Middle East Crisis Impact: पेट्रोल-डीजल से लेकर दूध और कुकिंग ऑयल तक, पिछले 2 महीनों में आम आदमी की जेब पर महंगाई की मार लगातार बढ़ती जा रही है। ऊर्जा संकट, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और सप्लाई चेन बाधाओं ने भारत में कई जरूरी चीजों को महंगा कर दिया है।
नई दिल्ली। पिछले दो महीनों में भारत में महंगाई का दबाव तेजी से बढ़ा है और इसका असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में साफ दिखाई देने लगा है। पेट्रोल-डीजल, LPG सिलिंडर, CNG-PNG, दूध, खाद्य तेल, मसाले और यहां तक कि सोना-चांदी जैसी धातुएं भी महंगी हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में जारी तनाव, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई बाधित होना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संकट है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से ट्रांसपोर्ट, बिजली उत्पादन, एविएशन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर अब खुदरा बाजारों में देखने को मिल रहा है।
क्यों बढ़ रही है महंगाई?
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम नहीं हुआ है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और LNG सप्लाई होती है। इस रूट में व्यवधान के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है।
भारत लगभग 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, उसका असर देश में पेट्रोल-डीजल, गैस और ट्रांसपोर्ट लागत पर दिखने लगता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने का असर खाद्य पदार्थों और FMCG सेक्टर तक पहुंच जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले महीनों में अगर मध्य पूर्व संकट और गहराता है तो महंगाई और बढ़ सकती है।
पिछले 2 महीनों में क्या-क्या महंगा हुआ?
| क्रमांक | वस्तु | कितनी बढ़ोतरी |
|---|---|---|
| 1 | पेट्रोल | ₹3.14 प्रति लीटर |
| 2 | डीजल | ₹3.11 प्रति लीटर |
| 3 | अमूल दूध | ₹2 प्रति लीटर |
| 4 | मदर डेरी दूध | ₹2 प्रति लीटर |
| 5 | CNG | ₹2 प्रति किलो |
| 6 | घरेलू LPG सिलिंडर | ₹60 |
| 7 | 5 किलो छोटू सिलिंडर | ₹200-₹400 तक |
| 8 | कमर्शियल LPG सिलिंडर | लगभग ₹1000 तक |
| 9 | इंडस्ट्रियल डीजल | ₹22-₹28 प्रति लीटर |
| 10 | प्रीमियम पेट्रोल | ₹5 तक |
| 11 | PNG | ₹1.70 प्रति SCM |
| 12 | ATF (एविएशन फ्यूल) | ₹8289 प्रति KL |
| 13 | सोना-चांदी आयात शुल्क | 6% से बढ़कर 15% |
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल
15 मई को सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा की बढ़ोतरी की। इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल करीब ₹97.77 प्रति लीटर और डीजल ₹90.67 प्रति लीटर पहुंच गया। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। Brent Crude कई बार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड कर चुका है। इसके अलावा शिपिंग लागत और बीमा खर्च भी बढ़ गए हैं। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट सेक्टर की लागत बढ़ती है, जिसका असर सब्जियों, दूध, राशन और ऑनलाइन डिलीवरी तक पर पड़ता है।
LPG सिलिंडर ने बिगाड़ा घरेलू बजट
मार्च से मई के बीच घरेलू LPG सिलिंडर की कीमतों में ₹60 तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं 5 किलो वाले छोटू सिलिंडर के दाम कई शहरों में ₹600 से ₹800 तक पहुंच गए हैं।
कमर्शियल LPG सिलिंडर में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली है। होटल, रेस्टोरेंट और फूड बिजनेस से जुड़े लोगों की लागत बढ़ गई है। यही वजह है कि कई शहरों में बाहर खाना और फास्ट फूड भी महंगा हो गया है।
दूध और CNG भी महंगे
ऊर्जा लागत बढ़ने का असर डेयरी सेक्टर पर भी पड़ा है। अमूल और मदर डेरी ने दूध के दाम ₹2 प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। डेयरी कंपनियों का कहना है कि पशु चारा, ट्रांसपोर्ट और पैकेजिंग लागत में बढ़ोतरी हुई है। वहीं CNG और PNG की कीमतों में बढ़ोतरी से ऑटो, टैक्सी और घरेलू गैस उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में ऑटो और कैब किराए में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
खाद्य तेल और मसाले भी हुए महंगे
महंगाई सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं है। पिछले दो महीनों में कई जरूरी खाद्य सामग्रियों की कीमतें भी बढ़ी हैं।
| खाद्य सामग्री | पुरानी कीमत | नई कीमत |
|---|---|---|
| मूंगफली | ₹160/kg | ₹200/kg |
| सूखा धनिया | ₹180/kg | ₹220/kg |
| लाल मिर्च | ₹300/kg | ₹350/kg |
| हल्दी पाउडर | ₹210/kg | ₹250/kg |
| जीरा | ₹300/kg | ₹360/kg |
| चायपत्ती | ₹500/kg | ₹545/kg |
| रिफाइंड ऑयल | ₹135/L | ₹148/L |
| सरसों तेल | ₹170/L | ₹190/L |
खाद्य तेल की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह आयात लागत बढ़ना भी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इंडोनेशिया, मलेशिया और दूसरे देशों से आयात करता है।
तांबा और एल्युमीनियम रिकॉर्ड स्तर पर
ऊर्जा संकट का असर औद्योगिक धातुओं पर भी दिख रहा है। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर तांबे की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई हैं। भारत में तांबा ₹1300 से ₹1400 प्रति किलो तक बिक रहा है। वहीं एल्युमीनियम ₹370-₹385 प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गया है। इन धातुओं के महंगे होने का असर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, वायरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़ सकता है।
सोना-चांदी पर बढ़ा आयात शुल्क
सरकार ने सोना और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। इसका असर ज्वेलरी बाजार पर देखने को मिल सकता है। जनवरी 2026 में MCX पर सोना ₹193096 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹407456 प्रति किलो तक पहुंच गई थी। हालांकि अब दोनों धातुओं में करेक्शन आया है। 15 मई की शाम MCX पर सोना लगभग ₹159100 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹272335 प्रति किलो के स्तर पर ट्रेड करती दिखी। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक फिर से सोने की ओर रुख कर सकते हैं।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
महंगाई बढ़ने का सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग पर पड़ता है। ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ता है, सब्जियां और राशन महंगे होते हैं, बिजली उत्पादन लागत बढ़ती है, हवाई यात्रा महंगी होती है, होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर प्रभावित होता है अगर आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तनाव कम नहीं हुआ तो RBI पर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रखने का दबाव भी बढ़ सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में बाजार की नजर तीन बड़ी चीजों पर रहेगी मध्य पूर्व संघर्ष की स्थिति, कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें, डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति
अगर होर्मुज रूट में व्यवधान जारी रहता है तो भारत में महंगाई और बढ़ सकती है। खासकर पेट्रोल-डीजल, गैस और खाद्य तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
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