Saiteja Gopishetty Success Story: आज के दौर में युवा सिर्फ नौकरी की तलाश नहीं कर रहे, बल्कि अपने आइडिया के दम पर नई कंपनियां भी खड़ी कर रहे हैं। तेलंगाना के 23 वर्षीय साईतेजा गोपिशेट्टी (Saiteja Gopishetty) इसका बेहतरीन उदाहरण हैं। BBA की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी करने के बजाय एग्रीकल्चर सेक्टर में स्टार्टअप शुरू करने का फैसला लिया। उनका स्टार्टअप Luminara Legacy Pvt. Ltd. किसानों को खेती से जुड़े आधुनिक समाधान उपलब्ध कराता है। सबसे बड़ी बात यह है कि महज डेढ़ साल में ही उनकी कंपनी करीब ₹20 करोड़ की वैल्यूएशन तक पहुंच गई है।
नौकरी छोड़ चुना उद्यमिता का रास्ता
Meet Saiteja Gopishetty from Telangana, a BBA graduate from Woxsen University Hyderabad.
Now this guy at just 23 built a
20 crore company in just 1.5 years after graduation.
He is the founder of Luminara legacy https://t.co/ulsYEBWSeI. building an Agri seeds and chemicals… pic.twitter.com/LnkdHWPUrt
— Vikas Alwys (@VikasAlwys) July 17, 2026 अधिकांश युवा ग्रेजुएशन के बाद अच्छी नौकरी की तलाश में जुट जाते हैं, लेकिन साईतेजा गोपिशेट्टी ने अलग सोच अपनाई। BBA पूरा करने के बाद उन्होंने यह महसूस किया कि भारत की कृषि व्यवस्था में अभी भी कई ऐसी समस्याएं हैं, जिनका समाधान आधुनिक तकनीक और बेहतर उत्पादों के जरिए किया जा सकता है।
इसी सोच के साथ उन्होंने Luminara Legacy Pvt. Ltd. की शुरुआत की। कंपनी का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पाद और आधुनिक खेती से जुड़े समाधान उपलब्ध कराना है, ताकि उनकी लागत कम हो और उत्पादन बढ़ सके।
क्या काम करती है Luminara Legacy?
Luminara Legacy एक एग्री-स्टार्टअप है, जो किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई तरह के कृषि उत्पाद और सेवाएं उपलब्ध कराता है। कंपनी का फोकस खेती को अधिक लाभदायक और वैज्ञानिक बनाने पर है।
कंपनी मुख्य रूप से किसानों को उपलब्ध कराती है—
- उच्च गुणवत्ता वाले बीज
- कीटनाशक और फसल सुरक्षा उत्पाद
- माइक्रोन्यूट्रिएंट्स
- आधुनिक कृषि समाधान
- बेहतर उत्पादन बढ़ाने से जुड़ी सलाह
साईतेजा का मानना है कि यदि किसानों को सही समय पर सही उत्पाद और तकनीकी मार्गदर्शन मिले तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
सिर्फ 23 साल की उम्र में बनाया ₹20 करोड़ का कारोबार
सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, साईतेजा गोपिशेट्टी ने कंपनी शुरू होने के लगभग डेढ़ साल के भीतर ₹20 करोड़ की वैल्यूएशन हासिल कर ली। इतनी कम उम्र में यह उपलब्धि उन्हें देश के उभरते युवा उद्यमियों की सूची में शामिल करती है।
कंपनी अब अपने अगले लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही है और साल 2028 तक ₹100 करोड़ के कारोबार तक पहुंचने की योजना पर काम कर रही है।
किसानों की समस्या को बनाया बिजनेस मॉडल
साईतेजा की सफलता का सबसे अहम कारण यह माना जा रहा है कि उन्होंने सिर्फ बिजनेस शुरू करने पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि किसानों की वास्तविक चुनौतियों को समझने की कोशिश की।
उन्होंने देखा कि कई किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, सही कृषि उत्पाद और आधुनिक तकनीक समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती। इसी समस्या को अवसर में बदलते हुए उन्होंने ऐसा बिजनेस मॉडल तैयार किया, जो किसानों की जरूरतों को सीधे पूरा करता है।
यही वजह है कि उनका स्टार्टअप तेजी से पहचान बना रहा है।
युवाओं के लिए क्यों खास है यह कहानी?
साईतेजा गोपिशेट्टी की सफलता इस बात का उदाहरण है कि बड़ी उपलब्धि हासिल करने के लिए लंबा अनुभव हमेशा जरूरी नहीं होता। यदि किसी के पास स्पष्ट विजन, सही रणनीति और मेहनत करने का जज्बा हो तो कम उम्र में भी बड़ी कंपनी बनाई जा सकती है।
उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं लेकिन जोखिम लेने से डरते हैं।
सोशल मीडिया पर मिल रही खूब सराहना
साईतेजा की सफलता सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। कई लोगों ने उनकी उद्यमशीलता और कृषि क्षेत्र में काम करने के फैसले की तारीफ की।
एक यूजर ने लिखा कि 23 साल की उम्र में ₹20 करोड़ की कंपनी बनाना दिखाता है कि मजबूत विजन और लगातार मेहनत किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकती है। वहीं अन्य लोगों ने उनके 2028 तक ₹100 करोड़ के लक्ष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
भारत के एग्री-स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिल रही नई दिशा
पिछले कुछ वर्षों में भारत में एग्री-टेक और कृषि आधारित स्टार्टअप तेजी से बढ़े हैं। डिजिटल तकनीक, बेहतर सप्लाई चेन, वैज्ञानिक खेती और किसानों को सीधे समाधान देने वाले मॉडल निवेशकों का भी ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
ऐसे समय में साईतेजा गोपिशेट्टी जैसे युवा उद्यमी यह साबित कर रहे हैं कि कृषि केवल पारंपरिक व्यवसाय नहीं, बल्कि नवाचार और तकनीक के जरिए बड़े बिजनेस अवसर भी प्रदान कर सकती है।
निष्कर्ष
साईतेजा गोपिशेट्टी की कहानी बताती है कि सफलता उम्र की मोहताज नहीं होती। BBA के बाद नौकरी करने के बजाय उन्होंने जोखिम उठाकर अपना स्टार्टअप शुरू किया और बेहद कम समय में ₹20 करोड़ की कंपनी खड़ी कर दी। किसानों की समस्याओं का समाधान खोजने की उनकी सोच ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। यदि उनका ₹100 करोड़ का लक्ष्य तय समय पर पूरा होता है, तो वह देश के सफल युवा एग्री-उद्यमियों में एक बड़ा नाम बन सकते हैं।


