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Success Story: लैब से कड़ाही तक… साइंटिस्ट पति-पत्नी ने छोड़ी नौकरी, बेचे समोसे और खड़ा कर दिया ₹45 करोड़ का ब्रांड

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/14 at 11:20 पूर्वाह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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8 Min Read
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भारत में स्टार्टअप की दुनिया में अक्सर टेक कंपनियों और ऐप बेस्ड बिजनेस की चर्चा होती है। लेकिन बेंगलुरु के एक पति-पत्नी ने यह साबित कर दिया कि अगर आइडिया दमदार हो तो समोसे जैसा पारंपरिक भारतीय स्नैक भी करोड़ों का कारोबार बना सकता है। बायोटेक्नोलॉजी बैकग्राउंड वाले शिखर सिंह और उनकी पत्नी निधि सिंह ने हाई-पैकेज नौकरी छोड़कर ऐसा कदम उठाया जिसे सुनकर उनके करीबी भी हैरान रह गए थे। दोनों ने तय किया कि वे “समोसा” को एक संगठित और ब्रांडेड बिजनेस में बदलेंगे।

Contents
मोटी सैलरी छोड़ने का फैसला आसान नहीं थासमोसे में लगाया साइंस का तड़का300 स्क्वायर फीट की छोटी रसोई से शुरुआतबिजनेस बचाने के लिए बेच दिया घरधीरे-धीरे बनने लगी बड़ी पहचानआज 8 से ज्यादा शहरों में मौजूदगीभारतीय स्नैक मार्केट में बड़ा अवसरउनकी सफलता से क्या सीख मिलती है?1. बड़ा बिजनेस हमेशा नई चीज से नहीं बनता2. टेक्नोलॉजी हर जगह काम आती है3. Risk लेने की हिम्मत जरूरी4. Indian Food का भविष्य मजबूतWhy It Matters

आज उनका स्टार्टअप ‘Samosa Singh’ देश के कई शहरों में फैल चुका है और करीब ₹45 करोड़ का कारोबार कर रहा है। यह कंपनी रोजाना हजारों समोसे बेचती है और एयरलाइंस से लेकर कॉर्पोरेट ऑफिस तक इसके ग्राहक हैं।

मोटी सैलरी छोड़ने का फैसला आसान नहीं था

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साल 2015-16 के आसपास शिखर और निधि अपनी-अपनी प्रोफेशनल जिंदगी में अच्छी स्थिति में थे। दोनों बायोटेक्नोलॉजी फील्ड से जुड़े हुए थे और स्थिर करियर बना चुके थे। लेकिन इसी दौरान उन्होंने एक ऐसी चीज नोटिस की जिसने उनकी सोच बदल दी।

उन्होंने देखा कि समोसा भारत का सबसे लोकप्रिय स्नैक होने के बावजूद बड़े ब्रांडेड फूड बिजनेस में उसकी मजबूत मौजूदगी नहीं थी। पिज्जा, बर्गर और कॉफी ब्रांड्स तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन भारतीय स्नैक्स अभी भी असंगठित बाजार में बिखरे हुए थे। यहीं से “Samosa Singh” का आइडिया जन्मा।

करीबियों ने उन्हें समझाया कि इतनी अच्छी नौकरी छोड़ना जोखिम भरा कदम है। लेकिन शिखर सिंह का मानना था कि अगर किसी बिजनेस को सच में सफल बनाना है तो आधे मन से नहीं किया जा सकता। उन्होंने सबसे पहले अपनी नौकरी छोड़ी ताकि पूरा फोकस स्टार्टअप पर लगा सकें।

समोसे में लगाया साइंस का तड़का

इस कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही है कि उन्होंने समोसे को सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि “साइंटिफिक प्रोडक्ट” की तरह देखा। डिलीवरी फूड बिजनेस में सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि तला हुआ स्नैक कुछ समय बाद नरम और गीला हो जाता है। समोसे के साथ भी यही दिक्कत थी। डिलीवरी तक पहुंचते-पहुंचते उसका कुरकुरापन खत्म हो जाता था।

बायोटेक बैकग्राउंड होने के कारण शिखर और निधि ने इस समस्या पर वैज्ञानिक तरीके से काम किया। उन्होंने ऐसी तकनीक और रोलर्स विकसित किए जो मैदे के ग्लूटेन बॉन्ड्स को नियंत्रित करते थे। इससे समोसे लंबे समय तक क्रिस्प बने रहते थे। उनका दावा था कि उनके समोसे डिलीवरी के कई घंटे बाद भी कुरकुरे बने रहते हैं। यही USP बाद में उनके बिजनेस की सबसे बड़ी ताकत बन गई।

300 स्क्वायर फीट की छोटी रसोई से शुरुआत

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आज करोड़ों का कारोबार करने वाली कंपनी की शुरुआत बेहद छोटे स्तर से हुई थी। बेंगलुरु में लगभग 300 वर्ग फीट की छोटी रसोई और सिर्फ एक रसोइए के साथ उन्होंने काम शुरू किया। शुरुआती दिनों में:

  • शिखर खुद डिलीवरी करते थे
  • निधि ऑपरेशन और मैनेजमेंट संभालती थीं
  • कई बार दोनों को खुद किचन में भी काम करना पड़ता था

यह वह दौर था जब हर ऑर्डर बिजनेस के लिए महत्वपूर्ण होता था।

बिजनेस बचाने के लिए बेच दिया घर

स्टार्टअप की शुरुआती सबसे बड़ी चुनौती फंडिंग थी। बिजनेस बढ़ रहा था लेकिन मांग पूरी करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए निवेश की जरूरत थी। ऐसे समय में इस कपल ने बड़ा जोखिम उठाया। उन्होंने अपना खुद का घर बेच दिया ताकि बिजनेस में पैसा लगाया जा सके।

हर उद्यमी ऐसा कदम नहीं उठा पाता। लेकिन शिखर और निधि को अपने आइडिया पर भरोसा था। यही भरोसा आगे जाकर उनकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ।

धीरे-धीरे बनने लगी बड़ी पहचान

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जब उनके समोसों की गुणवत्ता और स्वाद की चर्चा बढ़ने लगी तो बड़े ग्राहक भी जुड़ने लगे। कंपनी को कॉर्पोरेट ऑफिस, कैफेटेरिया, एयर इंडिया जैसी एयरलाइंस, फूड कोर्ट्स से ऑर्डर मिलने लगे। इससे ब्रांड को तेजी से पहचान मिली और बिजनेस स्केल होने लगा।

आज 8 से ज्यादा शहरों में मौजूदगी

अब “Samosa Singh” सिर्फ एक लोकल स्टार्टअप नहीं रह गया है। कंपनी कई शहरों तक फैल चुकी है और हर दिन करीब 50,000 समोसे बेचती है। ब्रांड ने सिर्फ पारंपरिक आलू समोसे तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने नए फ्लेवर भी लॉन्च किए मंचूरियन समोसा, चीज चिली समोसा, फ्यूजन वैरायटी, अलग-अलग रीजनल फ्लेवर यानी उन्होंने भारतीय स्ट्रीट फूड को मॉडर्न फूड ब्रांड में बदलने की कोशिश की।

भारतीय स्नैक मार्केट में बड़ा अवसर

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भारत का स्नैक मार्केट तेजी से बदल रहा है। पहले जहां लोग केवल लोकल दुकानों पर निर्भर थे, वहीं अब ब्रांडेड और हाइजीनिक स्नैक्स की मांग बढ़ रही है।

विशेषज्ञों के मुताबिक:

  • फूड डिलीवरी ऐप्स के बढ़ने से organized snack brands को फायदा मिला
  • युवा ग्राहक नए फ्लेवर पसंद कर रहे हैं
  • ब्रांडिंग और consistency अब बड़ी भूमिका निभा रहे हैं

Samosa Singh ने इसी बदलाव को सही समय पर पहचान लिया।

उनकी सफलता से क्या सीख मिलती है?

1. बड़ा बिजनेस हमेशा नई चीज से नहीं बनता

कई बार पुरानी और साधारण चीज को नए तरीके से पेश करना ही सबसे बड़ा अवसर बन जाता है।

2. टेक्नोलॉजी हर जगह काम आती है

उन्होंने फूड बिजनेस में साइंस और बायोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया। यही उन्हें दूसरे खिलाड़ियों से अलग बनाता है।

3. Risk लेने की हिम्मत जरूरी

नौकरी छोड़ना और फिर घर बेचकर बिजनेस में पैसा लगाना आसान फैसला नहीं था।

4. Indian Food का भविष्य मजबूत

भारतीय स्नैक्स को अगर सही ब्रांडिंग और क्वालिटी के साथ पेश किया जाए तो वे ग्लोबल स्तर तक जा सकते हैं।

Why It Matters

भारत में स्टार्टअप की अगली बड़ी लहर सिर्फ टेक सेक्टर से नहीं आएगी। फूड, लोकल ब्रांड्स और पारंपरिक भारतीय उत्पादों में भी बड़ा अवसर छिपा हुआ है। Samosa Singh की कहानी दिखाती है कि अगर innovation, branding और execution मजबूत हो तो “समोसा” जैसा साधारण प्रोडक्ट भी करोड़ों का बिजनेस बन सकता है।

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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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