ईरान-इजरायल युद्ध के बाद देश में पेट्रोल, डीजल और गै की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। इसका असर अब भारतीय रेलवे की कैटरिंग सर्विस पर भी पड़ सकता है। ट्रेनों में खाना उपलब्ध कराने वाले ठेकेदारों ने इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) से खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाने की मांग की है। अगर यह मांग मान ली जाती है तो आने वाले समय में यात्रियों को ट्रेन में मिलने वाला खाना महंगा पड़ सकता है।
रेलवे कैटरर्स ने IRCTC को लिखा पत्र
ट्रेनों में खानपान सेवा देने वाले ठेकेदारों के संगठन इंडियन रेलवे मोबाइल कैटरर्स एसोसिएशन (IRMCA) ने IRCTC को एक पत्र भेजा है। संगठन के अध्यक्ष शरण बिहारी अग्रवाल ने इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। बताया जा रहा है कि उनकी कंपनी आरके बिजनेस ग्रुप राजधानी, शताब्दी और वंदे भारत जैसी कई प्रीमियम ट्रेनों में पेंट्री सेवाएं संचालित करती है।
पत्र में कहा गया है कि रेलवे ने खाने-पीने की वस्तुओं के दाम साल 2019 में तय किए थे। लेकिन उसके बाद से खाद्य सामग्री, गैस सिलेंडर, डीजल और कर्मचारियों की सैलरी में भारी बढ़ोतरी हो चुकी है। संगठन का दावा है कि कई चीजों की लागत 250 फीसदी तक बढ़ गई है।
आखिर क्या मांग कर रहे हैं ठेकेदार?
IRMCA ने IRCTC से मांग की है कि ट्रेनों में बिकने वाले खाने और पेय पदार्थों के रेट तत्काल प्रभाव से संशोधित किए जाएं। उनका कहना है कि यदि कीमतें नहीं बढ़ाई गईं तो गुणवत्ता बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा।
कैटरर्स का कहना है कि कच्चे माल की कीमत तेजी से बढ़ी है, गैस और ईंधन महंगा हुआ है, कर्मचारियों का खर्च बढ़ गया है, पुराने रेट पर संचालन घाटे का सौदा बनता जा रहा है.
यात्रियों पर कितना पड़ेगा असर?
भारतीय रेलवे में दो तरह की कैटरिंग व्यवस्था होती है।
1. प्री-पेड फूड सर्विस
राजधानी, शताब्दी और वंदे भारत जैसी ट्रेनों में टिकट के साथ ही खाने का शुल्क लिया जाता है। यानी यात्री पहले से भोजन का भुगतान कर देते हैं।
2. पोस्ट-पेड फूड सर्विस
सामान्य ट्रेनों में यात्री खाना लेने के बाद भुगतान करते हैं। इसमें चाय, नाश्ता, थाली और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं।
कैटरर्स ने दोनों ही श्रेणियों में रेट बढ़ाने की मांग की है। यदि रेलवे इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है तो ट्रेन में मिलने वाली चाय, कॉफी, स्नैक्स और भोजन की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
क्या रेलवे तुरंत बढ़ा सकता है दाम?
रेलवे से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक पेंट्री कार के टेंडर “फिक्स रेट सप्लाई” मॉडल पर दिए जाते हैं। यानी जिस दर पर टेंडर मिला, उसी दर पर तय अवधि तक सेवा देनी होती है।
रेलवे के नियमों के अनुसार: टेंडर अवधि के बीच में कीमतें बढ़ाने का प्रावधान नहीं होता, पुराने कॉन्ट्रैक्ट पर पुराने रेट ही लागू रहते हैं, नए रेट केवल भविष्य के टेंडर में लागू हो सकते हैं. इसका मतलब है कि मौजूदा ठेकेदारों के लिए तुरंत कीमत बढ़ाना आसान नहीं होगा।
घाटा होने पर क्या कर सकते हैं ठेकेदार?
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हर टेंडर में “एग्जिट क्लॉज” मौजूद होता है। यदि किसी कंपनी को लगता है कि मौजूदा रेट पर काम करना संभव नहीं है तो वह अनुबंध छोड़ सकती है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि प्रीमियम ट्रेनों की कैटरिंग बेहद लाभदायक मानी जाती है, इसलिए कंपनियां तुरंत पीछे हटने का जोखिम कम ही लेंगी।
लगातार बढ़ रही है महंगाई
देश में पिछले कुछ समय से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण भारत का आयात बिल बढ़ा है। इसका असर ट्रांसपोर्ट, होटल, रेस्टोरेंट और खाद्य सेवाओं पर दिखाई देने लगा है। रेलवे कैटरिंग सेक्टर भी अब इसी दबाव का हवाला देकर कीमतों में बढ़ोतरी की मांग कर रहा है।
क्या यात्रियों को तैयार रहना चाहिए?
फिलहाल रेलवे या IRCTC की तरफ से किसी तरह की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन यदि ईंधन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो आने वाले महीनों में ट्रेन यात्रियों को महंगा खाना मिल सकता है।
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