Highlights
- रास रिसॉर्ट्स एंड अपार्ट होटल्स ने BSE से डीलिस्टिंग प्रक्रिया शुरू की
- 28 मई से 26 जून 2026 तक ई-वोटिंग होगी
- शेयरधारकों की मंजूरी के बाद कंपनी शेयर बाजार से हट सकती है
- डीलिस्टिंग के बाद एक्सचेंज पर शेयरों की ट्रेडिंग बंद हो जाएगी
नई दिल्ली। होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर से जुड़ी कंपनी रास रिसॉर्ट्स एंड अपार्ट होटल्स लिमिटेड ने भारतीय शेयर बाजार से बाहर होने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अपने इक्विटी शेयरों को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) से स्वेच्छा से डीलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए कंपनी ने शेयरधारकों की मंजूरी लेने हेतु पोस्टल बैलेट और ई-वोटिंग प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया है।
कंपनी द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के मुताबिक, यह प्रस्ताव शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद लागू किया जाएगा। यदि डीलिस्टिंग को मंजूरी मिल जाती है, तो कंपनी के शेयर भविष्य में स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड नहीं होंगे। ऐसे में छोटे निवेशकों के लिए यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या होता है Voluntary Delisting?
जब कोई कंपनी खुद अपनी इच्छा से शेयर बाजार से हटने का फैसला करती है, तो उसे Voluntary Delisting कहा जाता है। इसके बाद कंपनी के शेयर स्टॉक एक्सचेंज पर खरीद-बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं रहते।
आमतौर पर कंपनियां यह कदम तब उठाती हैं जब कम ट्रेडिंग वॉल्यूम हो, सार्वजनिक शेयरधारकों की संख्या कम हो, प्रमोटर कंपनी पर पूरा नियंत्रण चाहते हों, लिस्टिंग कॉस्ट अधिक हो, भविष्य में निजी तौर पर कारोबार बढ़ाने की रणनीति हो. विशेषज्ञों के मुताबिक, कई छोटी और कम ट्रेड होने वाली कंपनियां हाल के वर्षों में डीलिस्टिंग का रास्ता अपना चुकी हैं।
कंपनी ने क्या कहा?
कंपनी ने BSE को दी गई जानकारी में बताया कि उसने 27 मई 2026 को समाचार पत्रों में नोटिस प्रकाशित कर शेयरधारकों से पोस्टल बैलेट के जरिए मतदान करने की अपील की है।
कंपनी सचिव कोमल बाफना के हस्ताक्षर वाली सूचना के अनुसार, ई-वोटिंग की प्रक्रिया NSDL प्लेटफॉर्म के माध्यम से पूरी की जाएगी। कंपनी ने कहा है कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित रखने के लिए सभी नियामकीय नियमों का पालन किया जाएगा।
निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण तारीखें
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कंपनी का नाम | रास रिसॉर्ट्स एंड अपार्ट होटल्स लिमिटेड |
| BSE स्क्रिप कोड | 507966 |
| प्रस्ताव | स्वैच्छिक डीलिस्टिंग |
| ई-वोटिंग शुरू | 28 मई 2026 सुबह 9 बजे |
| ई-वोटिंग समाप्त | 26 जून 2026 शाम 5 बजे |
| प्लेटफॉर्म | NSDL |
शेयरधारकों पर क्या असर पड़ेगा?
डीलिस्टिंग की स्थिति में सबसे बड़ा असर सार्वजनिक निवेशकों पर पड़ता है। यदि कंपनी स्टॉक एक्सचेंज से हट जाती है, तो निवेशक सामान्य तरीके से अपने शेयर बाजार में नहीं बेच पाएंगे। हालांकि SEBI के नियमों के तहत कंपनी को सार्वजनिक शेयरधारकों को Exit Opportunity देनी होती है। इसके तहत निवेशकों से शेयर खरीदने के लिए एक तय कीमत की पेशकश की जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को ऐसे मामलों में कंपनी की ऑफर प्राइस पर नजर रखनी चाहिए, प्रमोटर होल्डिंग की स्थिति समझनी चाहिए, कंपनी की वित्तीय स्थिति और भविष्य की रणनीति देखनी चाहिए, जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेना चाहिए.
होटल सेक्टर में क्या संकेत?
कोविड महामारी के बाद भारतीय होटल और ट्रैवल सेक्टर में रिकवरी देखने को मिली है। कई होटल कंपनियों ने पिछले दो वर्षों में बेहतर ऑक्यूपेंसी और रेवेन्यू दर्ज किया है। ऐसे समय में किसी होटल कंपनी का डीलिस्टिंग की ओर जाना बाजार में चर्चा का विषय बन गया है।
मार्केट एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कुछ छोटी कंपनियां अब सार्वजनिक बाजार में बने रहने की बजाय निजी ढांचे में काम करना ज्यादा आसान मान रही हैं। इससे compliance cost कम होती है और प्रमोटर्स को फैसले लेने में अधिक स्वतंत्रता मिलती है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
यदि किसी निवेशक के पास रास रिसॉर्ट्स एंड अपार्ट होटल्स लिमिटेड के शेयर हैं, तो उन्हें कंपनी के पोस्टल बैलेट नोटिस को ध्यान से पढ़ना चाहिए, ई-वोटिंग में भाग लेना चाहिए, SEBI के डीलिस्टिंग नियमों को समझना चाहिए, कंपनी द्वारा दी जाने वाली Exit Price पर नजर रखनी चाहिए. मार्केट जानकारों का कहना है कि डीलिस्टिंग प्रस्तावों में अक्सर शेयर कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए।
निष्कर्ष
रास रिसॉर्ट्स एंड अपार्ट होटल्स लिमिटेड का BSE से डीलिस्टिंग का फैसला छोटे निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। आने वाले एक महीने में ई-वोटिंग प्रक्रिया और शेयरधारकों की प्रतिक्रिया तय करेगी कि कंपनी वास्तव में शेयर बाजार से बाहर होगी या नहीं। फिलहाल निवेशकों की नजर कंपनी की आगे की घोषणा और संभावित एग्जिट प्राइस पर बनी हुई है।
Also Read:


