भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) की तैयारियां तेज कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार, एनएसई इस महीने दुनिया भर के 30 से अधिक बड़े संस्थागत निवेशकों के साथ बैठकें करेगा और उन्हें अपने आईपीओ, भविष्य की रणनीति और ग्रोथ प्लान के बारे में जानकारी देगा। माना जा रहा है कि अगले सप्ताह से इनवेस्टर मीटिंग्स शुरू हो सकती हैं, जबकि कंपनी की अक्टूबर 2026 में शेयर बाजार में लिस्टिंग होने की उम्मीद है।
इस साल के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल होगा NSE
इस साल भारतीय शेयर बाजार में दो बड़े मेगा आईपीओ चर्चा में हैं। पहला एनएसई (NSE) और दूसरा जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) का। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों आईपीओ निवेशकों के बीच जबरदस्त आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं।
एनएसई ने पिछले महीने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपने ड्राफ्ट दस्तावेज (Draft Papers) जमा किए थे। फिलहाल कंपनी नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रही है।
3.3 अरब डॉलर तक हो सकता है IPO
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनएसई का आईपीओ करीब 3.3 अरब डॉलर (लगभग ₹28,000 करोड़ से अधिक) का हो सकता है। इस ऑफर में कंपनी के मौजूदा शेयरधारक करीब 6% हिस्सेदारी बेच सकते हैं। यह पूरी तरह या मुख्य रूप से ऑफर फॉर सेल (OFS) आधारित इश्यू हो सकता है।
एनएसई के प्रवक्ता ने इस विषय पर कहा कि कंपनी ने नियामक के पास आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए हैं और फिलहाल इससे अधिक जानकारी साझा नहीं की जा सकती।
BSE से मुकाबला, लेकिन रेवेन्यू में बड़ी बढ़त
भारत के दूसरे प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज BSE का आईपीओ वर्ष 2017 में आया था। तब से अब तक बीएसई के शेयरों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है और इसकी कीमत 30 गुना से अधिक बढ़ चुकी है।
हालांकि हाल के वर्षों में बीएसई की ग्रोथ तेज रही है। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में बीएसई का रेवेन्यू 88% बढ़ा, जबकि इसी अवधि में एनएसई के रेवेन्यू में लगभग 3% की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका प्रमुख कारण डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर सेबी के सख्त नियम रहे हैं।
इसके बावजूद एनएसई का कुल रेवेन्यू अब भी बीएसई से लगभग छह गुना अधिक है, जिससे उसकी बाजार में मजबूत स्थिति बनी हुई है।
निवेशकों को बताएगा अगले 5 साल का ग्रोथ प्लान
इनवेस्टर रोडशो के दौरान एनएसई संभावित निवेशकों को अपने भविष्य के बिजनेस आउटलुक और विकास रणनीति से अवगत कराएगा। कंपनी का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में:
- कैश इक्विटी और इक्विटी फ्यूचर्स का सालाना कारोबार लगभग 12% की दर से बढ़ सकता है।
- इक्विटी ऑप्शंस ट्रेडिंग में औसतन 10% वार्षिक वृद्धि देखने को मिल सकती है।
- करेंसी डेरिवेटिव्स कारोबार में करीब 15% सालाना ग्रोथ की संभावना है।
बाजार में एनएसई की मजबूत पकड़
फिलहाल भारतीय शेयर बाजार में एनएसई का दबदबा कायम है।
- इक्विटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग में 100% हिस्सेदारी
- कैश मार्केट में लगभग 93% हिस्सेदारी
- इक्विटी ऑप्शंस सेगमेंट में करीब 75% हिस्सेदारी
यही मजबूत बाजार स्थिति निवेशकों के लिए एनएसई को एक आकर्षक निवेश अवसर बना सकती है।
एशिया के प्रमुख वित्तीय केंद्रों में होगा रोडशो
सूत्रों के अनुसार, एनएसई का वरिष्ठ प्रबंधन अगले सप्ताह से वैश्विक संस्थागत निवेशकों से मुलाकात शुरू करेगा। इसके तहत सिंगापुर, मलेशिया और हांगकांग जैसे प्रमुख वित्तीय केंद्रों में रोडशो आयोजित किए जा सकते हैं। इन बैठकों का उद्देश्य विदेशी निवेशकों को भारत के पूंजी बाजार की संभावनाओं और एनएसई की दीर्घकालिक विकास रणनीति से परिचित कराना है।
भारत में निवेशकों की संख्या बढ़ने से बड़ा अवसर
एनएसई का मानना है कि भारत में अभी भी विकसित देशों की तुलना में शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों की संख्या काफी कम है। वित्तीय जागरूकता, डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म और बढ़ती भागीदारी के कारण आने वाले वर्षों में शेयर ट्रेडिंग वॉल्यूम में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। यही कारण है कि कंपनी अपने आईपीओ को लेकर वैश्विक निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाने में जुटी हुई है।


