Highlights
- इंडोनेशिया की दुर्लभ नस्ल ‘आयाम सीमानी’ दुनिया का सबसे महंगा मुर्गा मानी जाती है
- एक बेहतरीन नस्ल की कीमत 4 से 6 लाख रुपये तक पहुंच सकती है
- शरीर के अंदर और बाहर पूरी तरह काला होने की वजह से दुनियाभर में चर्चा
- भारत में भी तेजी से बढ़ रही फार्मिंग और निवेशकों की दिलचस्पी
नई दिल्ली। अगर आपसे कहा जाए कि एक मुर्गे की कीमत लग्जरी बाइक या 4 तोला सोने जितनी हो सकती है, तो शायद आपको यकीन न हो। लेकिन दुनिया में एक ऐसी दुर्लभ मुर्गे की नस्ल मौजूद है जिसकी कीमत लाखों रुपये तक पहुंच चुकी है। इंडोनेशिया की मशहूर नस्ल ‘आयाम सीमानी’ (Ayam Cemani) आज पोल्ट्री दुनिया की सबसे महंगी और रहस्यमयी प्रजातियों में गिनी जाती है।
यह मुर्गा सिर्फ अपने दाम की वजह से ही नहीं, बल्कि अपने अनोखे रंग और दुर्लभ जेनेटिक गुणों के कारण भी दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसके पंखों से लेकर मांस, त्वचा, आंखें, चोंच, हड्डियां और अंदरूनी अंग तक गहरे काले रंग के होते हैं। यही वजह है कि इसे “ब्लैक गोल्ड चिकन” और “लैंबोर्गिनी ऑफ चिकन्स” जैसे नाम भी दिए जाते हैं।
आखिर क्यों पूरी तरह काला होता है यह मुर्गा?
आयाम सीमानी में ‘फाइब्रोमेलानोसिस’ (Fibromelanosis) नाम का दुर्लभ जेनेटिक म्यूटेशन पाया जाता है। इस कारण इसके शरीर में सामान्य मुर्गों की तुलना में कई गुना ज्यादा मेलेनिन बनता है। मेलेनिन वही तत्व है जो त्वचा और बालों का रंग तय करता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस जेनेटिक बदलाव के कारण इसका लगभग पूरा शरीर काले रंग में बदल जाता है। हालांकि इसके खून का रंग पूरी तरह काला नहीं होता, लेकिन बाकी शरीर गहरे काले रंग का दिखाई देता है। यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है।
दुनियाभर में बहुत कम नस्लों में ऐसा जेनेटिक पैटर्न देखने को मिलता है। इसी वजह से यह मुर्गा बेहद दुर्लभ माना जाता है और इसकी कीमत आसमान छूती है।
एक अंडे की कीमत सुनकर चौंक जाएंगे
अंतरराष्ट्रीय बाजार में आयाम सीमानी के एक अंडे की कीमत 1,000 से 1,500 रुपये तक बताई जाती है। वहीं अच्छी क्वालिटी वाले एक जोड़े की कीमत लाखों रुपये तक पहुंच जाती है। कई देशों में शुद्ध नस्ल वाले एक मुर्गे की कीमत 5,000 से 6,000 डॉलर तक दर्ज की गई है।
भारत में भी इसकी कीमत सामान्य पोल्ट्री नस्लों से कई गुना ज्यादा है। बड़े फार्म हाउस और विदेशी नस्लों की ब्रीडिंग करने वाले किसान इसके चूजों और ब्रीडिंग पेयर्स को लाखों रुपये में बेच रहे हैं।
इतनी महंगी होने के पीछे क्या हैं कारण?
1. बेहद दुर्लभ नस्ल
आयाम सीमानी दुनिया में सीमित संख्या में पाई जाती है। इसकी ब्रीडिंग आसान नहीं मानी जाती। यह कम अंडे देती है और हैचिंग रेट भी कम होता है। यही वजह है कि इसकी संख्या तेजी से नहीं बढ़ पाती।
2. हेल्थ इंडस्ट्री में बढ़ती मांग
कई देशों में इसे हाई-प्रोटीन और लो-फैट मीट माना जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार इसके मांस में सामान्य चिकन की तुलना में ज्यादा प्रोटीन और कम फैट पाया जाता है।
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग इसे प्रीमियम फूड कैटेगरी में रखते हैं। कुछ एशियाई देशों में इसे औषधीय गुणों वाला भोजन भी माना जाता है।
3. सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताएं
इंडोनेशिया में इस मुर्गे को बेहद शुभ माना जाता है। स्थानीय परंपराओं और धार्मिक अनुष्ठानों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। कई लोग मानते हैं कि यह सौभाग्य और समृद्धि लाता है।
इसी सांस्कृतिक महत्व ने इसकी मांग और कीमत दोनों को बढ़ाया है।
4. स्टेटस सिंबल बन चुका है यह मुर्गा
दुनिया के कई अमीर लोग और एक्सोटिक बर्ड कलेक्टर्स इसे शौक और स्टेटस सिंबल के तौर पर पालते हैं। जिस तरह लोग महंगी विदेशी कारें या दुर्लभ पालतू जानवर रखते हैं, उसी तरह आयाम सीमानी भी लग्जरी लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है।
भारत में क्यों बढ़ रहा है इसका कारोबार?
पिछले कुछ वर्षों में भारत में विदेशी और दुर्लभ पोल्ट्री नस्लों का बाजार तेजी से बढ़ा है। खासतौर पर सोशल मीडिया और यूट्यूब के जरिए लोगों में एक्सोटिक फार्मिंग का क्रेज बढ़ा है।
अब कई भारतीय फार्म हाउस आयाम सीमानी की ब्रीडिंग कर रहे हैं। हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब और दक्षिण भारत के कई बड़े पोल्ट्री फार्म इस नस्ल को कमर्शियल स्तर पर तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में हाई-इनकम वर्ग और हेल्थ फूड मार्केट बढ़ने से इस तरह की प्रीमियम नस्लों की मांग भी बढ़ रही है। कई किसान इसे कम संख्या में पालकर ज्यादा मुनाफा कमाने की रणनीति अपना रहे हैं।
क्या सच में इसमें निवेश फायदेमंद है?
पोल्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक आयाम सीमानी की फार्मिंग सामान्य ब्रॉयलर फार्मिंग जितनी आसान नहीं है। इसकी देखभाल, शुद्ध नस्ल बनाए रखना और सही तापमान जैसी कई चुनौतियां होती हैं।
हालांकि मांग बढ़ने के कारण इसमें अच्छा मुनाफा भी संभव है। लेकिन बिना सही जानकारी और अनुभव के इसमें निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।
भारत में कई लोग सिर्फ सोशल मीडिया ट्रेंड देखकर इसमें पैसा लगा रहे हैं, जबकि इसकी ब्रीडिंग साइंस काफी जटिल मानी जाती है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह लेकर ही निवेश करना बेहतर माना जाता है।
क्यों कहा जाता है ‘मुर्गियों की लैंबोर्गिनी’?
आयाम सीमानी का शाही काला रंग, दुर्लभता और ऊंची कीमत इसे बाकी पोल्ट्री नस्लों से बिल्कुल अलग बनाती है। यही कारण है कि इसे “मुर्गियों की लैंबोर्गिनी” कहा जाता है।
दुनिया में बहुत कम लोग इसे खरीद पाते हैं और यही इसकी एक्सक्लूसिव पहचान बन चुकी है। आने वाले समय में भारत में भी इसका बाजार और तेजी से बढ़ सकता है, खासकर उन लोगों के बीच जो एक्सोटिक फार्मिंग और प्रीमियम पोल्ट्री बिजनेस में दिलचस्पी रखते हैं।
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