इसी सफलता के बाद अंडमान क्षेत्र में अतिरिक्त खोजी गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया था।
अब श्री विजयपुरम-3 में मिली सफलता ने यह उम्मीद और मजबूत कर दी है कि अंडमान बेसिन में भविष्य में और बड़े भंडार मिलने की संभावना मौजूद है।
क्यों खास है अंडमान बेसिन?
भूवैज्ञानिकों का मानना है कि अंडमान बेसिन की संरचना दक्षिण-पूर्व एशिया के कई गैस समृद्ध क्षेत्रों से मिलती-जुलती है। विशेष रूप से म्यांमार और इंडोनेशिया के समुद्री क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर तेल और गैस भंडार मौजूद हैं।
इसी वजह से पिछले कुछ वर्षों से अंडमान क्षेत्र को भारत के सबसे संभावनाशील ऊर्जा क्षेत्रों में गिना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यहां मौजूद तलछटी संरचनाएं हाइड्रोकार्बन संसाधनों के निर्माण के लिए अनुकूल परिस्थितियां प्रदान करती हैं।
यदि आने वाले वर्षों में बड़े भंडारों की पुष्टि होती है तो अंडमान बेसिन भारत के ऊर्जा मानचित्र में एक रणनीतिक स्थान हासिल कर सकता है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा बल
भारत वर्तमान में अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। प्राकृतिक गैस के मामले में भी देश को बड़ी मात्रा में एलएनजी आयात करनी पड़ती है।
ऐसे में घरेलू स्तर पर नए गैस भंडारों की खोज भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे आयातित ईंधन पर निर्भरता कम हो सकती है और विदेशी मुद्रा की बचत भी संभव है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ने से भविष्य में गैस आधारित उद्योगों, बिजली उत्पादन और उर्वरक क्षेत्र को भी लाभ मिल सकता है। इसके अलावा वैश्विक ऊर्जा बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर भी अपेक्षाकृत कम होगा।
अभी उत्पादन शुरू नहीं होगा
हालांकि प्राकृतिक गैस की मौजूदगी की पुष्टि होना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि तुरंत व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाएगा।
ऑयल इंडिया लिमिटेड अब गैस के नमूने एकत्र कर उनकी गुणवत्ता, संरचना और ऊर्जा क्षमता का विस्तृत अध्ययन करेगी। इसके बाद रिजर्व का आकलन किया जाएगा और फिर यह तय होगा कि व्यावसायिक उत्पादन किस स्तर तक संभव है।
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी समुद्री गैस क्षेत्र को उत्पादन चरण तक पहुंचाने में कई वर्षों का समय लग सकता है क्योंकि इसके लिए तकनीकी, पर्यावरणीय और आर्थिक परीक्षणों की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
समुद्र मंथन मिशन के तहत बढ़ रही खोज
सरकार ने संकेत दिए हैं कि अंडमान क्षेत्र में आगे भी कई नए खोजी कुएं खोदे जाएंगे। यह पूरा अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के “समुद्र मंथन मिशन” का हिस्सा माना जा रहा है।
इस मिशन का उद्देश्य भारत के समुद्री क्षेत्रों में मौजूद तेल, गैस और अन्य खनिज संसाधनों की खोज करना है। सरकार का मानना है कि देश के अपतटीय क्षेत्रों में अभी भी बड़ी मात्रा में अप्रयुक्त ऊर्जा संसाधन मौजूद हैं।
अंडमान सागर में मिली यह नई सफलता इस मिशन के लिए भी एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
निष्कर्ष
अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस के नए भंडार की खोज भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ऑयल इंडिया लिमिटेड द्वारा श्री विजयपुरम-3 कुएं में मिली इस सफलता ने अंडमान बेसिन की संभावनाओं को और मजबूत कर दिया है। ऐसे समय में जब दुनिया ऊर्जा संकट और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही है, यह खोज भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता, विदेशी मुद्रा बचत और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हो सकती है।


