भारतीय रुपये में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है। डॉलर के मुकाबले रुपया 97 के करीब पहुंच गया है, जिससे आम लोगों से लेकर सरकार और बाजार तक चिंता में हैं। आयात महंगा होने, महंगाई बढ़ने और विदेशी निवेश निकलने जैसी आशंकाओं ने अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। लेकिन इस पूरे संकट के बीच एक सेक्टर ऐसा भी है जिसे रुपये की गिरावट से बड़ा फायदा मिल रहा है — भारत की आईटी इंडस्ट्री।
इसी वजह से Infosys, Wipro, Tech Mahindra और Tata Consultancy Services जैसी कंपनियों के शेयरों में लगातार तेजी देखी जा रही है। इन कंपनियों के प्रमोटर्स और बड़े शेयरधारकों में शामिल Narayana Murthy, Azim Premji और Anand Mahindra जैसे उद्योगपतियों की संपत्ति में भी तेजी आ सकती है।
आखिर रुपये की गिरावट से आईटी कंपनियों को फायदा कैसे होता है?
इस सवाल का जवाब समझना बेहद आसान है। भारत की बड़ी आईटी कंपनियां अपना ज्यादातर कारोबार अमेरिका और यूरोप से करती हैं। वहां से उन्हें पेमेंट डॉलर में मिलता है, जबकि उनका बड़ा खर्च भारत में रुपये में होता है। मान लीजिए किसी आईटी कंपनी को अमेरिका से 100 डॉलर की पेमेंट मिलती है। अगर डॉलर का भाव ₹83 हो, तो कंपनी को ₹8,300 मिलेंगे। लेकिन अगर डॉलर बढ़कर ₹97 पहुंच जाए, तो वही 100 डॉलर अब ₹9,700 बन जाएंगे।
यानी बिना बिजनेस बढ़ाए ही कंपनी की कमाई रुपये में ज्यादा दिखाई देने लगती है। इससे कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन बेहतर हो जाता है।
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक रुपये में हर 1% गिरावट से बड़ी आईटी कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन में 20 से 30 बेसिस पॉइंट तक सुधार हो सकता है। यही वजह है कि जैसे-जैसे रुपया कमजोर हो रहा है, वैसे-वैसे आईटी शेयरों में खरीदारी बढ़ रही है।
लगातार चौथे दिन आईटी शेयरों में तेजी
बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बावजूद आईटी सेक्टर मजबूती दिखा रहा है। पिछले चार कारोबारी सत्रों से कई आईटी कंपनियों के शेयरों में लगातार तेजी दर्ज की गई है।
पिछले एक सप्ताह में प्रमुख आईटी शेयरों का प्रदर्शन
| कंपनी | अनुमानित तेजी |
|---|---|
| Infosys | करीब 8% |
| Tech Mahindra | करीब 8% |
| TCS | करीब 3.5% |
| Wipro | करीब 3.5% |
| Coforge | मजबूत बढ़त |
| Oracle Financial Services | तेजी बरकरार |
विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी मुद्रा से होने वाली आय के कारण निवेशकों का भरोसा आईटी सेक्टर पर मजबूत बना हुआ है।
नारायण मूर्ति और अजीम प्रेमजी को कैसे होता है फायदा?
भारत के कई बड़े उद्योगपतियों की संपत्ति उनकी कंपनियों के शेयरों से जुड़ी होती है। उदाहरण के लिए: Narayana Murthy का बड़ा निवेश Infosys में है। Azim Premji की संपत्ति का बड़ा हिस्सा Wipro के शेयरों से जुड़ा है।
जब आईटी कंपनियों के शेयर बढ़ते हैं, तो इन उद्योगपतियों की नेटवर्थ भी तेजी से बढ़ती है। यही कारण है कि रुपये की कमजोरी जहां आम जनता और आयात आधारित सेक्टर के लिए चिंता बढ़ाती है, वहीं आईटी अरबपतियों के लिए यह फायदे का मौका बन जाती है।
रुपये की गिरावट से आम लोगों पर क्या असर पड़ता है?
आईटी कंपनियों को फायदा जरूर मिलता है, लेकिन देश की बड़ी आबादी के लिए रुपये की कमजोरी परेशानी बढ़ा सकती है।
1. पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में आयात करता है। तेल का भुगतान डॉलर में होता है। ऐसे में डॉलर महंगा होने पर भारत को ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
2. महंगाई बढ़ सकती है
तेल महंगा होने का असर: ट्रांसपोर्ट, सब्जियां, दूध, ऑनलाइन डिलीवरी, एयर टिकट, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी चीजों पर पड़ता है।
3. विदेश में पढ़ाई और यात्रा महंगी
जो छात्र अमेरिका, कनाडा या यूरोप में पढ़ाई कर रहे हैं, उनकी फीस और रहने का खर्च बढ़ सकता है।
4. विदेशी निवेश घट सकता है
अगर विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकालते हैं, तो शेयर बाजार में दबाव बढ़ सकता है।
आखिर रुपया कमजोर क्यों हो रहा है?
रुपये की गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं: अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहना, डॉलर इंडेक्स मजबूत होना, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, मध्य पूर्व तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, भारत का बढ़ता आयात बिल हाल के दिनों में पश्चिम एशिया के तनाव और क्रूड ऑयल में तेजी ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
क्या आगे भी आईटी शेयरों में तेजी रह सकती है?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर: डॉलर मजबूत रहता है, रुपया कमजोर बना रहता है, अमेरिका में टेक खर्च स्थिर रहता है तो भारतीय आईटी कंपनियों को आगे भी फायदा मिल सकता है।
हालांकि, केवल करेंसी के भरोसे लंबी तेजी संभव नहीं होती। अमेरिका की अर्थव्यवस्था, AI निवेश, ग्लोबल टेक डिमांड और कॉर्पोरेट खर्च जैसे फैक्टर भी आईटी सेक्टर की दिशा तय करेंगे।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
रुपये की कमजोरी ने एक बार फिर यह दिखाया है कि हर आर्थिक संकट में कुछ सेक्टर ऐसे होते हैं जिन्हें फायदा मिलता है। फिलहाल आईटी सेक्टर उन्हीं में से एक है। लेकिन निवेशकों को केवल करेंसी मूवमेंट देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि: कंपनियों के रिजल्ट, ऑर्डर बुक, डॉलर रेवेन्यू, मार्जिन गाइडेंस, ग्लोबल डिमांड जैसे फैक्टर्स को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।)
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