प्रधानमंत्री Narendra Modi और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पीएम मोदी इटली की प्रधानमंत्री को मशहूर मेलोडी चॉकलेट गिफ्ट करते दिखाई दे रहे हैं। खास बात यह है कि यह वीडियो खुद मेलोनी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसके बाद एक बार फिर “#Melodi” इंटरनेट पर ट्रेंड करने लगा।
भारत में दशकों से लोकप्रिय रही मेलोडी चॉकलेट को बनाने वाली कंपनी Parle Products है। यही कंपनी पारले-जी, मोनेको, क्रैकजैक, हाइड एंड सीक और मैंगो बाइट जैसे कई लोकप्रिय ब्रांड भी बनाती है। लेकिन बहुत से लोग यह नहीं जानते कि इस कंपनी की शुरुआत कैसे हुई थी और आज इसका मालिक कौन है।
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— Giorgia Meloni (@GiorgiaMeloni) May 20, 2026 1929 में हुई थी पारले की शुरुआत
पारले प्रोडक्ट्स की जड़ें “हाउस ऑफ पारले” नाम की कंपनी से जुड़ी हैं, जिसकी स्थापना साल 1929 में मोहनलाल दयाल चौहान ने की थी। उस समय भारत में विदेशी कंपनियों का दबदबा था और भारतीय ब्रांड बहुत कम थे। ऐसे दौर में चौहान परिवार ने भारतीय कन्फेक्शनरी बाजार में कदम रखा।
कंपनी की पहली फैक्ट्री मुंबई के विले पार्ले इलाके में शुरू की गई थी। इसी इलाके के नाम पर कंपनी का नाम “पारले” पड़ा। शुरुआत में कंपनी सिर्फ कैंडी और मिठाइयां बनाती थी। उस फैक्ट्री में केवल 12 लोग काम करते थे और इनमें ज्यादातर परिवार के सदस्य ही थे। कोई मशीन संभालता था, कोई मैनेजमेंट और कोई कन्फेक्शनरी बनाने का काम करता था।
जर्मनी से सीखकर आए थे मोहनलाल चौहान
मोहनलाल चौहान कन्फेक्शनरी बनाने की तकनीक सीखने के लिए जर्मनी गए थे। वहां से लौटते समय वे मशीनरी भी साथ लेकर आए थे। बताया जाता है कि उस समय उन्होंने लगभग 60 हजार रुपये खर्च करके मशीनें इंपोर्ट की थीं, जो उस दौर में बहुत बड़ी रकम मानी जाती थी।
भारत लौटने के बाद उन्होंने भारतीय स्वाद के हिसाब से कैंडी और बिस्कुट बनाना शुरू किया। कंपनी का पहला प्रोडक्ट ऑरेंज कैंडी थी, जिसे लोगों ने काफी पसंद किया।
पारले-जी ने बदल दी कंपनी की किस्मत
साल 1938 में कंपनी ने अपना पहला बिस्कुट “Parle Gluco” लॉन्च किया। यह बिस्कुट इतना लोकप्रिय हुआ कि लगातार कई वर्षों तक भारत का सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्कुट बना रहा। बाद में इसका नाम बदलकर Parle-G कर दिया गया। पारले-जी में “G” का मतलब ग्लूकोज बताया जाता है। 1980 के दशक में कंपनी ने इसकी ब्रांडिंग और पैकेजिंग में बड़े बदलाव किए। साल 2001 में पहली बार पारले-जी पेपर पैकिंग से निकलकर प्लास्टिक रैपर पैक में आया।
भारत के गांवों से लेकर शहरों तक पारले-जी ने अपनी मजबूत पहचान बनाई और आज भी यह देश के सबसे लोकप्रिय बिस्कुट ब्रांड्स में गिना जाता है।
क्रैकजैक, मेलोडी और मैंगो बाइट ने दिलाई नई पहचान
कंपनी ने समय के साथ अपने पोर्टफोलियो को लगातार बढ़ाया। साल 1972 में Krackjack लॉन्च किया गया, जिसने स्वीट और सॉल्टी टेस्ट के कारण बाजार में अलग पहचान बनाई। इसके बाद साल 1983 में कंपनी ने मशहूर चॉकलेटी कैंडी Melody लॉन्च की। “मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?” वाला इसका विज्ञापन भारत के सबसे चर्चित एड कैंपेन में शामिल रहा।
फिर 1986 में कंपनी Mango Bite लेकर आई, जिसे भारत की शुरुआती मैंगो कैंडीज में गिना जाता है। इसके बाद Hide & Seek, 20-20 Cookies और Parle Platina जैसे कई ब्रांड लॉन्च किए गए।
आज कौन संभाल रहा है पारले प्रोडक्ट्स?
समय के साथ “हाउस ऑफ पारले” तीन अलग-अलग कंपनियों में बंट गया: Parle Products, Parle Agro, Bisleri International हालांकि तीनों कंपनियों का संबंध चौहान परिवार से ही है। मेलोडी ब्रांड फिलहाल पारले प्रोडक्ट्स के पास है। कंपनी को विजय चौहान, शरद चौहान और राज चौहान मैनेज करते हैं।
कितनी है चौहान परिवार की नेटवर्थ?
फोर्ब्स की रिपोर्ट्स के अनुसार विजय चौहान और उनके परिवार की कुल नेटवर्थ करीब 8.6 अरब डॉलर बताई जाती है। भारतीय रुपये में यह रकम लगभग 70 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है। चौहान परिवार भारत के बड़े बिजनेस परिवारों में शामिल है।
कितनी बड़ी है पारले प्रोडक्ट्स?
फाइनेंशियल ईयर 2025 में पारले प्रोडक्ट्स का रेवेन्यू लगभग 15,568.49 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की तुलना में करीब 8.5% ज्यादा था। इसी दौरान कंपनी का प्रॉफिट करीब 979.53 करोड़ रुपये रहा।
भारत के कन्फेक्शनरी बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी लगभग 15 फीसदी मानी जाती है। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार कंपनी की कुल वैल्यू 8 से 10 अरब डॉलर के बीच आंकी जाती है।
हालांकि कंपनी अलग-अलग कैंडी ब्रांड्स की कमाई सार्वजनिक नहीं करती, लेकिन माना जाता है कि कन्फेक्शनरी डिवीजन में मेलोडी का योगदान सबसे ज्यादा है।
मोदी-मेलोनी वीडियो के बाद फिर चर्चा में आई मेलोडी
पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी के वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर मेलोडी चॉकलेट को लेकर जबरदस्त चर्चा शुरू हो गई है। कई यूजर्स ने पुराने “#Melodi” मीम्स और वीडियो भी शेयर किए। इससे पारले के इस पुराने ब्रांड को एक बार फिर नई चर्चा मिल गई है।
भारत में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने बचपन में मेलोडी, मैंगो बाइट या पारले-जी का स्वाद न चखा हो। यही वजह है कि पारले सिर्फ एक कंपनी नहीं बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं की यादों का हिस्सा बन चुकी है।
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