देशभर में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग सीजन शुरू हो चुका है। आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR फॉर्म्स की एक्सेल यूटिलिटी जारी कर दी है। इसके साथ ही नौकरीपेशा कर्मचारी, पेंशनर्स और छोटे निवेशक अपना रिटर्न दाखिल करने की तैयारी में जुट गए हैं। हालांकि हर साल लाखों लोग छोटी-छोटी गलतियों की वजह से इनकम टैक्स विभाग के नोटिस का सामना करते हैं।
अगर आपकी सालाना आय 50 लाख रुपये तक है और आपकी कमाई कुछ तय स्रोतों से होती है, तो संभवतः आपको ITR-1 यानी ‘सहज’ फॉर्म भरना होगा। लेकिन इसे भरते समय कुछ जरूरी नियमों और नई रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को समझना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार आयकर विभाग डेटा मिलान और बैंकिंग ट्रांजैक्शन पर पहले से ज्यादा सख्त नजर रख रहा है।
क्या है ITR-1 या सहज फॉर्म?
आईटीआर-1, जिसे “सहज” फॉर्म भी कहा जाता है, उन व्यक्तिगत करदाताओं के लिए बनाया गया है जिनकी कुल वार्षिक आय 50 लाख रुपये तक है और जिनकी आय सीमित स्रोतों से आती है। यह भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला ITR फॉर्म है क्योंकि अधिकांश सैलरीड कर्मचारी इसी कैटेगरी में आते हैं।
आयकर विभाग ने इसे आसान और सरल बनाने की कोशिश की है ताकि सामान्य टैक्सपेयर्स बिना किसी विशेषज्ञ की मदद के भी रिटर्न फाइल कर सकें। हालांकि “सहज” नाम होने के बावजूद इसमें गलत जानकारी देना महंगा पड़ सकता है।
कौन भर सकता है ITR-1?
ITR-1 फॉर्म केवल निवासी भारतीय व्यक्तियों (Resident Individuals) के लिए उपलब्ध है। आपकी कुल आय 50 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। साथ ही आपकी कमाई निम्नलिखित स्रोतों से होनी चाहिए:
1. सैलरी या पेंशन से आय
अगर आप नौकरी करते हैं या पेंशन प्राप्त करते हैं तो आप ITR-1 फाइल कर सकते हैं।
2. एक हाउस प्रॉपर्टी से आय
यदि आपकी आय केवल एक मकान से है, जैसे किराया या स्व-अधिवासित घर, तो यह फॉर्म मान्य होगा।
3. अन्य स्रोतों से आय
इसमें शामिल हैं बचत खाते का ब्याज, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर ब्याज, इनकम टैक्स रिफंड का ब्याज, फैमिली पेंशन
4. कृषि आय
यदि कृषि से आय 5,000 रुपये तक है, तो भी ITR-1 फाइल किया जा सकता है।
5. सीमित लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन
धारा 112A के तहत 1.25 लाख रुपये तक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) होने पर भी ITR-1 फाइल किया जा सकता है, बशर्ते कोई पिछला घाटा कैरी फॉरवर्ड न हो।
कौन नहीं भर सकता ITR-1?
बहुत से लोग गलती से गलत ITR फॉर्म चुन लेते हैं, जिससे रिटर्न डिफेक्टिव घोषित हो सकता है। निम्नलिखित लोग ITR-1 नहीं भर सकते:
- बिजनेस या प्रोफेशन से कमाई करने वाले
- फ्रीलांसर या प्रोफेशनल सर्विस देने वाले लोग
- एक से अधिक हाउस प्रॉपर्टी से आय कमाने वाले
- लॉटरी या रेस के घोड़ों से कमाई करने वाले
- 1.25 लाख रुपये से ज्यादा LTCG वाले निवेशक
- विदेशी संपत्ति या विदेशी आय रखने वाले व्यक्ति
इस बार क्या बदला है?
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक AY 2026-27 की फाइलिंग में कुछ नए डिस्क्लोजर और वेरिफिकेशन नियम लागू किए गए हैं। आयकर विभाग अब AIS, बैंकिंग डेटा, TDS रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन का अधिक गहराई से मिलान कर रहा है।
यही वजह है कि छोटी गलती भी नोटिस का कारण बन सकती है।
ITR फाइल करते समय ये 5 बड़ी गलतियां बिल्कुल न करें
1. आधार वेरिफिकेशन में लापरवाही
अब केवल वेरिफाइड आधार नंबर ही स्वीकार किए जाएंगे। पहले लोग आधार एनरोलमेंट आईडी का उपयोग कर लेते थे, लेकिन अब यह मान्य नहीं है। यदि PAN और Aadhaar लिंक नहीं हैं या आधार सत्यापित नहीं है, तो आपका रिटर्न प्रोसेस अटक सकता है।
2. लोन की जानकारी छिपाना
इस बार नए रिपोर्टिंग नियमों के तहत लोन संबंधी जानकारी देना जरूरी हो गया है। अगर आपने होम लोन, पर्सनल लोन या अन्य बड़ा कर्ज लिया है, तो उसकी जानकारी सही-सही भरनी होगी।
इन विवरणों में शामिल हैं लोन की राशि, ब्याज दर, बैंक या वित्तीय संस्था का नाम, लोन अकाउंट नंबर आयकर विभाग अब बैंकिंग डेटा और फाइनेंशियल प्रोफाइल का क्रॉस-वेरिफिकेशन कर रहा है।
3. बैंक खातों की अधूरी जानकारी देना
बहुत से लोग केवल मुख्य बैंक अकाउंट की जानकारी देते हैं और पुराने खातों को छोड़ देते हैं। लेकिन नियमों के अनुसार सभी सक्रिय बैंक खातों की जानकारी देना अनिवार्य है।
हालांकि बंद या निष्क्रिय (Dormant) खातों को छोड़ा जा सकता है।
गलत बैंक जानकारी के कारण:
- रिफंड अटक सकता है
- वेरिफिकेशन में दिक्कत आ सकती है
- विभाग अतिरिक्त जांच कर सकता है
4. AIS और Form 26AS से मिलान न करना
यह सबसे आम और सबसे खतरनाक गलती मानी जाती है।
Annual Information Statement (AIS) और Form 26AS में आपकी सैलरी, TDS, ब्याज आय, शेयर लेनदेन, हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन जैसी जानकारियां दर्ज होती हैं। यदि आपने ITR में अलग आंकड़े भरे तो सिस्टम तुरंत mismatch पकड़ सकता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रिटर्न फाइल करने से पहले:
- AIS डाउनलोड करें
- Form 26AS जांचें
- TDS एंट्री मिलाएं
- बैंक ब्याज क्रॉस चेक करें
5. गलत टैक्स डिडक्शन क्लेम करना
Chapter VI-A के तहत मिलने वाली टैक्स छूट जैसे:
- 80C
- 80D
- 80CCD
- 80G
का दावा करते समय सही सेक्शन चुनना जरूरी है।
कई लोग गलत कैटेगरी में deduction डाल देते हैं, जिससे रिटर्न scrutiny में जा सकता है, refund delay हो सकता है, notice आ सकता है इस बार आयकर पोर्टल पर ड्रॉपडाउन विकल्पों का सही उपयोग करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
ITR फाइल करने की आखिरी तारीख क्या है?
जिन टैक्सपेयर्स के खातों का ऑडिट जरूरी नहीं है, उनके लिए ITR फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 तय की गई है। हालांकि विशेषज्ञ आखिरी तारीख का इंतजार न करने की सलाह देते हैं क्योंकि:
- पोर्टल पर लोड बढ़ जाता है
- तकनीकी दिक्कतें आती हैं
- गलती सुधारने का समय कम बचता है
क्यों बढ़ रही है आयकर विभाग की सख्ती?
पिछले कुछ वर्षों में आयकर विभाग ने डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को काफी मजबूत किया है। अब बैंक, म्यूचुअल फंड, स्टॉक ब्रोकर्स, NBFC और कंपनियों से डेटा सीधे विभाग तक पहुंचता है।
AIS और डेटा एनालिटिक्स की मदद से विभाग अब आसानी से पता लगा सकता है कि किसने आय छिपाई, किसने गलत deduction लिया, किसने ब्याज आय नहीं दिखाई यही वजह है कि “गलती से छूट गया” वाला तर्क अब ज्यादा काम नहीं आता।
विशेषज्ञ क्या सलाह दे रहे हैं?
टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार इस बार रिटर्न फाइल करते समय जल्दबाजी से बचना चाहिए। खासकर पहली बार ITR भरने वाले लोग:
- सही फॉर्म चुनें
- AIS और 26AS मिलाएं
- सभी बैंक खातों का विवरण दें
- deduction proofs संभालकर रखें
- अंतिम सबमिशन से पहले पूरा फॉर्म दोबारा जांचें
सही जानकारी के साथ समय पर रिटर्न फाइल करने से न केवल नोटिस से बचा जा सकता है, बल्कि भविष्य में लोन, वीजा और वित्तीय प्रोफाइल को भी फायदा मिलता है।
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