ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहा है। भारत में बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दाम, रुपये की कमजोरी और बढ़ते आयात बिल के बीच कंपनियों की वर्क कल्चर पॉलिसी भी बदलने लगी है। इसी बीच देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC Bank ने अपने कर्मचारियों के लिए सीमित स्तर पर वर्क फ्रॉम होम (WFH) की सुविधा शुरू कर दी है। दूसरी तरफ Zoho Corporation के फाउंडर Sridhar Vembu ने साफ कहा है कि उनकी कंपनी फिलहाल WFH मॉडल अपनाने के पक्ष में नहीं है।
क्यों बढ़ रही है WFH की चर्चा?
हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होने से भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक तेल महंगा होने से चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) बढ़ता है, डॉलर की मांग बढ़ती है, रुपये पर दबाव आता है, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ती है, महंगाई में तेजी आती है. इसी स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कंपनियों और कर्मचारियों से ईंधन बचाने के लिए वर्क फ्रॉम होम और हाइब्रिड मॉडल को बढ़ावा देने की अपील की थी।
HDFC Bank ने क्या फैसला लिया?
HDFC Bank ने अपने कुछ कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन घर से काम करने की अनुमति दी है। बैंक ने इसे फिलहाल 30 दिनों के लिए लागू किया है, जिसके बाद इसकी समीक्षा की जाएगी।
बैंक की ओर से मिली जानकारी के अनुसार यह सुविधा मुख्य रूप से: बिजनेस एनेबलिंग फंक्शंस, कॉरपोरेट एनेबलिंग फंक्शंस से जुड़े कर्मचारियों को दी गई है।
किन विभागों को मिला फायदा?
बिजनेस एनेबलिंग फंक्शंस
इनमें शामिल हैं: ट्रेजरी ऑपरेशंस, क्रेडिट अंडरराइटिंग और रिस्क, ट्रांजैक्शन बुकिंग, डिजिटल बैंकिंग, आईटी सर्विसेज
कॉरपोरेट एनेबलिंग फंक्शंस
इन विभागों में: ह्यूमन रिसोर्सेज, फाइनेंस एंड अकाउंट्स, लीगल एंड कंप्लायंस, सेक्रेटेरियल और बोर्ड ऑपरेशंस शामिल हैं। हालांकि बैंक ने साफ किया है कि उसकी सभी शाखाएं और ग्राहक सेवा केंद्र पहले की तरह सामान्य रूप से काम करते रहेंगे। बैंक के देशभर में 2 लाख से ज्यादा कर्मचारी हैं, इसलिए यह फैसला बड़े स्तर पर ईंधन खपत कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दूसरे बैंक भी अपना रहे हैं Hybrid Model
WFH और Hybrid मॉडल अब सिर्फ आईटी कंपनियों तक सीमित नहीं रह गया है। कई बड़े निजी बैंक पहले से ही इस दिशा में काम कर रहे हैं।
Axis Bank
इस बैंक में 2021 से ही नॉन-कस्टमर-फेसिंग रोल्स के लिए हाइब्रिड मॉडल लागू है। कई कर्मचारियों को सप्ताह में केवल दो दिन ऑफिस आना पड़ता है।
IndusInd Bank
हाल में इस बैंक ने भी कुछ कर्मचारियों के लिए हाइब्रिड वर्किंग मॉडल लागू किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर तेल संकट लंबे समय तक बना रहा तो आने वाले महीनों में और कंपनियां भी इसी तरह की व्यवस्था लागू कर सकती हैं।
पेट्रोल-डीजल महंगा होने का क्या असर?
सरकारी तेल कंपनियों ने हाल में दो चरणों में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब 4 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाए हैं। इसका असर सिर्फ वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहेगा।
आम लोगों पर असर
कैब और ऑटो किराया बढ़ सकता है, बस और ट्रांसपोर्ट महंगे हो सकते हैं, सब्जियों और राशन की ढुलाई लागत बढ़ेगी, ऑनलाइन डिलीवरी सेवाएं महंगी हो सकती हैं, कंपनियों का ऑपरेटिंग खर्च बढ़ सकता है. यही वजह है कि सरकार और कंपनियां दोनों ईंधन बचत के विकल्प तलाश रही हैं।
Zoho के श्रीधर वेम्बू ने क्यों किया WFH से इनकार?
Ultimately, after a lot of people inside weighed in on my X post, we decided not to expand WFH because the productivity of face to face problem solving is much higher in R&D. I have experienced this in my own development team – issues take longer to resolve when you are not…
— Sridhar Vembu (@svembu) May 18, 2026 जहां कई कंपनियां हाइब्रिड मॉडल अपना रही हैं, वहीं Zoho Corporation के सीईओ Sridhar Vembu ने अलग राय रखी है। उन्होंने कहा कि कंपनी ने हाल में अपनी WFH नीति की आंतरिक समीक्षा की थी। समीक्षा के बाद कंपनी इस निष्कर्ष पर पहुंची कि खासकर रिसर्च और डेवलपमेंट जैसे कामों में आमने-सामने बैठकर काम करने से बेहतर नतीजे मिलते हैं।
उनके मुताबिक: टीम सहयोग बेहतर होता है, तेजी से समस्या समाधान संभव होता है, इनोवेशन बढ़ता है, युवा कर्मचारियों को सीखने में मदद मिलती है उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी तेल बचाने के लिए अन्य विकल्पों पर काम कर रही है।
Zoho किन विकल्पों पर कर रही काम?
Zoho Corporation पहले से ही सोलर एनर्जी में निवेश कर चुकी है। अब कंपनी: इलेक्ट्रिक बस, इलेक्ट्रिक कुकिंग, वैकल्पिक ऊर्जा जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है ताकि ईंधन की खपत कम की जा सके।
क्या भारत में फिर बढ़ेगा Work From Home ट्रेंड?
कोविड के बाद कई कंपनियों ने कर्मचारियों को वापस ऑफिस बुलाना शुरू कर दिया था। लेकिन मौजूदा तेल संकट और बढ़ती ट्रांसपोर्ट लागत ने कंपनियों को फिर से Hybrid मॉडल की तरफ सोचने पर मजबूर कर दिया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि: आईटी, बैंकिंग, फिनटेक, बैक ऑफिस ऑपरेशंस. जैसे सेक्टरों में Hybrid मॉडल आगे और बढ़ सकता है। हालांकि मैन्युफैक्चरिंग, ब्रांच बैंकिंग और ग्राहक सेवा जैसे क्षेत्रों में पूरी तरह WFH संभव नहीं माना जा रहा।
निष्कर्ष
तेल संकट और बढ़ती महंगाई के बीच भारत में वर्क कल्चर को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक तरफ HDFC Bank जैसे बड़े संस्थान ईंधन बचत और लागत नियंत्रण के लिए Hybrid मॉडल अपना रहे हैं, वहीं Sridhar Vembu जैसे उद्योगपति मानते हैं कि ऑफिस में बैठकर काम करने से बेहतर उत्पादकता मिलती है।
आने वाले समय में कंपनियां अपनी जरूरत और सेक्टर के हिसाब से Hybrid और Office मॉडल के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती दिख सकती हैं।
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