डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के खतरनाक रसायनों और विस्फोटक पदार्थों की बिक्री अब केंद्र सरकार के निशाने पर आ गई है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने ऐसे कई बड़े ई-कॉमर्स और बी2बी प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, जहां कथित तौर पर विस्फोटक सामग्री और उसके कच्चे पदार्थों की ऑनलाइन लिस्टिंग की जा रही थी। सरकार का कहना है कि इस तरह की बिक्री राष्ट्रीय सुरक्षा और आम लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
नई दिल्ली में जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, CCPA ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत यह कार्रवाई शुरू की है। जांच के दौरान पाया गया कि कई संवेदनशील रसायन और विस्फोटक पदार्थ बिना पर्याप्त लाइसेंस जांच और खरीदार सत्यापन के ऑनलाइन उपलब्ध कराए जा रहे थे। यही वजह है कि अब सरकार ने डिजिटल मार्केटप्लेस पर निगरानी और सख्ती दोनों बढ़ा दी हैं।
किन कंपनियों को भेजा गया नोटिस?
CCPA ने जिन प्रमुख प्लेटफॉर्म्स से जवाब मांगा है, उनमें कई बड़े ऑनलाइन बिजनेस पोर्टल और B2B प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इनमें प्रमुख नाम हैं:
- IndiaMART
- Justdial
- Sigma-Aldrich India
- Dial4Trade
- ExportersIndia
प्राधिकरण ने इन कंपनियों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उनके प्लेटफॉर्म पर खतरनाक पदार्थों की बिक्री किस प्रक्रिया के तहत हो रही थी और क्या सभी कानूनी नियमों का पालन किया गया था।
किन पदार्थों पर सरकार की नजर?
जांच के दायरे में आए पदार्थ बेहद संवेदनशील माने जाते हैं और इनका इस्तेमाल विस्फोटक तैयार करने में किया जा सकता है। CCPA ने जिन उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री पर सवाल उठाए हैं, उनमें शामिल हैं: अमोनियम नाइट्रेट, गन पाउडर, पिक्रिक एसिड, पीईटीएन (PETN). ये सभी पदार्थ सामान्य परिस्थितियों में कड़े नियमन के तहत आते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इनका गलत हाथों में पहुंचना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
कंपनियों से मांगी गई अहम जानकारी
सरकार सिर्फ लिस्टिंग हटाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। CCPA ने कंपनियों से विस्तृत जानकारी भी मांगी है, जिसमें शामिल हैं: विक्रेताओं की पहचान और लाइसेंस डिटेल, खरीदार सत्यापन प्रक्रिया, बेचे गए उत्पादों की मात्रा, आयात संबंधी जानकारी, संबंधित विभागों से मिली मंजूरी. सरकार यह भी जानना चाहती है कि इन प्लेटफॉर्म्स ने ऐसे उत्पादों की बिक्री से पहले किस स्तर तक ड्यू डिलिजेंस किया।
क्यों बढ़ी सरकार की चिंता?
हाल के वर्षों में ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर केमिकल और इंडस्ट्रियल उत्पादों की बिक्री तेजी से बढ़ी है। कई बार ऐसे उत्पाद रिसर्च, इंडस्ट्री या कृषि उपयोग के लिए वैध रूप से खरीदे जाते हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि बिना सख्त निगरानी के यही उत्पाद गलत इस्तेमाल के लिए भी खरीदे जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमोनियम नाइट्रेट जैसे पदार्थ पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय घटनाओं में चर्चा का विषय रहे हैं। ऐसे में भारत सरकार अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म किसी भी तरह से अवैध गतिविधियों का माध्यम न बनें।
PESO के साथ मिलकर होगी कार्रवाई
इस मामले को गंभीर मानते हुए CCPA ने पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) के अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक भी की है। ई-कॉमर्स कंपनियों से मिले संदिग्ध विक्रेताओं के डेटा और रिकॉर्ड PESO के साथ साझा किए गए हैं।
अब PESO विस्फोटक अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों के तहत जांच आगे बढ़ाएगा। जरूरत पड़ने पर लाइसेंस रद्द करने, कानूनी नोटिस जारी करने और आपराधिक कार्रवाई जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
प्लेटफॉर्म्स ने हटानी शुरू कीं लिस्टिंग
सरकारी सख्ती के बाद कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई कंपनियों ने अपने पोर्टल से संदिग्ध रसायनों और विस्फोटक पदार्थों की लिस्टिंग हटाना शुरू कर दिया है। कुछ प्लेटफॉर्म्स ने नए सुरक्षा फिल्टर और विक्रेता सत्यापन प्रक्रिया को भी मजबूत किया है।
डिजिटल कॉमर्स सेक्टर के जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में सरकार ऑनलाइन मार्केटप्लेस के लिए और कड़े नियम लागू कर सकती है। इससे संवेदनशील उत्पादों की बिक्री पर निगरानी बढ़ेगी और कंपनियों की जवाबदेही भी तय होगी।
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