सोमवार की सुबह शेयर बाजार निवेशकों के लिए बड़ी राहत और जबरदस्त कमाई लेकर आई। वैश्विक तनाव कम होने के संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और रुपये की मजबूती ने भारतीय बाजार में ऐसा जोश भरा कि बाजार खुलते ही सेंसेक्स 800 अंक से ज्यादा उछल गया। निफ्टी 50 भी तेजी के साथ 24 हजार के करीब पहुंच गया। इस उछाल से निवेशकों की संपत्ति कुछ ही मिनटों में करीब ₹5 लाख करोड़ बढ़ गई।
सुबह 9:30 बजे बीएसई सेंसेक्स लगभग 832 अंक चढ़कर 76,247 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 करीब 226 अंकों की मजबूती के साथ 23,945.60 के आसपास पहुंच गया। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप बढ़कर लगभग ₹468 लाख करोड़ हो गया। बाजार की इस तेजी के पीछे सिर्फ एक वजह नहीं, बल्कि कई बड़े वैश्विक और घरेलू संकेत जिम्मेदार रहे। आइए समझते हैं कि आखिर सोमवार सुबह शेयर बाजार में इतनी बड़ी रैली क्यों आई।
अमेरिका-ईरान तनाव कम होने की उम्मीद से बढ़ा भरोसा
बीते कई हफ्तों से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों को डरा रखा था। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता ने तेल बाजार में उथल-पुथल मचा दी थी। लेकिन सोमवार को माहौल अचानक बदलता दिखा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर शांति समझौते के मसौदे पर काफी प्रगति हुई है। इस बयान ने निवेशकों की घबराहट को कम किया और दुनिया भर के बाजारों में राहत की लहर दौड़ गई। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल है। यहां तनाव बढ़ने का मतलब वैश्विक तेल सप्लाई पर खतरा माना जाता है। ऐसे में समझौते की संभावना ने बाजारों को मजबूत संकेत दिया।
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट ने भारत को दी राहत
भारतीय बाजार की तेजी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट रही। सोमवार सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 5 फीसदी टूटकर 98 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 6 फीसदी गिरकर 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलता है।
सस्ता कच्चा तेल कई स्तरों पर राहत देता है:
- पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव कम होता है
- सरकार का आयात बिल घटता है
- महंगाई नियंत्रित रखने में मदद मिलती है
- रुपये पर दबाव कम होता है
- कंपनियों की लागत घटती है
यही वजह है कि तेल कीमतों में गिरावट आते ही बैंकिंग, ऑटो, पेंट, एविएशन और FMCG शेयरों में खरीदारी बढ़ गई।
वैश्विक बाजारों की मजबूत शुरुआत का असर
सोमवार को सिर्फ भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली। जापान का निक्केई इंडेक्स 3 फीसदी से ज्यादा चढ़कर पहली बार 65,000 के स्तर के पार निकल गया। चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स और ताइवान बाजार में भी मजबूती रही। अमेरिकी डाउ जोंस फ्यूचर्स भी करीब 1 फीसदी ऊपर ट्रेड कर रहे थे।
जब वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की भावना बढ़ती है, तो उसका असर भारतीय बाजार पर भी तेजी के रूप में दिखता है। विदेशी निवेशक ऐसे माहौल में इक्विटी बाजारों में पैसा लगाने के लिए ज्यादा उत्साहित होते हैं।
रुपये की रिकवरी ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा
पिछले सप्ताह भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया था। लेकिन सोमवार को रुपये में शानदार वापसी देखने को मिली।
भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले करीब 0.37 फीसदी मजबूत होकर 95.34 पर खुली। इसकी बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और भारतीय रिजर्व बैंक की सक्रियता मानी जा रही है। रुपये की मजबूती से विदेशी निवेशकों को यह संकेत मिलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी स्थिर स्थिति में है। इससे विदेशी पूंजी के बहिर्वाह का दबाव कुछ कम हो सकता है।
बॉन्ड यील्ड गिरने से शेयर बाजार को मिला सपोर्ट
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट भी बाजार की तेजी का अहम कारण बनी। पिछले सप्ताह उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड घटकर 4.558 फीसदी पर आ गई।
जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित बॉन्ड में लगाना पसंद करते हैं। लेकिन यील्ड घटने पर इक्विटी बाजार फिर आकर्षक लगने लगता है।
यही कारण है कि सोमवार को आईटी, बैंकिंग और मेटल सेक्टर में अच्छी खरीदारी देखने को मिली।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा तेजी रही?
सुबह के कारोबार में कई सेक्टरों में मजबूत खरीदारी दिखी।
बैंकिंग शेयरों में तेजी
HDFC Bank, ICICI Bank और SBI जैसे बड़े बैंकिंग शेयरों में अच्छी मजबूती देखने को मिली। विदेशी निवेशकों की वापसी की उम्मीद से बैंकिंग सेक्टर को सपोर्ट मिला।
ऑटो शेयर चमके
तेल कीमतों में गिरावट से ऑटो सेक्टर को राहत मिली। मारुति, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में तेजी रही।
एविएशन कंपनियों को फायदा
एयरलाइन कंपनियों के लिए एविएशन फ्यूल बड़ी लागत होती है। ऐसे में कच्चा तेल सस्ता होने से इंडिगो और स्पाइसजेट जैसे शेयरों में खरीदारी देखी गई।
आईटी शेयरों को सपोर्ट
अमेरिकी बाजार मजबूत रहने से आईटी सेक्टर में भी सकारात्मक माहौल बना।
फिर भी बाजार के सामने बड़ी चिंता बनी हुई है
हालांकि सोमवार की तेजी ने निवेशकों का उत्साह बढ़ाया है, लेकिन बाजार के सामने अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। सबसे बड़ी चिंता विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली है। मई 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से भारी निकासी की है।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वी. के. विजयकुमार के अनुसार, 23 मई तक 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की कुल बिकवाली ₹2.22 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी है। यह पिछले साल 2025 की कुल बिकवाली से भी ज्यादा है। इसका मतलब यह है कि बाजार में तेजी के बावजूद विदेशी निवेशक अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं।
आगे बाजार की दिशा क्या होगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक इन कारकों पर निर्भर करेगी अमेरिका-ईरान वार्ता का अंतिम परिणाम, कच्चे तेल की कीमतों का ट्रेंड, अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, भारतीय रुपये की स्थिति अगर कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं और वैश्विक तनाव और कम होता है, तो भारतीय बाजार में तेजी जारी रह सकती है। हालांकि, निवेशकों को उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना होगा क्योंकि वैश्विक हालात अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुए हैं।
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