नई दिल्ली। देश में महंगाई को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ सकती है। रेटिंग एजेंसी CRISIL की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें मौजूदा ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल बढ़ोतरी 10 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है। इसका असर सिर्फ वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दूध, फल-सब्जियां, दालें, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और निर्माण सामग्री जैसी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं।
CRISIL की रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार दबाव में बनी हुई हैं। ऊर्जा लागत बढ़ने से भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है और इसका प्रभाव आम उपभोक्ताओं की जेब तक पहुंचता है।
15 मई के बाद से 7.5 रुपये तक बढ़ चुके हैं दाम
CRISIL की रिपोर्ट के मुताबिक 15 मई के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है। यदि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें नीचे नहीं आती हैं तो यह वृद्धि 10 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है।
ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी सिर्फ परिवहन क्षेत्र को प्रभावित नहीं करती बल्कि पूरी सप्लाई चेन पर असर डालती है। देश में ज्यादातर वस्तुओं का परिवहन सड़क मार्ग से होता है, इसलिए डीजल महंगा होने का सीधा असर उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है।
सड़क परिवहन पर सबसे ज्यादा असर
CRISIL का कहना है कि सड़क परिवहन क्षेत्र की कुल लागत का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा ईंधन पर निर्भर करता है। ऐसे में डीजल महंगा होने पर ट्रांसपोर्ट कंपनियों की लागत बढ़ जाती है।
भारत में लगभग 71 प्रतिशत माल ढुलाई सड़क मार्ग से होती है। जब ट्रांसपोर्ट महंगा होता है तो कंपनियां यह अतिरिक्त लागत अपने ग्राहकों से वसूलने की कोशिश करती हैं। परिणामस्वरूप बाजार में वस्तुओं की कीमतें बढ़ने लगती हैं।
किन चीजों के महंगा होने का खतरा?
विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का असर सबसे पहले उन उत्पादों पर दिखाई देता है जिनकी सप्लाई चेन लंबी होती है।
इन उत्पादों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है:
- दूध और डेयरी उत्पाद
- फल और सब्जियां
- दालें और अनाज
- चाय और कॉफी
- मसाले
- अंडे, मांस और मछली
- पैकेज्ड फूड उत्पाद
इसके अलावा गैर-खाद्य क्षेत्रों में भी लागत बढ़ने की आशंका है।
कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और सीमेंट भी हो सकते हैं महंगे
CRISIL रिपोर्ट के अनुसार कपड़ा उद्योग, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, लकड़ी आधारित उत्पाद, सीमेंट और सिरेमिक उद्योग पर भी ईंधन महंगाई का असर पड़ सकता है।
इन उद्योगों में कच्चे माल और तैयार उत्पादों की ढुलाई बड़ी लागत होती है। ईंधन महंगा होने पर उत्पादन लागत बढ़ती है और कंपनियां कीमतें बढ़ाने पर मजबूर हो सकती हैं।
रसायन, कोयला और धातु क्षेत्र भी इस दबाव से अछूते नहीं रहेंगे।
महंगाई पर कितना असर पड़ेगा?
CRISIL का अनुमान है कि यदि ईंधन कीमतों में 7.5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि होती है तो खुदरा महंगाई (Retail Inflation) में लगभग 0.36 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
वहीं यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल वृद्धि 10 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचती है तो खुदरा मुद्रास्फीति लगभग 0.48 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
पहली नजर में यह आंकड़ा छोटा लग सकता है, लेकिन भारत जैसे बड़े उपभोक्ता बाजार में महंगाई का आधा प्रतिशत भी करोड़ों परिवारों के मासिक बजट को प्रभावित कर सकता है।
कच्चे तेल की कीमतें क्यों बनी हुई हैं चिंता?
रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों में कच्चे तेल की औसत कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल रही है। यह पूरे वर्ष के अनुमानित औसत 95 डॉलर प्रति बैरल से काफी अधिक है।
यदि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, उत्पादन कटौती या सप्लाई बाधाएं बनी रहती हैं तो तेल की कीमतों में तेजी जारी रह सकती है।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हर उछाल का असर घरेलू बाजार पर दिखाई देता है।
क्या कंपनियां ग्राहकों पर डालेंगी बोझ?
विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती लागत के सामने कंपनियों के पास आमतौर पर दो विकल्प होते हैं।
पहला, उत्पादों की कीमत बढ़ाना।
दूसरा, समान कीमत पर उत्पाद की मात्रा कम करना, जिसे अक्सर “Shrinkflation” कहा जाता है।
ऐसे में उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अतिरिक्त लागत का बोझ उठाना पड़ सकता है।
RBI की नजर महंगाई पर
हालांकि वर्तमान में खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 प्रतिशत लक्ष्य के आसपास बनी हुई है और केंद्रीय बैंक के 2 से 6 प्रतिशत के दायरे में है।
फिर भी RBI ईंधन कीमतों, खाद्य महंगाई, मानसून की स्थिति और अल नीनो जैसे मौसम संबंधी जोखिमों पर लगातार नजर रखे हुए है।
यदि खाद्य और ईंधन दोनों मोर्चों पर दबाव बढ़ता है तो महंगाई फिर से केंद्रीय बैंक के लिए चुनौती बन सकती है।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतें 10 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ती हैं तो इसका असर सिर्फ वाहन चलाने की लागत तक सीमित नहीं रहेगा।
- दैनिक यात्रा महंगी हो सकती है।
- बस और कैब किराए बढ़ सकते हैं।
- खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी आ सकती है।
- घरेलू बजट पर दबाव बढ़ सकता है।
- निर्माण और आवास लागत में बढ़ोतरी हो सकती है।
यानी ईंधन महंगाई का प्रभाव पूरी अर्थव्यवस्था में दिखाई दे सकता है।
निष्कर्ष
CRISIL की रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण चेतावनी देती है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर महंगाई, परिवहन लागत और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। फिलहाल RBI और सरकार दोनों स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन आने वाले महीनों में तेल बाजार की चाल आम लोगों की जेब पर बड़ा असर डाल सकती है।


