भारत की ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अभी भी बड़े पैमाने पर कच्चे तेल (Crude Oil) का आयात करता है। वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनावों का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में सरकार लंबे समय से पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने के विकल्प तलाश रही है।
इसी दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि देशभर में 2027 के अंत तक लगभग 5,000 एथनॉल ईंधन स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे न केवल कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और विदेशी मुद्रा बचाने में भी मदद मिलेगी।
शुरुआत बड़े शहरों से होगी
मारुति सुजुकी की फ्लेक्स-फ्यूल कार पेश किए जाने के अवसर पर मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि शुरुआती चरण में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे प्रमुख शहरों में 50 से 100 एथनॉल वितरण स्टेशन शुरू किए जाएंगे।
सरकार की योजना के अनुसार वर्ष 2026 के अंत तक इन स्टेशनों की संख्या बढ़कर लगभग 500 तक पहुंच सकती है। इसके बाद अगले चरण में पूरे देश में विस्तार करते हुए 2027 के अंत तक 5,000 एथनॉल ईंधन स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
आखिर क्या है एथनॉल और क्यों बढ़ रहा इसका महत्व?
एथनॉल एक जैव ईंधन (Biofuel) है, जिसे मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एथनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग से पेट्रोलियम उत्पादों की खपत कम होती है और कार्बन उत्सर्जन भी घटता है। यही वजह है कि अमेरिका, ब्राजील और कई अन्य देश लंबे समय से एथनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा दे रहे हैं।
भारत भी पिछले कुछ वर्षों में इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ा है। सरकार का लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ आयातित तेल पर निर्भरता कम करना है।
किसानों की आय में होगा बड़ा इजाफा
एथनॉल कार्यक्रम का सबसे बड़ा फायदा कृषि क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है।
हरदीप सिंह पुरी के अनुसार यदि देश में बिकने वाले नए दोपहिया और चारपहिया वाहनों में से लगभग आधे फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर आधारित हो जाएं, तो करीब 311.8 करोड़ लीटर अतिरिक्त एथनॉल की मांग पैदा हो सकती है।
इससे गन्ना, मक्का और अन्य कृषि फसलों की मांग बढ़ेगी, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा। सरकार का अनुमान है कि इससे किसानों को लगभग 12,403 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है।
कच्चे तेल के आयात पर कैसे पड़ेगा असर?
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है। देश अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है।
मंत्री के अनुसार यदि Euro-6 मानकों वाले वाहनों को E100 ईंधन के अनुकूल बनाया जा सके तो लगभग 120 अरब डॉलर तक के कच्चे तेल आयात को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि तेल आयात में कमी आने से भारत का व्यापार घाटा कम होगा और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव भी घटेगा।
1.84 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचत
सरकार के एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम का असर पहले से दिखाई देने लगा है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 में पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण का स्तर मात्र 1.5 प्रतिशत था। वर्तमान में यह बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
इस अवधि के दौरान लगभग 302 लाख टन कच्चे तेल का प्रतिस्थापन किया गया, जिससे देश को करीब 1.84 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने में सफलता मिली।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकार इसे भारत की सबसे सफल वैकल्पिक ईंधन नीतियों में से एक मानते हैं।
तेल कंपनियों को अब भी उठाना पड़ रहा नुकसान
हरदीप सिंह पुरी ने यह भी कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां अभी भी प्रतिदिन लगभग 500 से 550 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू मूल्य नियंत्रण की वजह से कंपनियों पर वित्तीय दबाव बना हुआ है। हालांकि सरकार का मानना है कि वैकल्पिक ईंधनों के बढ़ते उपयोग से भविष्य में इस दबाव को कम किया जा सकेगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भारत की निर्भरता
भारत के ऊर्जा सुरक्षा ढांचे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
मंत्री के अनुसार देश के लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी और 90 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है। यही कारण है कि पश्चिम एशिया में किसी भी प्रकार का तनाव भारत के लिए चिंता का विषय बन जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एथनॉल, ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देकर भारत भविष्य में इस जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।
क्या बदलने वाले हैं वाहन नियम?
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने वाहन उत्सर्जन नियमों में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य उच्च एथनॉल मिश्रण वाले ईंधनों और अन्य वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा देना है।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो आने वाले वर्षों में भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।
निष्कर्ष
भारत की 5,000 एथनॉल ईंधन स्टेशन स्थापित करने की योजना केवल एक ऊर्जा परियोजना नहीं बल्कि आयातित तेल पर निर्भरता घटाने, किसानों की आय बढ़ाने, विदेशी मुद्रा बचाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि सरकार अपने तय लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ती है तो आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।


