नई दिल्ली: आमतौर पर मानसून के दौरान देश में पेट्रोल और डीजल की मांग में कमी देखने को मिलती है। बारिश होने से खेतों में सिंचाई के लिए डीजल पंपों की जरूरत घट जाती है और सड़क यातायात भी कुछ धीमा पड़ जाता है। लेकिन इस साल तस्वीर बिल्कुल अलग है। कमजोर मानसून और बारिश में देरी ने ईंधन की मांग को अप्रत्याशित रूप से बढ़ा दिया है।
1 से 15 जुलाई के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) की बिक्री के आंकड़े बताते हैं कि पेट्रोल और डीजल दोनों की मांग में पिछले साल की तुलना में जबरदस्त उछाल आया है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह किसानों द्वारा सिंचाई के लिए डीजल चालित पंपों का बढ़ा हुआ इस्तेमाल और सामान्य से कमजोर मानसून माना जा रहा है।
Highlights
- जुलाई के पहले पखवाड़े में पेट्रोल बिक्री 22.9% बढ़ी।
- डीजल की बिक्री में 20.9% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज हुई।
- कमजोर मानसून के कारण किसानों ने अधिक डीजल पंप चलाए।
- जून के मुकाबले हालांकि पेट्रोल और डीजल दोनों की बिक्री घटी।
- LPG और ATF की मांग में भी अलग-अलग रुझान देखने को मिले।
15 दिनों में पेट्रोल की बिक्री में 22.9% की बढ़ोतरी
तेल कंपनियों के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, 1 से 15 जुलाई के बीच पेट्रोल की बिक्री बढ़कर 16.3 लाख टन पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 13.3 लाख टन थी। यानी सालाना आधार पर 22.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि निजी वाहनों की आवाजाही और ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन की मांग दोनों मजबूत बनी हुई हैं।
डीजल की मांग में भी आया बड़ा उछाल
डीजल की बिक्री भी इस अवधि में 34.6 लाख टन रही, जबकि पिछले साल यह 28.7 लाख टन थी। इस तरह सालाना आधार पर 20.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
डीजल की मांग में यह तेजी मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों से आई, जहां बारिश कम होने के कारण किसानों को सिंचाई के लिए डीजल पंपों का अधिक इस्तेमाल करना पड़ा।
कमजोर मानसून ने कैसे बढ़ाई ईंधन की मांग?
आमतौर पर मानसून के दौरान खेतों में प्राकृतिक रूप से पर्याप्त पानी मिलने के कारण सिंचाई की जरूरत कम हो जाती है। लेकिन इस बार कई राज्यों में बारिश सामान्य से कम रही और मानसून की रफ्तार भी धीमी रही।
ऐसी स्थिति में किसानों ने फसलों को बचाने के लिए डीजल चालित पंपों का सहारा लिया। इसके अलावा कई इलाकों में जलाशयों का स्तर भी अपेक्षाकृत कम रहा, जिससे भूजल आधारित सिंचाई बढ़ी और डीजल की खपत में तेजी देखने को मिली।
यानी इस बार कमजोर मानसून ने पेट्रोलियम कंपनियों के लिए मांग बढ़ाने का काम किया।
जून के मुकाबले क्यों घटी बिक्री?
हालांकि सालाना आधार पर बिक्री मजबूत रही, लेकिन अगर जून से तुलना करें तो जुलाई के पहले 15 दिनों में दोनों प्रमुख ईंधनों की बिक्री घटी है।
- पेट्रोल बिक्री में 4.4% की गिरावट
- डीजल बिक्री में 12.1% की कमी
विशेषज्ञों के मुताबिक यह एक सामान्य मौसमी रुझान है। जून में स्कूल-कॉलेज की गर्मी की छुट्टियों के कारण पर्यटन और लंबी दूरी की यात्राएं अधिक होती हैं, जिससे ईंधन की खपत बढ़ जाती है। जुलाई में छुट्टियां समाप्त होने और मानसून शुरू होने के साथ यात्रा गतिविधियां कुछ कम हो जाती हैं।
विमान ईंधन (ATF) की बिक्री कैसी रही?
विमान ईंधन यानी ATF (Aviation Turbine Fuel) की बिक्री 1 से 15 जुलाई के दौरान 3.15 लाख टन रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 0.7 प्रतिशत अधिक है।
हालांकि जून के पहले पखवाड़े की तुलना में इसमें 10.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो मौसमी यात्रा पैटर्न को दर्शाती है।
LPG की बिक्री में जारी रही गिरावट
जहां पेट्रोल और डीजल की मांग बढ़ी, वहीं घरेलू रसोई गैस (LPG) की बिक्री में गिरावट देखने को मिली।
जुलाई के पहले 15 दिनों में LPG बिक्री 17.5 प्रतिशत घटकर 11.4 लाख टन रह गई। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू ईंधन की मांग इस अवधि में अपेक्षाकृत कमजोर रही।
आगे क्या रहेगा नजर रखने वाला विषय?
यदि आने वाले दिनों में मानसून सामान्य होता है और देशभर में अच्छी बारिश होती है, तो किसानों की सिंचाई के लिए डीजल पर निर्भरता कम हो सकती है। ऐसे में डीजल की मांग सामान्य स्तर पर लौट सकती है। दूसरी ओर, यदि बारिश में और देरी होती है या कई क्षेत्रों में वर्षा की कमी बनी रहती है, तो ग्रामीण इलाकों से ईंधन की मांग मजबूत बनी रह सकती है।
निष्कर्ष
कमजोर मानसून और बारिश में देरी ने इस बार ईंधन बाजार की सामान्य तस्वीर बदल दी है। जहां आमतौर पर इस मौसम में पेट्रोल और डीजल की मांग घटती है, वहीं जुलाई के पहले पखवाड़े में दोनों ईंधनों की बिक्री में 20% से अधिक की सालाना वृद्धि दर्ज हुई। इससे साफ है कि मौसम का असर केवल कृषि उत्पादन पर ही नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा खपत और तेल कंपनियों के कारोबार पर भी सीधे तौर पर पड़ता है।


