नई दिल्ली। सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ओएनजीसी (ONGC) के चौथी तिमाही के नतीजों ने निवेशकों को निराश कर दिया है। कमजोर उत्पादन वृद्धि, बढ़ती परिचालन लागत और सूखे कुओं (Dry Wells) के राइट-ऑफ के चलते कंपनी के शेयरों में 27 मई को भारी बिकवाली देखने को मिली। बाजार खुलने के बाद ONGC के शेयर करीब 4 फीसदी तक टूट गए।
हालांकि कंपनी ने मार्च तिमाही में मुनाफे और राजस्व में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की, लेकिन ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे। खासकर एक्सप्लोरेशन बिजनेस में बढ़ते खर्च और नए उत्पादन क्षेत्रों से सीमित आउटपुट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
तेल और गैस सेक्टर में ONGC को भारत की सबसे महत्वपूर्ण कंपनियों में गिना जाता है। देश में समुद्र और जमीन दोनों जगहों पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खोज करने वाली यह कंपनी लंबे समय से सरकार की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का बड़ा हिस्सा रही है। लेकिन हालिया तिमाही में कंपनी की चुनौतियां साफ दिखाई दीं।
Q4 में मामूली बढ़ा मुनाफा, लेकिन उम्मीदों से कमजोर
ONGC ने मार्च 2026 तिमाही में 6,649.97 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का मुनाफा 6,448.28 करोड़ रुपये था। यानी सालाना आधार पर लाभ में करीब 3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। कंपनी का ऑपरेशन से राजस्व भी हल्का बढ़कर 35,928.18 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 34,982.23 करोड़ रुपये था।
पहली नजर में आंकड़े स्थिर दिखाई देते हैं, लेकिन बाजार की चिंता कंपनी की कमाई की गुणवत्ता को लेकर है। विश्लेषकों का कहना है कि उत्पादन में मजबूत वृद्धि नहीं दिखी, जबकि लागत लगातार बढ़ती रही। इसी वजह से स्टॉक पर दबाव बढ़ा।
सूखे कुओं ने बढ़ाया दबाव
तेल और गैस एक्सप्लोरेशन बिजनेस में कंपनियां नए कुओं की खुदाई करती हैं। लेकिन कई बार भारी निवेश के बावजूद वहां व्यावसायिक स्तर पर तेल या गैस नहीं मिलती। ऐसे कुओं को “ड्राई वेल” कहा जाता है।
ONGC को इस तिमाही में ऐसे सूखे कुओं के कारण बड़ा राइट-ऑफ करना पड़ा। इसका सीधा असर कंपनी के मुनाफे पर पड़ा। ब्रोकरेज हाउस जेफ़रीज़ ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि हायर ऑपरेशनल खर्च और ड्राई वेल राइट-ऑफ की वजह से कंपनी का प्रदर्शन कमजोर रहा। यही कारण रहा कि नतीजों के तुरंत बाद शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्लोरेशन सेक्टर में यह जोखिम हमेशा बना रहता है। हालांकि ONGC जैसी कंपनियां लंबे समय के लिए निवेश करती हैं, लेकिन हर असफल कुआं कंपनी की लागत बढ़ा देता है।
पूरे साल का मुनाफा भी घटा
अगर पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो कंपनी का प्रदर्शन और कमजोर दिखाई देता है। ONGC का सालाना शुद्ध लाभ घटकर 32,894.02 करोड़ रुपये रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी ने 35,610.32 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। यानी पूरे साल में लाभ करीब 7.6 फीसदी गिरा।
तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव, उत्पादन लागत में वृद्धि और घरेलू गैस कीमतों पर दबाव जैसी वजहों ने कंपनी की आय को प्रभावित किया।
ब्रोकरेज फर्मों ने क्या कहा
घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने ONGC स्टॉक पर “न्यूट्रल” रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी की उत्पादन वृद्धि उम्मीद से कमजोर रही है।
विश्लेषकों के मुताबिक ONGC के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुराने तेल क्षेत्रों में उत्पादन बनाए रखना है। भारत में कई बड़े ऑयल फील्ड मैच्योर स्टेज में पहुंच चुके हैं, जहां उत्पादन बढ़ाना मुश्किल होता जा रहा है। हालांकि कंपनी नए प्रोजेक्ट्स और विदेशी साझेदारियों के जरिए भविष्य की ग्रोथ पर दांव लगा रही है।
BP के साथ बड़ा समझौता
कमजोर नतीजों के बीच ONGC ने एक बड़ी रणनीतिक घोषणा भी की है। कंपनी ने ब्रिटिश ऊर्जा कंपनी BP Plc की सहयोगी कंपनी BP Exploration Services India Limited के साथ समझौता किया है। इस साझेदारी का मकसद अरब सागर स्थित पश्चिमी ऑफशोर क्षेत्रों से तेल और गैस उत्पादन बढ़ाना है।
ONGC का अनुमान है कि अगले 10 वर्षों में इस समझौते से कच्चे तेल के उत्पादन में करीब 10.8 फीसदी की वृद्धि हो सकती है। मौजूदा 46.25 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन बढ़कर लगभग 51.26 MMT तक पहुंच सकता है।
वहीं प्राकृतिक गैस उत्पादन में करीब 31.5 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है। कंपनी का गैस उत्पादन 82.68 बिलियन क्यूबिक मीटर से बढ़कर 108.69 BCM तक पहुंच सकता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए यह साझेदारी ONGC के लिए लंबी अवधि में अहम साबित हो सकती है।
डिविडेंड का भी एलान
ONGC के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रति शेयर 1 रुपये के अंतिम लाभांश (Final Dividend) की सिफारिश भी की है। हालांकि कमजोर नतीजों के कारण निवेशकों का फोकस फिलहाल डिविडेंड से ज्यादा कंपनी की ग्रोथ और उत्पादन क्षमता पर बना हुआ है।
PSU कंपनियों में ONGC लंबे समय से डिविडेंड देने वाली मजबूत कंपनियों में गिनी जाती रही है। लेकिन अब निवेशक यह देखना चाहते हैं कि कंपनी भविष्य में उत्पादन और मुनाफे दोनों में स्थिर वृद्धि कैसे हासिल करती है।
आगे क्या रहेगा नजरिया
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक आने वाले महीनों में ONGC के शेयर की दिशा कई बड़े फैक्टर्स पर निर्भर करेगी। इनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें, घरेलू गैस प्राइसिंग, उत्पादन वृद्धि और नए प्रोजेक्ट्स की प्रगति शामिल हैं।
अगर BP के साथ साझेदारी से उत्पादन बढ़ाने की योजना सफल रहती है, तो लंबी अवधि में ONGC को फायदा मिल सकता है। लेकिन फिलहाल बाजार कंपनी के कमजोर Q4 प्रदर्शन और बढ़ती लागत को लेकर सतर्क नजर आ रहा है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की सलाह जरूर लें।
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