अमेरिका की दिग्गज निवेश बैंकिंग कंपनी Goldman Sachs अब अपने कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित “डिजिटल एजेंट्स” को शामिल करने जा रही है। कंपनी के प्रेसिडेंट और मुख्य परिचालन अधिकारी जॉन वाल्ड्रॉन ने कहा है कि आने वाले समय में बैंक की पारंपरिक “मानव असेंबली लाइन” तेजी से डिजिटल होने वाली है और AI एजेंट्स कंपनी के “रोबोट” की तरह काम करेंगे।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी नहीं है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान पूरी दुनिया के बैंकिंग और कॉरपोरेट सेक्टर के लिए एक बड़ा संकेत है कि अब AI केवल प्रयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कंपनियों के मुख्य कामकाज का हिस्सा बनता जा रहा है।
“डिजिटल एजेंट्स हमारे रोबोट होंगे”
एक इंटरव्यू के दौरान जॉन वाल्ड्रॉन ने कहा कि Goldman Sachs लंबे समय से खुद को एक “मानव असेंबली लाइन” की तरह देखता रहा है। उनका कहना था कि बैंक के भीतर हजारों कर्मचारी डेटा विश्लेषण, वित्तीय मॉडलिंग, रिपोर्ट तैयार करने, प्रेजेंटेशन बनाने और ग्राहकों को सलाह देने जैसे काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोबोट कई दशक पहले आ चुके थे, लेकिन बैंकिंग सेक्टर में ऐसा बदलाव नहीं आया क्योंकि बैंक मुख्य रूप से सूचना आधारित संस्थाएं हैं। अब Generative AI इस अंतर को खत्म करने जा रहा है।
वाल्ड्रॉन ने कहा कि आने वाले समय में बैंक की कार्यप्रणाली पूरी तरह बदल जाएगी और डिजिटल एजेंट्स कर्मचारियों के कई नियमित कार्यों को संभालेंगे। उनके मुताबिक इससे कंपनी ज्यादा मजबूत, तेज और बड़े स्तर पर काम करने में सक्षम बनेगी।
क्या AI की वजह से नौकरियां जाएंगी?
AI को लेकर सबसे बड़ा डर यही है कि क्या कंपनियां बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी करेंगी। Goldman Sachs ने फिलहाल ऐसे संकेत नहीं दिए हैं।
जॉन वाल्ड्रॉन ने कहा कि हाल के महीनों में टेक्नोलॉजी और फाइनेंस सेक्टर में जो छंटनी देखने को मिली है, उसका सीधा संबंध अभी AI से नहीं है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद कई कंपनियों ने जरूरत से ज्यादा भर्ती कर ली थी और अब वे अपने खर्च और कर्मचारियों की संख्या को संतुलित कर रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इंजीनियरिंग, कोडिंग और तकनीकी विशेषज्ञता वाले नए रोजगार भी पैदा होंगे। यानी कुछ पारंपरिक भूमिकाओं में कमी आ सकती है, लेकिन नई तकनीकी भूमिकाओं की मांग बढ़ेगी।
बैंकिंग सेक्टर में AI क्या-क्या बदल देगा?
Goldman Sachs के अनुसार AI आने वाले वर्षों में बैंकिंग सेक्टर के कई महत्वपूर्ण कामों को बदल सकता है।
कोडिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट
AI की मदद से सॉफ्टवेयर इंजीनियर तेजी से काम कर पाएंगे। कई दोहराए जाने वाले तकनीकी कार्य अब कुछ सेकंड में पूरे हो सकेंगे।
डेटा विश्लेषण
बैंकिंग सेक्टर में हर दिन भारी मात्रा में डेटा का विश्लेषण करना पड़ता है। AI इस प्रक्रिया को तेज और ज्यादा सटीक बना सकता है।
ग्राहकों को सलाह
वेल्थ मैनेजमेंट और निवेश सलाह देने वाले विभाग AI की मदद से ग्राहकों को ज्यादा व्यक्तिगत और बेहतर सुझाव दे सकेंगे।
जूनियर कर्मचारियों के काम
बैंकिंग सेक्टर में नए कर्मचारियों को अक्सर लंबी रिपोर्ट तैयार करने, प्रेजेंटेशन बनाने और कंपनियों के नतीजों का सार निकालने जैसे काम दिए जाते हैं। AI इन कामों को काफी हद तक ऑटोमेट कर सकता है।
Goldman Sachs पहले भी दे चुका है चेतावनी
Goldman Sachs के अर्थशास्त्रियों ने पहले भी AI को लेकर बड़ी चेतावनी दी थी। कंपनी की एक रिपोर्ट के अनुसार AI भविष्य में वैश्विक नौकरी बाजार को बड़े स्तर पर प्रभावित कर सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया था कि:
- अमेरिका में लगभग 25 प्रतिशत कार्य घंटों पर AI का असर पड़ सकता है।
- दुनिया भर में करीब 30 करोड़ नौकरियां AI आधारित ऑटोमेशन से प्रभावित हो सकती हैं।
- अगले दशक में अमेरिका में 6 से 7 प्रतिशत नौकरियां खत्म हो सकती हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि शुरुआती स्तर की ऑफिस नौकरियां सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं, खासकर वे काम जिनमें डेटा प्रोसेसिंग, रिपोर्टिंग और नियमित डिजिटल कार्य शामिल हैं।
सिर्फ टेक कंपनियां नहीं, अब हर सेक्टर में AI
अब तक AI को मुख्य रूप से Google, Microsoft, OpenAI और Meta जैसी टेक कंपनियों से जोड़कर देखा जाता था। लेकिन Goldman Sachs जैसे बड़े बैंक का AI को अपने मुख्य कामकाज में शामिल करना दिखाता है कि अब यह तकनीक हर उद्योग का हिस्सा बनने जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में:
- बैंकिंग
- बीमा
- कंसल्टिंग
- मीडिया
- ग्राहक सेवा
- कानूनी सेवाएं
जैसे क्षेत्रों में भी AI का असर तेजी से बढ़ेगा।
सबसे ज्यादा खतरा किन नौकरियों को?
विशेषज्ञों के अनुसार AI का सबसे ज्यादा असर उन नौकरियों पर पड़ेगा जिनमें:
- बार-बार दोहराए जाने वाले कार्य होते हैं
- डेटा एंट्री या रिपोर्टिंग शामिल होती है
- तय फॉर्मेट में दस्तावेज तैयार किए जाते हैं
- बड़े स्तर पर डिजिटल जानकारी प्रोसेस करनी पड़ती है
बैंकिंग सेक्टर में जूनियर विश्लेषक अक्सर घंटों तक एक्सेल शीट, प्रेजेंटेशन और वित्तीय रिपोर्ट तैयार करते हैं। अब यही काम AI कुछ मिनटों में कर सकता है।
Goldman Sachs का असली संदेश क्या है?
Goldman Sachs का यह बयान केवल तकनीकी बदलाव की जानकारी नहीं है। यह संकेत है कि दुनिया की बड़ी कंपनियां अब AI को अपने मुख्य संचालन का हिस्सा बना रही हैं।
कंपनी का मानना है कि AI उत्पादकता बढ़ाएगा, लागत कम करेगा, काम करने का तरीका बदलेगा, लेकिन साथ ही नई तकनीकी नौकरियां भी पैदा करेगा हालांकि यह भी सच है कि जैसे-जैसे ऑटोमेशन बढ़ेगा, पारंपरिक दफ्तर आधारित नौकरियों पर दबाव बढ़ सकता है।
भविष्य में क्या बदल सकता है?
अगर Goldman Sachs जैसी कंपनियां AI आधारित “डिजिटल फैक्ट्री फ्लोर” मॉडल अपनाती हैं, तो आने वाले वर्षों में भर्ती का तरीका बदल सकता है, शुरुआती स्तर की नौकरियां कम हो सकती हैं, AI की समझ एक जरूरी कौशल बन सकती है, कर्मचारियों का ध्यान रणनीतिक और रचनात्मक कार्यों पर ज्यादा होगा यानी आने वाले समय में केवल डिग्री नहीं, बल्कि AI के साथ काम करने की क्षमता सबसे महत्वपूर्ण पेशेवर कौशल बन सकती है।
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