भारतीय रेलवे की प्रीमियम ट्रेनों में सफर करने वाले यात्री बेहतर सुविधा, साफ-सफाई और हाई-क्वालिटी कैटरिंग की उम्मीद करते हैं। राजधानी, शताब्दी, वंदे भारत और दूरंतो एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों का किराया सामान्य ट्रेनों की तुलना में काफी अधिक होता है। खासकर फर्स्ट एसी (1st AC) में यात्रा करने वाले यात्रियों को होटल जैसी सर्विस देने का दावा किया जाता है। लेकिन मुंबई से एर्नाकुलम जाने वाली दूरंतो एक्सप्रेस में सामने आई एक घटना ने रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों और वीडियो में दावा किया गया कि ट्रेन के फर्स्ट एसी कोच में इस्तेमाल होने वाली प्लेट और कटोरियों को ट्रेन के टॉयलेट में धोया गया। इतना ही नहीं, उन्हें कमोड के ऊपर रख दिया गया। घटना सामने आने के बाद IRCTC ने कार्रवाई करते हुए कैटरिंग ठेकेदार पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया है।
क्या है पूरा मामला?
RailMadad Reference No. 2026052408416
Serious hygiene and staff conduct issues onboard Train 12223 Duronto Express in First AC Coach H1 during lunch service on 24 May 26.
The catering attendant Mr Imtiaz was apparently unwell and not present that time. pic.twitter.com/iaMhwuG36w
— texan_mood (@TexanMood) May 26, 2026 यह मामला 24 मई 2026 का बताया जा रहा है। ट्रेन संख्या 12223 लोकमान्य तिलक टर्मिनल (मुंबई) से एर्नाकुलम के बीच चलने वाली दूरंतो एक्सप्रेस है। आरोप है कि ट्रेन के H-1 यानी फर्स्ट एसी कोच में कैटरिंग स्टाफ ने खाने में इस्तेमाल होने वाली क्रॉकरी को ट्रेन के टॉयलेट में धोया।
एक यात्री ने टॉयलेट के अंदर प्लेट और कटोरियां कमोड के ऊपर रखी देखीं। यात्री ने इसका वीडियो और फोटो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर दिया। यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गया और रेलवे प्रशासन तक मामला पहुंच गया।
सोशल मीडिया पर फूटा यात्रियों का गुस्सा
X यूजर “Texan Mood” (@texan_mood) ने पोस्ट करते हुए लिखा कि ट्रेन 12223 दूरंतो एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच में “सीरियस हाइजीन इश्यू” है। उन्होंने कैटरिंग स्टाफ के व्यवहार पर भी सवाल उठाए।
वीडियो में कथित तौर पर देखा गया कि वेटर प्लेटों को टॉयलेट में धोने के बाद उन्हें कमोड सीट के ऊपर रख रहा था। सोशल मीडिया पर कई यात्रियों ने इसे “शर्मनाक”, “खतरनाक” और “प्रीमियम किराए के साथ धोखा” बताया।
रेलवे से जुड़े मामलों पर नजर रखने वाले कई यूजर्स ने कहा कि यह सिर्फ एक ट्रेन की समस्या नहीं बल्कि रेलवे कैटरिंग सिस्टम की बड़ी लापरवाही का उदाहरण है।
IRCTC ने मानी ठेकेदार की लापरवाही
रेलवे सूत्रों के मुताबिक इस ट्रेन की कैटरिंग सेवा “मेसर्स वृंदावन फूड प्रोडक्ट्स” के पास है। यह कंपनी आरके ग्रुप से जुड़ी बताई जाती है, जो रेलवे की कई प्रीमियम ट्रेनों में खान-पान सेवा संभालती है।
मामला सामने आने के बाद इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) ने इसे गंभीर लापरवाही माना। रेलवे बोर्ड से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार कैटरिंग ठेकेदार पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया गया है।
इसके अलावा:
- ड्यूटी पर मौजूद संबंधित स्टाफ को तत्काल हटाने के निर्देश दिए गए।
- पेंट्री कार मैनेजर को सख्त चेतावनी जारी की गई।
- भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए निगरानी बढ़ाने को कहा गया।
प्रीमियम ट्रेनों की व्यवस्था पर उठे सवाल
दूरंतो एक्सप्रेस, राजधानी और वंदे भारत जैसी ट्रेनों को भारतीय रेलवे की “फ्लैगशिप” सेवाएं माना जाता है। इन ट्रेनों में यात्रियों से अधिक किराया लिया जाता है क्योंकि बेहतर भोजन दिया जाता है, साफ-सफाई का दावा किया जाता है, तेज और आरामदायक यात्रा मिलती है, कैटरिंग सर्विस शामिल होती है.
लेकिन जब फर्स्ट एसी जैसी हाई-क्लास सेवा में भी इस तरह की घटना सामने आती है, तो यात्रियों का भरोसा टूटता है। रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे ने पिछले कुछ वर्षों में ट्रेनों की स्पीड और टेक्नोलॉजी पर काफी निवेश किया है, लेकिन कैटरिंग और ऑनबोर्ड हाइजीन मॉनिटरिंग अब भी कमजोर कड़ी बनी हुई है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह पहली बार नहीं है जब रेलवे कैटरिंग को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले भी कई ट्रेनों में खराब खाना परोसने, एक्सपायरी सामान इस्तेमाल करने, गंदे किचन, और पेंट्री कार में साफ-सफाई की कमी जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि रेलवे समय-समय पर कार्रवाई करता है, लेकिन लगातार सामने आ रहे मामलों से यह सवाल उठ रहा है कि क्या निरीक्षण व्यवस्था वास्तव में प्रभावी है?
यात्रियों की सेहत के लिए कितना खतरनाक?
विशेषज्ञों के अनुसार टॉयलेट एरिया में इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुओं में बैक्टीरिया और संक्रमण का खतरा बहुत अधिक होता है। यदि खाने के बर्तन वहां धोए जाएं या रखे जाएं तो फूड पॉइजनिंग और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है।
खासकर लंबी दूरी की ट्रेनों में जहां हजारों यात्री भोजन करते हैं, वहां हाइजीन से जुड़ी छोटी लापरवाही भी बड़े स्वास्थ्य संकट में बदल सकती है।
रेलवे के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती
भारतीय रेलवे तेजी से खुद को आधुनिक बनाने की कोशिश कर रहा है। वंदे भारत, बुलेट ट्रेन और हाइड्रोजन ट्रेन जैसी परियोजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन यात्रियों का कहना है कि जब तक बेसिक हाइजीन और सर्विस क्वालिटी सुधरेगी नहीं, तब तक प्रीमियम अनुभव अधूरा रहेगा।
यह घटना रेलवे और IRCTC दोनों के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत मानी जा रही है।
निष्कर्ष
दूरंतो एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच में टॉयलेट के अंदर प्लेट धोने और कमोड पर रखने का मामला भारतीय रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के बाद IRCTC ने भले ही जुर्माना और कार्रवाई की हो, लेकिन इस घटना ने यात्रियों के भरोसे को झटका दिया है।
अब देखना होगा कि रेलवे सिर्फ जुर्माना लगाकर मामला खत्म करता है या फिर प्रीमियम ट्रेनों की कैटरिंग और हाइजीन मॉनिटरिंग सिस्टम में स्थायी सुधार भी करता है।
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